टैरिफ -Modi की जीत या हार बड़ा सवाल

भारत और अमेरिका का जो ट्रेड डील हुआ है। उस ट्रेड डील के तहत जो टैरिफ भारत पर लगाया गया था , कुल मिलाकर के 50% का टैरिफ था जिसको घटा करके अब 18% कर दिया है, दिया गया है और सहमति बन गई है दोनों देशों के बीच। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद् मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बात हुई।उसके बाद इसका खुलासा हुआ कि एक समझौते पर पहुंच गए हैं। लंबे समय से इस पर चल चर्चा चली आ रही थी। पीयूष गोयल अमेरिका गए। उनके अधिकारी यहां आए और यह बातचीत लगातार हो रही थी। इस बीच लगभग एक दशक से चली आ रही बातचीत अमेरिका यूरोपियन यूनियन के साथ जहां पर एक एफटीए हुआ है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और जिसको डील्स ऑफ द डील मतलब जिसको इस तरह की संज्ञा दी जा रही है , उसको भी अमेरिका के साथ हुए समझौते के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इसलिए कि उस डील के बाद अमेरिका को बड़ा नुकसान होने वाला था। अब निश्चित तौर पर कुछ ऐसी चीजें हुई है जहां पर भारत आगे बढ़ा है और कुछ अमेरिका आगे बढ़ा है। उसके बाद ही एक मिडिल ग्राउंड पर पहुंचे हैं। रशिया के साथ हमारा तेल का क्या होगा? एनर्जी सिक्योरिटी क्या होगी? जो बात आ रही है निकल कर के कि अब भारत वेनेजुएला से तेल लेगा तो ऐसा नहीं है कि यह कुल मामला एक तरफा है। लेकिन जो भारत पर 50% की ट्रेड डील थी अब ये वो घट के 18% हो गई है। और कहा ये जा रहा है मतलब जो इस तरह की बात निकल कर के आ रही है कि इस समझौते से इस समझौते के बाद भारत की इकॉनमी पर और भी इसके पॉजिटिव रिजल्ट होंगे और यह सब कुछ जो है वह सरकार की उचित नीती के कारण ही नजर आता है। जिस तरह से प्रधानमंत्री लगातार इस मामले में चुप्पी साध करके काम कर रहे थे।

क्या BJP की नईं टीम में राम माधव की वापसी होगी —–लंबे इंतजार के बाद बना नया अध्यक्ष लेकिन टीम गायब

भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। पहले उनको कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर लाया गया। अब वो पूरी तरह से अध्यक्ष हो गए हैं। लेकिन उनकी टीम जो है लगभग 11 के आसपास उपाध्यक्ष होते हैं और लगभग नौ के आसपास महासचिव होते हैं। संगठन महासचिव और दो उप महासचिव होते हैं। वो सेक्रेटरी, नए स्पोक्सपर्सन ये ये सारा जो है वो फिर से नई टीम में गठित होता है। लेकिन इसको आने में देर लग सकती है। देर हो सकती है। उसके पीछे कारण जो बताए जा रहे हैं कि ये दोनों प्रक्रिया दो प्रक्रिया एक साथ हो सकती है। जब मोदी सरकार के तीसरे टर्म के पूरे होंगे। उसके आसपास कुछ इस तरह की गुंजाइश है कि शायदकुछ लोगों को जो मत्रिमंडल में हैं उनको संगठन में भेजा जा सकता है। जैसे उत्तर प्रदेश के जो अभी अध्यक्ष बने हैं वो वित्त राज्य मंत्री भी हैं केंद्र सरकार में तो उनको संगठन में भेज दिया गया। ऐसे ही कुछ और लोगों को संगठन में भेजा जा सकता है। महासचिव पद के लिए, प्रवक्ता पद के लिए या इस तरह के और पद के लिए और कुछ ऐसे लोग जो संगठन में हैं या कुछ ऐसे लोग जिनको सरकार में शामिल किया जा सकता है। कुछ नए लोग जैसे राम माधव की वापसी की बात कही जा रही है। कुछ लोग रिपीट होंगे लेकिन रिपीट होने की संभावनाएं बहुत कम है। प्रवक्ता में ज्यादा रिपीटेशन हो सकता है।लेकिन जो महासचिव और उपाध्यक्ष वाला पद है उसमें कम लोगों के रिपीट होने की संभावना है। और संभावना यह है कि यह जो नई टीम होगी इसमें ज्यादातर लोग जो हैं वह 50 से 55 55 साल से कम के होने वाले हैं। मतलब 60 पार के होने की संभावना बहुत कम है। अब यह नहीं कह रहा हूं कि कोई नहीं होगा, लेकिन एक दो से ज्यादा 60 से ऊपर का कोई पदाधिकारी नहीं होगा। इस तरह की बात कही जा रही है। तो जब मई जून के बाद ही नई टीम
नितिन नवीन की आएगी।

ममता बनर्जी दंगा हुआ बंगाल में दोषी है दिल्ली पुलिस

हाल ही में ममता बनर्जी दिल्ली थी और वो दो बातें थी जिन पर बहुत ज्यादा वो चर्चा कर रही थी। एक तो यह कि वह सुप्रीम कोर्ट में एक केस करने आई थी एसआईआर को लेकर के जिसमें उन्होंने मुख्यचुनाव आयुक्त को ही दोषी बनाया है। मुख मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बनाया है। और वहां से एसआईआर से बहुत सारे से जुड़े बहुत सारे ऐसे लोगों को लेकर के आई थी। तो यह पूरा मामला है। अब एसआईआर को लेकर के जिस तरह से ममता बनर्जी बहुत एग्रेसिव हैं। उसको लेकर के उनको बहुत सारे काउंटर वो भी हो रहे हैं। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि पश्चिम बंगाल में 29 तारीख को 29 जनवरी को एक बड़ी दुर्घटना हुई थी आग को लेकर के। साउथ 24 परगना जिले के आनंदपुर इलाके में और इसमें 30 लोगों के मारे जाने की बात आ रही है निकल कर के। लेकिन इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी ममता बनर्जी ने दक्षिण 24 परगना जाने की बजाय एसआईआर को लेकर के वो दिल्ली पहुंच गई और भी दिल्ली में और बहुत सारे मामले थे वो अभिषेक बनर्जी के घर उन्होंने बैठक की सब कुछ हुआ , उसके बाद उन्होंने आज दिल्ली पुलिस के बैरिकेडिंग लगाए जाने पर विरोध किया और यह कहा कि मैं बहुत खतरनाक हूं। मुझसे ज्यादा खतरनाक कोई नहीं होगा। जिस तरह के बयानों के लिए जानी जाती है। अब सीधे से स्पष्ट सा मसला है कि ममता बनर्जी को अपने हिंदू वोटर वहां के हिंदुओं से कोई लेना देना नहीं है। एसआईआर से उनको लग रहा है कि उनके मुसलमान वोट ना कट जाए। सारी कवायत उसी को लेकर के है और उससे ज्यादा महत्वपूर्ण क्या ममता बनर्जी को प्रशासन से कोई लेना देना है या नहीं है यह भी महत्वपूर्ण है। इसलिए कि 30 लोगों के मारे जाने के बाद ममता बनर्जी ने इतना भी उचित नहीं समझा कि जो विक्टिम्स हैं विक्टिम्स की फैमिली जो है उनसे मिलकर के उनको कोई सांत्वना दी जाए या उनको यह बताया जाए या उनके बारे में ख्याल किया जाए। यह ममता बनर्जी ने करना गवारा नहीं किया। तो कुल मिलाकर के यह इस तरह का प्रशासन पश्चिम बंगाल में चल रहा है और पश्चिम बंगाल की जनता इसी तरह के प्रशासन की आदि हो गई है।इसलिए कि उन वहां पर चुनाव डर से होता है। वहां चुनाव फ्री एंड फेयर नहीं होता है। यह सबको मालूम है और इसीलिए ममता बनर्जी तीन बार जीती है और अगर चौथी बार जीतती हैं तो वह भी वैसा ही होगा लेकिन जिसकी संभावनाएं बहुत कम कम है।

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