UP अखिलेश यादव पर जरूरत से ज्यादा भरोसा हो गया
लगता है यूपी के मुस्लिम नेताओं को लगने लगा है कि योगी सरकार के राज में अगर वो चुनाव लड़ते हैं तो सिर्फ समाजवादी पार्टी ही उन्हें कुछ सीटों पर जीत का सेहरा पहना सकती है, इसलिए समय रहते अखिलेश यादव का दामन थामने में ही भलाई है, अब पिछले कुछ समय से जिस तेजी से कांग्रेस और बहुजन समाजवादी पार्टी के कद्दावर मुस्लिम नेता अखिलेश का हाथ पकड़ रहे हैं, उससे साफ लग रहा है कि यूपी में अल्पसंख्यक वोटर्स कांग्रेस और बहुजन समाजवादी पार्टी से दूर जा रहे हैं, जाहिर सी बात हैं जहां उनके लीडर जाएंगे, और जिस पार्टी पर वो भरोसा करेगें मुस्लिम वोटर भी उनके साथ ही जाएगा, अब एक महीने के अंदर ही काग्रेस के दो दिग्गज मुस्लिम नेताओं नसीमुद्दीन सिद्दीकी और नसीम खान ने कांग्रेस को छोड़ समाजवादी पार्टी का हाथ थाम लिया है और अब खबरें आ रही हैं कि 2027 विधानसभा चुनावों से पहले बसपा के कद्दावर नेता और पूर्व राज्य मंत्री अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू ने अखिलेश का हाथ पकड लिया। दूसरे दलों से अपनी पार्टी में आ रहे तमाम अल्पसंख्यक नेताओं का अखिलेश भी बिना देरी किए अपनी पार्टी में स्वागत कर रहे हैं क्योंकि अखिलेश भी जानते हैं कि हर मुस्लिम नेता के पीछे पूरा वोट बैंक समाजवादी पार्टी में आ रहा है, और अगर विधानसभा में अच्छी सीटे लानी है तो इस वर्ग का साथ उनके लिए वरदान साबित होगा, क्योंकि मुसिल्म बीजेपी को तो वोट नहीं देते, पर कांग्रेस और बहुजन समाजवादी पार्टी ही मुसिल्म वोटर्स को काटती है , ऐसे में मुसिल्म नेताओं का उनकी पार्टी में आना उनके लिए चुनाव से पहले बहुत अच्छी खबर है।
UP—क्यों छोड़ रहे मुस्लिम नेता Congress का साथ

एक बार कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता कपिव सिबब्ल ने कांग्रेस छोड़ने के बाद कहा था कि अस्तबल से घोड़े भाग रहे हैं, इसपर गंभीरता से सोचना होगा, नहीं तो अस्तबल खाली हो जाएगा। कपिल सिब्व्ल का इशारा कांगेस छोड़ने वाले नेताओं की तरफ था . लगता है यूपी में कांग्रेस के साथ हाल-फिलहाल में कुछ ऐसा ही हो ही रहा है, वैसे ही कांग्रेस का यूपी में पत्ता गोल सा ही है और जिस तेजी से यहां कांग्रेस के नेता कांग्रेस छोड़कर भाग रहें हैं तो वो दिन दूर नहीं होगा जब कांग्रेस को यूपी चुनाव में एक दो सीट पाने के संघर्ष करना पड़ेगा, जीं हां अभी एक महीने पहले ही जहां कांग्रेस के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 8 साल कांग्रेस में रहने के बाद पार्टी को छोड़ दिया वहीं कांग्रेस में पिछले 18 साल रहने के बाद उनके एक और नेता नसीम खान ने कांग्रेस का झंड़ा छोड़ दिया, पता चला है कि दोनों नेताओं ने समाजवादी पार्टी का हाथ थाम लिया है। आपको बता दें कि नसीम खान के जाने से कांग्रेस को पश्चिमी यूपी में करारा झटका लगा है क्योंकि यहां नसीम खान की जबरदस्त पकड़ थी।वहीं नसीमुद्दीन सिद्दीकी जिनके बारे में कहा यही जाता है कि उन्होंने अपने अनुभव के बल पर यूपी में अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई जिसके कारण उन्हें यूपी की राजनीति का ‘चाणक्य कहा जाता है , उन्होंने भी अभी कुछ समय पहले अपने 72 करीबियों के साथ कांग्रेस छोड़ी थी। 2018 में कांग्रेस में शामिल हुए पार्टी छोड़ते समय नसीमुद्दीन ने साफ कहा जिस उद्देश्य के लिए वह पार्टी में आए थे, वह पूरा नहीं हो पा रहा. उऩ्होंने कहा कि कांग्रेस में मेरे लिए कोई काम नहीं था,इसीलिए मैंने कांग्रेस पार्टी छोड़ी
