केरल में BJP के बढ़ते कदम कहीं कांग्रेस को फायदा ना मिल जाए

केरल में जल्द चुनाव होने हैं और बीजेपी की पूरी कोशिश है कि यहां कुछेक सीटों पर तो कमल खिल जाए, इसके लिए pm मोदी भी पूरी कोशिशों में लगे हैं , वैसे इस बार केरल में जो माहौल बन रहा है उससे लगने लगा है कि इसबार यहां का चुनाव रिजल्ट कुछ अलग हो सकता है, जी हां इसके पीछे बड़ा कारण है यहां के वोट बैंक पर BJP का direct नहीं पर indirect प्रभाव दिखाई देना। बीजेपी का यहां वोट शेयर जिस तरह से बढ़ने लगा है और त्रिशूर लोकसभा सीट पर जीत के साथ साथ तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सफलता ने इस नैरेटिव को और भी ज्यादा मजबूत कर दिया है कि केरल की राजनीती में BJP को अब Ignore नहीं किया जा सकता है। उससे यहां के विपक्षी दलों की रणनीति जरूर प्रभावित होने वाली है ,केरल की राजनीति लंबे समय से LDF और UDF इन दो अलायंस के बीच ही घूम रही है। पहले हर 5 साल में सत्ता बदल जाती थी, लेकिन 2021 में पहली बार यह परंपरा टूटी और LDF ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस का गठबंधन UDF के साथ है और चर्चा यही चल रही है कि बीजेपी की यहां पर बढ़ती पैठ से कांग्रेस-UDF और सीपीएम यानी IDF के बीच बड़ा मुद्दा यही बन रहा है कि कौन BJP के खिलाफ ज्यादा मजबूती से खड़ा हो सकता है और उस तरफ जाने वाले वोट काट सकता है और यही बात यहां के ज्यादातर मुस्लिम मतदाता देखेंगे कि किसे रोकना है और कौन रोक सकता है। ऐसे में माना सकते हैं कि अगर यहां के लोग सरकार बदलना चाहते हैं तो कांग्रेस समर्थित गठबंधन की और रूख करेंगे और बीजेपी की यहां बढ़ती पैठ कांग्रेस को लाभ दिला सकती है। आपको बता दें कि कि केरल लगभग करीब 27 फीसदी मुस्लिम वोटर्स हैं और ज्यादातर उम्मीदवार की जीत हार का फैसला यही करते हैं।
निशिकांत दुबे ने खोले इस कद्दावर नेता के छुपे कईं रहस्य

बीजेपी नेता निशिकांत दुबे बहुत अच्छे प्रवक्ता माने जाते हैं और संसद में वो जिस तरह की जानकारियां लेकर पहुंचते हैं वो हैरान करने वाली होती हैं और इसी कारण बहुत ज्यादा वायरल हो जाती हैं, हाल ही में उन्होंने उड़ीसा के भूतपूर्व कद्दावर नेता बीजू पटनायक के बारे में वो खुलासा किया जो काफी हैरान करने वाला था , सभी को पता है बीजू पटनायक ने उड़ीसा में सालों साल राज किया है और वे जनता के बहुत लोकप्रिय नेता थे पर क्या उन्होंने कभी देश के खिलाफ काम किया था, यह एक बड़ा प्रश्न है जो चर्चा में है, दरअसल हाल ही में बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने अपने एक बयान में कहा कि 1960 में चीन के खिलाफ युद्ध के दौरान बीजू पटनायक पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के बीच की कड़ी थे। यही नहीं दुबे ने अडीसा के भूतपूर्व कद्दावर नेता बीजू पटनायक पर यह तक आरोप लगा दिए कि 1963 -64 में इसी बातचीत के आधार पर भारत ने अमेरिका के कहने पर नंदा देवी में एक न्यूक्लियर डिवाइस लगाया था, जिसका अभी तक कोई पता नहीं, बस निशिकांत दुबे के इसी बयान पर उड़ीसा के सांसद
सस्मित पात्रा बुरी तरह भड़क गए और इस बयान को अपमानजनक, झूठा बताते हुए इसके विरोध में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति से इस्तीफा भी दे दिया।आपको बता दें कि निशिकांत दुबे इस समिति के प्रमुख हैं। उन्होंने दुबे पर पलटवार करते हुए यह भी कहा कि दुबे इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश कर रहे हैं और एक सम्मानित , कद्दावर नेता और उसकी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे दुबे भी कम नहीं हैं उन्होंने नेहरू जी के वो दो पत्र सार्वजनिक कर दिए जिसमें नेहरू जी उस समय के अमेरिकी राजदूत से काम करने के लिए कह रहे हैं। नेहरू ने कहा था कि सरकार ने पटनायक को महत्वपूर्ण काम के लिए अमेरिका भेजा है और वे रक्षा मामलों पर बात कर रहे हैं। लेकिन जब मामला बहुत ज्यादा बिगड़ गया तो दुबे थोड़ा back foot पर आ गए और कह दिया कि मैंने बीजू बाबू पर कोई आरोप नहीं लगाया मैं तो नेहरू परिवार की करतूतों के बारे में बोल रहा था, उन्होंने कहा कि वो खुद ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक का बड़ा सम्मान करते हैं।
Bihar मुख्यमंत्री के लिए बन रही 4 थ्योरी किस पर लगेगी नीतीश कुमार की मोहर
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफा के बाद बिहार की राजनीती में बहुत हलचल मची हुई है, बीजेपी खेमें में कुछ ज्यादा सरगर्मियां चल रही हैं क्योंकि नीतीश की टक्कर का कोई CM फेस लाना कोई छोटी बात नहीं है, जनता के Sentiment का ख्याल रखने के साथ NDA में कोई बगावत ना हो इस बात का पूरा ध्यान रखना पड़ रहा है और बीजेपी आलाकमान मुख्यमंत्री चुनाव के लिए एक नहीं दो नहीं बल्कि चार -चार थ्योरी पर विचार कर रहे हैं। सबसे पहले नीतीश के जाने के बाद उनके वोट बैंक को कैंपचर करने के लिए मुख्यमंत्री लव-कुश से हो सकता है। वर्तमान में सबसे ज्यादा चर्चा उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम की है, बीजेपी की दूसरी थ्योरी अति पिछड़ा समुदाय को CM FACE बनाने की भी चल रही है, क्योंकि बीजेपी का ध्यान बिहार के लगभग 35 फीसदी अति पिछड़ा वोट बैंक पर है। इसके तहत विधायक संजीव चौरसिया का नाम चर्चा में है, दूसरा नाम एमएलसी डॉ. राजेंद्र गुप्ता का भी चल रह है, तीसरी थ्योरी दलित को लेकर भी है, अभी तक बीजेपी शासित राज्यों में एक भी दलित मुख्यमंत्री देश भर में नहीं है। इसमें जनक राम, गुरु प्रकाश, मुरारी पासवान के नाम चल रहे हैं। वहीं सवर्ण वोट को खोने और कांग्रेस के सेंधमारी के डर से बीजेपी का अगला मुख्यमंत्री सवर्ण भी हो सकता है और इसमें विजय कुमार सिन्हा के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा चल रही है।
वैसे देखा ये भी जाएगा कि इन थ्योरियों पर नीतीश कुमार की सहमति बनती है या नहीं।

