Up गंगा को लेकर अखिलेश की ये बरूखी कहीं भारी ना पड़ जाए

उत्तर प्रदेश में चुनाव 2027 में है लेकिन चुनाव के लिए बयानबाजी शुरू हो गई है और विवाद तो कभी नहीं रुकते हैं। कम से कम समाजवादी पार्टी के लोग उनके प्रवक्ता उनके नेता अगर कोई बात मुस्लिम अपीजमेंट की है तो उसमें हिंदुओं का सेंटीमेंट अगर हर्ट होता है आहत होता है तो उसमें गुरेज नहीं करते हैं। लेटेस्ट जो है वो है जब 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी जो लोग इफ्तार पार्टी कर रहे थे गंगा के बीच में और उन पर यह आरोप था कि उन्होंने बिरयानी खा के हड्डियां जो है वो गंगा में फेंकी। तो इसको लेकर के उनके खिलाफ शिकायत हुई और उनकी गिरफ्तारी हुई। अब यह बहुत शर्मनाक बात है। गंगा को हिंदू मां मानते हैं, पवित्र मानते हैं, स्नान करते हैं, उसमें हड्डियां फेंकना यह निश्चित तौर पर जानबूझकर के किया गया एक षड्यंत्र है और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का तरीका है जो हमेशा से वो करते रहे हैं। अब इस बात को लेकर के जो समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं अखिलेश उनका जो बयान था वो भी बहुत दुखद शर्मनाक था कि हुआ तो हुआ जैसा ही था कि क्या हुआ अगर वहां पर हड्डी फेंकी गई। लेकिन उससे ज्यादा शर्मनाक बात जो है वो आईपी सिंह जो समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता हैं उन्होंने कहा कि गंगा में शौच वाला सीवर बहता है। लाशें डाली जाती है। मरे जानवर बहते हैं। उसकी परवाह नहीं की है। कुछ लोगों ने रोजा इफ्तार कर लिया तो इसके लिए बवाल हो गया। यह सब गैर कानानूनी है। अगर जिन अगर कोई लाश फेंकी जाती है वह मरे जानवर फेंके जाते हैं तो कोई डूब के मर गया ना उससे वो अलग बात है। लेकिन अगर कोई इसको डेलीबेट करता है तो यह अपराध है। तो क्या समाजवादी पार्टी इस तरह के सभी अपराधियों को समर्थन कर रही है? ये बहुत महत्वपूर्ण बात है। लेकिन एपीजमेंट पॉलिटिक्स जो है वो इतनी ज्यादा पहुंच गई है कि लोग मानने के लिए तैयार होते हैं।

 

West Bengal ——दीदी क्यों घबरा गई इन तबादलों से

पश्चिम बंगाल में अभी जो एसआईआर की प्रक्रिया है वह चल रही है। चुनाव घोषित हो गए हैं। लेकिन चुनाव घोषित होने के बाद जिस तरह से चुनाव आयोग ने आईएएस चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी एडिशनल सेक्रेटरी होम कोलकाता पुलिस कमिश्नर और उसके बाद करीब 19 ऑफिसर की एक सूची आई और लगभग 50 अधिकारी और बदले गए। अब ये पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा हो रहा है। जब मामला अदालत में था एसआईआर को लेकर तब बहुत सारी जानकारी चुनाव आयोग ने मांगने की कोशिश की तो जो चीफ सेक्रेटरी हैं वो अभी हाल फिलहाल ये अपॉइंट हुई थी। उन्होंने उपलब्ध नहीं कराया। फिर अदालत के कारण कई बार उनको फटकार लगी तब उन्होंने चीजें उपलब्ध कराया। ऐसे ही बहुत सारे अधिकारी थे जो सहयोग नहीं करते थे। केंद्र सरकार को भी सहयोग नहीं करते थे। उनका रवैया बहुत दुखद बहुत जिसको बोलते हैं सहयोग वाला नहीं था। जबकि बहुत सारे मामले ऐसे होते हैं जो पॉलिटिकल मामले नहीं होते हैं। फिर भी सहयोग की जरूरत होती है। अपेक्षित होता है नहीं किया गया। अब वैसा ही हाल है। लेकिन चुनाव के समय इन अधिकारियों का अपने पद पर बने रहना निश्चित तौर पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करत और जब तृणमूल कांग्रेस के बारे में यह बोला जाता है कि वो अपने चुनाव में साम दंड भेद सब तरह का इस्तेमाल करती है और प्रशासन को जिस तरह से इस्तेमाल करती है सबको मालूम है। सीबीआई को पीटा, ईडी को धमकाया। उसके बाद गिरफ्तारियां नहीं की। इसी के मद्देनजर पूरी तरह से पश्चिम बंगाल में प्रशासन जो है उसमें बदलाव किया गया है और ये इस हिदायत के साथ कि जिन लोगों को हटाया जा रहा है उनके पदों से और वर्तमान पदों से उनको चुनावी ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा। ये इंस्ट्रक्शन है। अब निश्चित तौर पर जो चुनाव है उसको सरकार फ्री एंड फेयर करने की कोशिश कर रही है। वहां पर सेंट्रल फर्सेस पहले से ही आ रही हैं। और इस बार कहा यह जा रहा है कि इस बार पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा सेंट्रल फोर्सेस को तैनात किया जाएगा। बूथ पर बूथ दर बूथ मॉनिटरिंग की जाएगी। जिससे कोई जो बूथ कैप्चरिंग या बूथ पर हिंसा या या बूथ पर लोगों को आने ना देना ये जो सारी जो कवायद या जो सारी चीजें तृणमूल कांग्रेस इस्तेमाल करती है उसको रोका जा सके तो वो कर रही है।

Tamilnadu —चुनाव जीतने के लिए अब भाषा की राजनीति शुरू

तमिलनाडु के भी चुनाव घोषित हुए हैं। तीसरी बार डीएमके का जो अलायंस है वो सत्ता के लिए लड़ाई करेगा। वहां कांग्रेस और डीएमके अलायंस में है। एआईएडीएम के बीजेपी पर के साथ अलायंस में है। और विजय की पार्टी जोहै वो अभी तक किसी के साथ अलायंस में नहीं गई है। और कल उन्होंने इस तरह की घोषणा की
जो उसके अध्यक्ष हैं फिल्म स्टार विजय कि वो किसी के साथ नहीं जाएंगे और अकेले चुनाव लड़ सकते हैं। तो अगर ऐसी स्थिति होती है तो एक ट्रायंगुलर फाइट होने की वहां पर उम्मीद है। लेकिन इस बीच जो सेंटीमेंटल इशू है तमिलनाडु वाला या एंटी हिंदी वाला उसको वहां पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया
है कि हिंदी थोपा जा रहा है तमिलनाडु में और इसको लेकर के वहां ना केवल विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया बल्कि उस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति की मौत भी हो गई। अब ये जो सेंटीमेंट है ये दो प्रदेशों में बहुत ज्यादा डोमिनेट करता है। एक पश्चिम बंगाल और दूसरा तमिलनाडु। पश्चिम बंगाल में भी नॉर्थ के प्रति और नॉर्थ इंडियंस के प्रति या जिसको आप कह लीजिए कि हिंदी स्पीकिंग लोगों के प्रति एक तरह की एक तरह का घृणाभाव राजनीतिक हलकों में पैदा किया गया है और वो अब थोड़ा-थोड़ा गुजराती के लिए भी होने लगा है। लेकिन एक जो प्रो बांग्ला सेंटीमेंट है वो बहुत मजबूती से काम करता है। वैसा ही तमिलनाडु की भी स्थिति है। तमिलनाड में भी तमिल भाषा को लेकर के बात होती है। हालांकि उस बात को लेकर के उनके जो प्रवक्ता हैं वो कई कई बार रिडिक्यूल किए जाते हैं। इसलिए कि जिस पॉलिटिकल लीडर को वो अपना नेता मानते हैं रामास्वामी नायकर को उसने खुद कहा था तमिल जो भाषा जो है वो अनपढ़ों की भाषा है और इस तरह की बात वो करते रहे जिसको लेकर के जब उनसे प्रश्न किया जाता है तो वो निरुत्तर हो जाते हैं। तो यह एक बार फिर चुनाव से पहले यह एक सेंटीमेंट उभारने उकेरने की कोशिश की गई है। देखते हैं कि इसका चुनाव में क्या असर दिखता है। किस तरह से यह पैन आउट करता है।

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