क्या योगी को अलग-थलग छोड़ दिया BJP आलाकमान ने
अभिमुक्तेश्वरानंद के संगम स्नान को लेकर के जो विवाद चल रहा है, उस पर बीजेपी मुश्किल में है, जिस तरह से अभिमुक्तेश्वरंद के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का समर्थन आ गया है, इन सब ने भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें तब बढ़ा दी हैं जब 2027 में चुनाव होने हैं और समय अब बहुत कम है। एक साल से का समय बचा हुआ है। वो किस तरह से हिंदू वोटर्स को अपने साथ रखें। लेकिन जिस तरह का सपोर्ट योगी को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व से जाना चाहिए वो दिख नहीं रहा है, विशेष रूप से ना कोई प्रवक्ता बोलता हुआ दिख रहा है। ये थोड़ा सा मामले को और उलझा रहा है। इस पूरे मामल में अलग थलग पड़ गए है योगी आदित्यनाथ। दूसरी तरफ जो उनके उप मुख्यमंत्री हैं केशव प्रसाद मौर्य उन्होंने अभिमक्तेश्वरानंद के सम्मान में कसीदे भी पड़ दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने उनसे उनकी पदवी और यह पूछा कि क्यों ना आपको जो अलॉट लैंड अलॉट हुआ है कुंभ में उसको कैंसिल किय जाए। तो ये एक बड़ी मुश्किल वाली स्थित है अब देखना है कि भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में इस मामले से कैसे निपटती है और योगी आदित्यनाथ इस पूरी कोशिश में है कि इस मामले को जितनी जल्दी से जल्दी निपटारा या खत्म किया जाए और यही केंद् की भाजपा भी चाह रही है।
तीन राज्यों में क्यों आ रही BJP को समस्या

कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल ये इन तीनों के राज्यपाल ने विधानसभा में जो अभिभाषण होता है उसका बॉयकॉट किया है, वॉकआउ किया है। अब ये तीनों किसी किसी तरह से संवैधानिक पद है और जो संवैधानि जिम्मेदारियां है उसको लेकर के उसको लेकर के बड़ी विषम सी परिस्थिति पैदाहो गई है। जहां पर यह कहा जा रहा है कि ये संवैधानि संकट वाली स्थिति है। अब बहुत सारी चीजे थी। पहला जो मामला था वह तमिलनाडु के गवर्नर को लेकर था, तमिलनाडु के गवर्नर रवि साहब , जिन्होंने स्टेट का एंथम है उसके बाद नेशनल एंथम भी पढ़े जाने की बात कहीजिसको प्रदेश सरकार ने नहीं माना तो उन्होंने वॉक आउट कर दिया और इसके पहले भी बहुत सारी चीजों को लेकर के प्रदेश सरकार और गवर्नर में विवाद वाली स्थिति पैदा होती रही है। अब ये जो मामला था तमिलनाडु का रहा। लेकिन उससे तुरंत बाद ही ये केरल में ये मामला फिर आया जहां पर जब केरल के राज्यपाल राजेंद्र विशवनाथन हैं, उन्होंने पूरी स्पीच नहीं पढ़ी।। तो फिर केरल के मुख्यमंत्री विजय पिनराई ने इनकी स्पीच खत्म होने के बाद पूरी स्पीच पढ़ी। सीधे-सीधे ये मामले फेडरल गवर्नमेंट और प्रदेश की सरकारों के बीच कंट्राडिक्शन का मामला था और येकंट्राडिक्शन जो है वो फेडरल स्ट्रक्चर में ना प्रदेश के लि अच्छा है ना केंद्र के लिए अच्छा है लेकिन जो विपक्ष या इंडिया की सरकारें हैं वो लगातार इस तरह की लगातार इस तरह की कवायद कर रही। इस तरह की स्थितियां पैदा कर रही हैं। जहां पर दोनों के बीच कॉन्फ्रंटशन हो तीसरा मामला जो है वो अभी थावर चंद गहलोत का है। जिन्होंने जिनको जब भाषण का पढ़ने को हुआ तो उन्होंने पहली लाइन औरआखिरी लाइन पढ़ी। वहां पर भी एक्सजेक्टली वही मामला था कि स्टेट और उसमें स्टेट और फेडरल स्ट्रक्चर में कॉन्फ्रंटेशन की बात थी जिसको लेकर के वो क्या हालांकि बाद में बहुत सारा जोमुख्यमंत्री हैं और बहुत सारे नेताओं ने बोला कि ये कॉन्स्टिट्यूशन के खिलाफ है। बीजेपी ने उसका पलट जवाब देते हुए बोला कि नहीं आप दलित राज्यपाल के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।
राहुल गांधी का नया शगुफा नहीं जानते जी राम जी को

जी राम जी के बहाने राहुल गांधी का हिंदुत्व पर एक बार फिर हमला किया गया हुआ वो एक किसी कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे तो उस बात के रखते के दौरान उन्होंने जो ऑडियंस थी उनसे मुखातिब होते हुए कहा कि मुझे तो यह नहीं मालूम है कि मुझे तो जो नया बिल पास हुआ है उसका नाम क्या है आप लोग बताइए क्या नाम है उसका तो उधर से आवाज आती है कि जी राम जी तो उसको डेलीिबेरेटली जानबूझ के अनसुनी करते हुए वो एक कंटेंप्ट भाव से ग्राम बिल ग्राम ग्राम पता नहीं क्या है। इस तरह की बात करते हैं जो साफ तौर पर यह दिखाता है कि वो किस तरह से हिंदू घृणा से भरे हुए हैं और किस तरह से वो भगवान राम के नाम को लेकर के भी इस तरह की बात कर सकते हैं।कि एक बड़ा हिंदुओं का वर्ग है। वह उस मामले में भी उनके साथ खड़ा नजर आता है। तो वोएक वो उसमें उसमें किसी के चॉइस का मामला नहीं। वो सीधे तौर पर हमारे पूरे शिक्षा व्यवस्था का है। हमारी शिक्षा व्यवस्था ने हमें आत्मग्लानी और आत्मघणा इतना भर दिया है हमारे अंदर कि हमारे आराध्य की हमारे प्रतीक चिन्ह की भी अगर कोई आलोचना करता है, कोई उसके बारे में भला बुरा बोलता है।उसको भी हम राजनीति के चश्मे से देखने लगते हैं और उसमें भी बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खोजने लगते हैं। तो यह उसी का प्रतीक है और जो राहुल गांधी ने यह बात कही है वह उसी तरह का है और वह लगातार इससे बाज नहीं आ रहे हैं।
Congress क्या कर रही बार बार शशि थरूर का अपमान

अब शशि थरूर ने केरल चुनाव को लेकर के बैठक होने वाली है। उस बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है, अब केरल के चुनाव में शशि थरूर को शामिल ना करना और शशि थरूर के साथ दुर्व्यवहार करना निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा और यह वैसा ही मामला होगा जब जैसा कि कांग्रेस बाकी सारे चुनाव में करती रही है। कम से कम अभी के जो चुनाव हुए हैं, चाहे वह हरियाणा का चुनाव रहा हो, चाहे दिल्ली का चुनाव रहा हो, चाहे महाराष्ट्र का चुनाव रहा हो, कांग्रेस इसी चाहे बिहार का चुनाव रहा हो, कांग्रेस इसी तरह की गलतियां करती रही। उस गलतियां का गलतियों का खामियाजा उसको भुगतना पड़ा और सब जगह से वो साफ हो गई है। केरल जहां पर दो बार से वो लगातार चुनाव हार रही है। क्या कांग्रेस चाहती है कि वो तीसरी बार भी चुनाव हारे? इस बार उसके बहुत फेयर चांसेस हैं। लेकिन जिस तरह से वो अपने नेताओं को और जिस तरह से वो हिंदुओं को आत कर रही इसलिए कि अभी वो जमाते जिस तरह से वहां एक मुस्लिम संगठन जो इस्लामिक रिपब्लिक स्थापित करने की बात कर रहा हो उसके समर्थन में जिस तरह से कांग्रेस खड़ी हो रही है वो निश्चित तौर पर उसको नुकसान को पहुंचाएगा। ये अलग बात है कि केरल में सिर्फ 55% के आसपास हिंदू हैं। लेकिन अगर अगर कोई इस्लामिक रिपब्लिक स्थापित करने का समर्थन में करेगा तो इस बात को क्रिश्चियंस भी नहीं टोलरेट करेंगे। तो और इसको लेकर के विरोध हो रहा है और लेफ्ट ने उनसे पूछा लेफ्ट पार्टी जो है वहां के लेफ्ट कॉम्बिनेशन मतलब एलडीएफ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट जो है उसने पूछा भी कि कांग्रेसी ऐसा क्यों कर रहे और अगर ऐसा होता है तो ऐसा अगर होता है तो वो कुछ दृष्टि से भारतीय जनता पार्टी को भी मजबूत करेगा और अभी अमित शाह ने बोला है कि हम जितने वोट परसेंट पर हैं उस वोट परसेंट से हम सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं या सरकार बनाने की दिशा में हम अग्रसर हो सकते हैं और हम सरकार बना सकते हैं। तो यह जो राहुल गांधी जो शशि थरूर को मीटिंग में अभी पिछली मीटिंग में जब उनको बुलाया था तो उनको उनको उनके साथ राहुल गांधी की उपस्थिति में दुर्व्यवहार किया गया और वहां के बाद से निर्णय किया गया कि अब मतलब उनके साथ जो दुर्व्यवहार हुआ उसके बाद वो शायद बैठक में ना जाए। इस तरह की बात निकल कर के आ रही है। तो क्या कांग्रेस एक बार फिर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना चाहती है?
