तेजस्वी यादव -लालू यादव दोनों को किसने दिया एक बार फिर बड़ा झटका

सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले से UGC पर राजनीति करने वाले कईं दलों को गहरा झटका पहुंचा है, UGC के बहाने ये दल ना केवल बीजेपी की जड़े कमजोर करने में लग गए थे बल्कि अपनी राजनीतीक रोटियां सेंकने और दोबारा हारी हुई गद्दी पाने के सपने भी देख रहे थे, यही नहीं इस फैसले से मायावती और अखिलेश ने तो UGC पर गिरगिट की तरह अपना स्टैंड ही बदल डाला, पहले कहां ये नेता इसे SC-ST समुदाय को न्याय दिलाने वाला कानून बता रहे थे, पर जैसे ही इसके विरोध नें पूरे देश का ब्राहण, राजपूत और दूसरे वर्ग आंदोलन पर उतरे इन नेताओं का सुर ही बदल गया और उन्हें सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्याय संगत लगने लगा। सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नियमों को बंटवारे वाला बताते हुए इस पर स्टे लगा दिया है।
UGC पर स्टे RJD को क्या लगा धक्का

वैसे इस स्टे से सबसे ज्यादा धक्क RJD की पार्टी को लगा है। जैसे कि सबको पता है कि बिहार की राजनीती में चाहे RJD के लालू यादव- तेजस्वी यादव हों या JDU के नीतीश कुमार, सभी ने पिछड़ावाद और दलित राजनीती करके गद्दी हासिल की है। अब नीतीश तो राज कर रहे हैं पर दलित राजनीती के जरिए बरसों तक बिहार में राज करने वाले लालू वापस सत्ता पाने का छटपटा रहे हैं और जैसे ही UGC का मुद्दा सामने आया RJD बिहार में उसे लपक कर अपना वोट बैंक दोबारा तैयार करने में जुट गई थी, पर इस नियम पर स्टे आने से RJD की उम्मीद को करारा झटका लगा है। और माना जा रहा है कि स्टे लगते ही जाने अंजाने में बिहार की राजनीती में पिछड़ावाद की राजनीति को जबरदस्त ब्रेक लग गया। बिहार की राजनीती में एनडीए की पैठ से परेशान RJD ने यूजीसी के नए नियम के बलबूते पर एक बार फिर बिहार में कई दशक पहले वाले ‘मंडल युग’ को दोबारा लाने की जो कोशिश की उस पर एकदम से ब्रेक लग गया।
नीतीश – लालू दोनों की राजनीती चमकी है आरक्षण से

आपको बता दें कि बिहार में पिछड़वाद की राजनीति कर्पूरी ठाकुर के आरक्षण से शुरू हुई, और इसका पूरा फायदा लालू यादव ने उठाया। फिर पिछड़ेवाद की राजनीति के चमकते सितारे लालू यादव और नीतीश कुमार अलग हुए और दोनों ने ही यह राजनीती जारी रखी लालू का दौर खत्म हुआ और नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ लेकर बिहार में राज करना शुरू कर दिया, अब लालू एक बार फिर सपने देख रहे थे कि UGC के बहाने एक बार अपनी खोई विरासत पा लें क्योंकि UGC के नए नियम से एक बार फिर समाज अगड़ा और पिछड़ा में बंटना शुरू हो गया था, और इस मौके का फायदा उठाने को तैयार RJD के सपनों को सुप्रीम कोर्ट ने एक पल में धाराशायी कर दिया।
