MAHARASHTRA -उद्वव ठाकरे ना घर के ना घाट के हैं
सामना ने अपने एडिटोरियल में साफ तौर पर लिखा है कि अब आईएडीएआईए यानी की इंडी अलायंस है, उसका नेतृत्व ममता बनर्जी या एम.के स्टालिन को करना चाहिए। मतलब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री या तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, सबको पता है कि सामना अखबार , उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना के प्रभाव में है या वो उसको हैंडल करता है ,रन करता है वो राजनीतिक दल जो हिंदुत्व की बात करता रहा है जो राम मंदिर आंदोलन के लिए समर्पित करता रहा है और जो इस बात को गर्व से कहता रहा है कि जो विवादित ढांचा अयोध्या में ढहाया गया था उसमें मुख्य भूमिका शिवसैनिकों की थी। उस राजनीतिक दल का मुखपत्र यह कह रहा है कि ऐसे लोगों पर उस अलायंस का नेतृत्व सौंपा जाना चाहिए, ऐसे नेता को उस अलायंस का नेतृत्व सौंपा जाना चाहिए जो हिंदुत्व को समाप्त करने की सनातन को समाप्त करने की इरेडिकेट करने की बात करता हो। जिसकी पार्टी सनातन की तुलना डेंगू मलेरिया और एड्स से करती है, यहां ए के स्टालिन की बात हो रही है, जिनके बेटे से लेकर पार्टी के नेताओ ने जमकर सनातन धर्म का विरोध किया है। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं, वह जिस तरह की बात करती हैं या वो जिस तरह का अपीज़मेंट की राजनीति करती हैं, हिंदू विरोधी है है, ऐसे में ये सब शिवसेना की पुरानी आईडियोलॉजी जिसको लेकर शिवसेना का निर्माण हुआ था, शिवसेना ने अपनी बात कहनी शुरू की थी, उससे दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। हालांकि उसका खामियाजा उनको भुगतना पड़ रहा है और वह जिस तरह से असेंबली और उसके बाद अब जो लोकल बॉडीज के इलेक्शंस में उनका हाल हुआ है। वो भी साफ बता रहा है। लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट ये हुआ है कि शिवसेना का एकमात्र मेयर जो अभी म्युनिसिपल कॉरपोरेशंस के इलेक्शन के बाद बना है वो मुस्लिम है। यह बताता है कि किस तरह का पॉलिटिकल शिफ्ट जो है वो उद्धव ठाकरे की पार्टी ने ले लिया है। वो पूरी तरह से साफ होता है।
AASAM – CM किसका हाथ है सिर पर

आसाम के मुख्यमंत्री लगातार न केवल कांग्रेस पर आक्रमक है बल्कि जो बांग्लादेशी मुसलमान है जिसको वो मियां मुस्लिम कहते हैं उस पर भी बहुत आक्रामक हैं। अभी जब आसाम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जिन्होंने कांग्रेस से त्यागपत्र दिया तब भी अपनी बात रखते हुए उन्होंने यही कहा कि वो अकेले एक क्रेडिबल हिंदू नेता कांग्रेस में बचे थे जिसने त्यागपत्र दे दिया। अब इसके बाद जब वो मिया मुस्लिम की बात करते हैं या किसी कांग्रेस के नेता को लेकर के आने की बात करते हैं। वो डेमोग्राफिक चेंज की बात करते हैं। वो जो मियां मुस्लिम्स को वापस भेजने की बात करते हैं। वो डिपोर्टेशन की बात करते हैं। और वो किस तरह से प्रदेश जिले के अधिकारी जिले के जो अफसर हैं उनको अधिकार देते हैं कि और उस पर सुप्रीम कोर्ट की सहमति के बाद कि इस तरह के जो काम है उसको वो करते हुए दिखते हैं। तो कुल मिलाकर के यह पूरी पूरा का पूरा जो काम कर रहे हैं उसमें केंद्रीय नेतृत्व की सहमति दिखती है। इसलिए कि केंद्रीय नेतृत्व पश्चिम बंगाल में एनआरसी लाने की बात करता है। अभी एसआईआर को लेकर के हालांकि विवाद नहीं थमा है। लगातार चल रहा है कोर्ट में और बाकी सारी चीजें लेकिन अमित शाह से लेकर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष रूप से अमित शाह यह कहते हैं कि अगर उनकी सरकार पश्चिम बंगाल में बनती है तो वहां पर वो एनआरसी लेकर के आएंगे। तो ये सारी चीजें एनआरसी को लेकर के आसाम में कुछ दिक्कतें हैं। उसमें जिस तरह से हिंदुओं का नाम आ गया था वो उस तरह की चीजों को लेकर के थोड़ी उलझने हैं। लेकिन जिस तरह से जो डेमोग्राफी को लेकर के और बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर के रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर के विशेष रूप से जब वो अपना अड्डा बना करके रखे हुए हैं। जंगल सरकारी जमीन पर कब्जा करके रखे हुए हैं। तो ये सारे मुद्दे हेमंत विश्व शर्मा बिना केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से नहीं कर रहे हैं और ये ऐसा लग ऐसा लगता है कि वो इस मामले में उनको केंद्रीय नेतृत्व की सहमति मिली हुई है।
