BJP का दिल बड़ा नहीं शिंदे हुए नाराज
महाराष्ट्र की राजनीती और फणडवीस सरकार में इस समय सबसे ज्यादा उठापठक चल रही है एक तरफ अजीत पवार की पार्टी की शरद पवार से वापस मिलने की चर्चा जोर पकड़ रही है और दूसरी फणडवीस सरकार में सहयोगी एकनाथ शिंदे खुलकर सरकार के विरोध में खड़ हो गए हैं, जी हां पता चला है कि देश की economic capital कहे जाने वाली नवी मुंबई में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए बीजेपी और एकनाथ शिंदे के बीच जबरदस्त Competition चल रहा है, दोनों पार्टियों ने Mayor और Deputy Mayor के पद पर किसी भी तरह के समझौते से इंकार करते हुए अपने अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं, सरकार मे सहयोगी होने के बाद भी दोनों दलों का एक दूसरे पर विश्वास भी नहीं और भाजपा ने तो उम्मीदवार के लिए अपनी नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से गुप्त रखी थी , अभी बीजेपी के कद्दावर नेता गणेश नाइक ने दोनों पदों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान किया और बताया कि सुजाता सूरज पाटील महापौर और दशरथ सीताराम भगत उपमहापौर पद के लिए लडेंगे, वहीं एकनाथ शिंदे कि तरफ से सरोज रोहिदास पाटील ने महापौर और आकाश मढवी ने उपमहापौर पद के लिए नामांकन भरा।
एकनाथ शिंदे ने दो सीटों पर अपनी जिंदादिली का परिचय दिया
आपको बता दें कि हाल के निकाय चुनावों में BJP को 111 सीटों में से 65 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 42 सीटों पर जीत मिलीं थीं। अब रिजल्ट जो आया उससे साफ लगा कि BJP यहां बड़ी आसानी से अपना Mayor बनाने में सफल हो जाएगी, लेकिन एकनाथ शिंदे उसके लिए कड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यह भी हैरानी की बात है कि बहुत जगह चुनावों में BJP और शिवसेना एकसाथ चुनाव लड़े, कुछ जगहों पर अगल-अलग भी लड़े, पर बाद में साथ में आ गए पर मुंबई का मेयर पद पाना दोनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है, वैसे आपको बता दें कि हैरानी उल्हासनगर और कल्याण-डोंबिवली पर भी देखने को मिली, शिवसेना एकनाथ शिंदे ने उल्हासनगर में बहुमत हासिल किया और उसके बावजूद BJP को उपमहापौर का पद दे दिया था, उसी तरह कल्याण-डोंबिवली में भी यही हुआ पर फिर भी BJP को उपमहापौर का पद दे दिया, अब नवी मुंबई में भी एकनाथ शिंदे यही उम्मीद कर रहे थे कि चाहे BJP को स्पष्ट बहुमत मिला पर शिवसेना शिंदे गुट को उपमहापौर पद दे दिया जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ उल्टे फणडवीस सरकार ने अपना नामांकन तक छुपा कर रखा और ऐन समय में महापौर और उपमहापौर पद पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए। अब जाहिर है कि चर्चा तो चलेगी कि मुंबई ने BJP ने अपना बड़ा दिल नहीं किया ।
