Congress के Muslim चेहरे हुए नाराज -तीन राज्यों में भुगतना पड़ेगा खामियाजा
अभी तक यही चर्चा चलती थी कि बीजेपी में मुसलिम नेताओं को जगह नहीं मिलती और जो गिने -चुने हैं उन्हें भी वो Power नहीं दी जाती जिसके वो हकदार हैं , पर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस जिसे मुस्लिमों के हितों के लिए जाना जाती रहा है आज यह हाल है कि कांग्रेस के ही कुछ मुस्लिम कद्दावर नेताओं ने पार्टी में उनकी खुलकर उपेक्षा का आरोप लगाना शुरू कर दिया है, इसकी शुरूआत पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता शकील अहमद ने की और राहुल गांधी की सार्वजनिक रूप से आलोचना कर डाली , उन्होने साफ कहा कि पार्टी में मुसलमानों की अनदेखी हो रही है और यही नहीं कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व मुस्लिम नेताओं के साथ तस्वीर खिंचाने से हिचकिचाता है। अब शीर्ष नेतृत्व की बात करें तो सब समझ गए कि इशारा राहुल गांधी की तरफ है, बस इसके बाद पार्टी के एक और वफादार मुसलमान नेता राशिद अल्वी ने भी शकील अहमद के सुर में सुर मिला दिया और कहा कि पार्टी में मुसलमानों की उपेक्षा हो रही है। और राहुल गांधी के पास मुस्लिम नेताओं से मिलने के लिए वक्त नहीं है। पार्टी के कईं और मुस्लिम नेता जो खुलकर सामने नहीं आए पर दबे स्वर में उनका मानना है कि कांग्रेस में मुस्लिम नेताओं की अनदेखी जारी रही तो ओवैसी जैसे नेता मुसिल्म वोटर्स को पूरी तरह से अपने साथ कर लेंगे, ये नेता कई पुराने मुस्लिम नेताओं के बाहर निकलने पर भी चिंतित थे और मान रहे हैं कि अगर मुस्लिम नेतृत्व को नजरअंदाज किया जाता रहा, तो असदुद्दीन ओवैसी जैसे कईं नेता सामने आते रहेंगे।वैसे इस मत पर कांग्रेस के बिहार से सांसद तारिक अनवर ने भी हामी भरी।
पश्चिम बंगाल, केरल और असम में Muslim मतदाता ही करता है हार-जीत का फैसला

कांग्रेस के कई नेता मान रहे हैं कि मुस्लिम नेताओं का खुलकर कांग्रेस पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाना देश के कईं राज्यों में होने वाले चुनाव पर बहुत बुरा असर डाल सकता है क्योंकि इन राज्यों में मुस्लिम जनसंख्या ज्यादा है और किसको हराना है किसको जीताना है यह इनके वोट पर काफी हद तक निर्भर करता है। जैसे कि पश्चिम बंगाल, केरल और असम में चुनाव जल्द ही आने वाले हैं और जहां केरल में 27 फीसदी है, वहीं पश्चिम बंगाल में 24 फीसदी मुस्लिम आबादी है, असम में यह आंकड़ा 34 फीसदी के आसपास है। कांग्रेस बराबर कोशिश कर रही है कि इन वोटर्स को अपने पाले में ला सके और वापस गद्दी वापसी की रणनीति बना रही थी, पर अचानक कांग्रेस के बहुत वरिष्ठ नेता रह चुके शकील अहमद उसके बाद राशिद अल्वी और फिर तारिक अनवर के जो बयान सामने आए हैं कि कांग्रेस मस्लिम नेताओं की उपेक्षा कर रही है , उन्होंने राहुल गांधी को भी आड़ हाथों लिया। उससे साफ लग रहा है कि कांग्रेस का इन राज्यों में जीत के लिए बनाया जाने वाला समीकरण बुरी तरह से बिगड़ रहा है। वैसे कांग्रेस में गुलाम नबी आजाद ने सबसे पहले 2022 में कांग्रेस से अपना 50 साल पुराना नाता तोड़ा था और उन्होंने खुले में राहुल गांधी पर खुला हमला बोलकर उन्हें इम्मैच्योर और बचकानी हरकत करने वाला बताया था और आरोप लगाया था कि उनके आने के बाद से ही पार्टी का सलाहकार मंडल पूरी तरह ध्वस्त हो गया है, अब एक और मुस्लिम नेता शकील अहमद ने भी पार्टी में अंदरुनी कलह का आरोप लगाते हुए बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़ दी थी , परिणाम सबने देखा कांग्रेस पार्टी 19 सीट से सिमटकर 6 सीट पर आ गई। शकील अहमद का आरोप है कि एक तरफ राहुल गांधी मुसलमानों से लगातार दूरी बना रहे हैं और दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी अल्पसंख्यकों को सिर्फ वोट बैंक ही समझने लगी , कांग्रेस के खिलाफ मुस्लिम नेताओं की बागावत का मामला यहीं नहीं रुक रहा है, अब कांग्रेस के पुराने नेता तारिक अनवर और राशिद अल्वी ने भी शकील अहमद के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया, साफ लग रहा है कि जो मुस्लिम नेता और जनता दशकों तक कांग्रेस की रीढ़ बनी रही है, उससे जीतती रही आज अपने को ठगा और उपेक्षित महसूस कर रही है, और इसका खामियाजा जाहिर तौर पर Congress को केरल, पशिचम बंगाल और असम में देखना ही पड़ेगा।
