तेजस्वी यादव बोलने अचानक क्यों बोलने लगे इंग्लिश और बिहार लगने लगा पिछड़ा
बिहार के कद्दावर नेता तेजस्वी यादव केरल पहुंचे तो उनमें अचानक ही दो बदलाव आ गए, जी हां एक तऱफ वो अंग्रेजी में बतियाने लगे और दूसरी तरफ उन्हें केरल पहुंचकर बिहार , देश का सबसे गरीब राज्य लगने लगा है, खैर उनके बदले हुए अवतार और उनके बयानों पर जबदरस्त सियासत शुरू हो गई है और बीजेपी और JDU के नेता उनपर जमकर हमले बोल रहे हैं, अब आपको लग रहा होगा कि धाराप्रवाह हिंदी बोलने वाले तेजस्वी को क्या हुआ जो अंग्रेजी बोलनी शुरू कर दी तो आपको बता दें कि तेजस्वी केरल में पहुंचकर न केवल अपनी पार्टी के तीन उम्मीदवारों के लिए वोट मांग रहे हैं, बल्कि वामपंथी मोर्चे (LDF) के पक्ष में अंग्रेजी में जोरदार भाषण भी दे रहे। हैं जिससे बीजेपी तो क्या कांग्रेस भी चौंकी हुई है, क्योंकि बिहार में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने वाली RJD केरल में प्रियंका गांधी के खिलाफ एलडीएफ प्रत्याशियों के लिए अपना पसीना बहा रहे हैं। विशेष रूप से वायनाड की कालपेट्टा सीट पर rjd उम्मीदवार पीके अनिल का मुकाबला कांग्रेस के मौजूदा विधायक टी सिद्दीकी से है।अब जाहिर सी बात है तेजस्वी चाहने वाले उनके अंग्रेजी अवतार को आत्मविश्वास का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं प्रशांत किशोर जैसे आलोचक जो अक्सर तेजस्वी यादव को नौवीं फेल बताकर उनपर तंज कसते रहते हैं, वो भी तेजस्वी की अंग्रेसी सुनकर थोडे हैरान ही हैं। पर दूसरी तरफ बिहार को देश का सबसे गरीब राज्य बताकर तेजस्वी फंस गए हैं औप उनके चाहने वाले लोग भी उनका इस बात पर समर्थन करते नजर नहीं आ रहे हैं। JDU ने तो पलटवार करते हुए कह भी दिया कि बिहार के 14 करोड़ लोगों का अपमान RJD को जल्द मिल जाएगा। JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने तो सीधे कह भी दिया कि तेजस्वी को बिहार को गरीब कहने से पहले अपने माता-पिता यानी लालू-राबड़ी के शासनकाल को देखना चाहिए, जिन्होंने बिहार का पूरा खजाना लूट लिया था।
मनोज तिवारी ने किसके लिए कहा यूज एंड थ्रो ठीक नहीं

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने हाल ही में इशारों ही इशारों में बीजेपी आलाकमान को जता दिया कि बिहारी नेता पवन सिंह को पार्टी ने वो सम्मान नहीं दिया जिसके वो हकदार हैं, जी हां बिहार के मुख्यमंत्री के नाम के सवाल पर उन्होंने बातों बात में कह दिया कि बहुत जल्द पवन सिंह को उचित सम्मान दिया जाएगा। मनोज तिवारी ने खुलकर पवन सिंह का साथ देते हुए कहा कि यूज एंड थ्रो की पालिसी ठीक नहीं है। बात करने वाले ठीक नहीं कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर इस बात को तूल देने पर भी हमला बोला और कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं इसलिए वो हमारी छोटी- छोटी बातों को बड़ा बनाकर उसे पेश करती है। उन्होंने कहा कि पवन सिंह केवल एक स्टार नहीं बल्कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं, उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। वहीं परिवारवाद पर उन्होंने नीतीश कुमार का साथ देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति अपने पद का प्रयोग करके परिवार के सदस्यों, यथा- पत्नी, बेटी और बेटे को सत्ता में स्थापित करता है, तो उसे परिवारवाद कहा जाता है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के मामले में ऐसा नहीं है।
गुजरात BJP को क्यों लग रहे झटके पर झटके

सालों साल गुजरात में राज करने वाली बीजेपी को पिछले कुछ समय से यहां झटके पर झटके लग रहे हैं और बीजेपी आलाकमान को समझ में नहीं आ रहा कि यहां नेताओं का बीजेपी से क्यों मोह भंग हो रहा है, जी हां अभी कुछ समय पहले ही जब राहुल गांधी ने वडोदरा का दौरा किया था तो उस दौरान बीजेपी से जीते दो पार्षद अशीष जोशी और पारूल पटेल , कांग्रेस में शामिल हो गए थे। और इसी मौके पर ही गुजरात में छह बार के विधायक मधु श्रीवास्तव की बेटी दीपा और कुछ अन्य नेताओं ने भी एकसाथ कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। बाद में मधु श्रीवास्तव की दूसरी बेटी भी कांग्रेस में शामिल हो गई थी। और अब जब गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों का ऐलान हुआ तो बीजेपी को फिर एक बड़ा झटका लगा जब,विश्व हिंदू परिषद के वडोदरा जिला अध्यक्ष राजेंद्रभाई बारोट कांग्रेस में शामिल हुए। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए यह भी कह दिया कि कांग्रेस में तानाशाही नहीं, बल्कि लोकतंत्र है, इसलिए उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। अब जाहिर सी बात है कि जब विश्व हिंदू परिषद के नेता कांग्रेस में शामिल होंगे तो बीजेपी में तो जबरदसस्त हडकंप मचेगा, क्योंकि हमेशा ही हिंदू संगठनों में काम करने वाले पदाधिकारियों को बीजेपी की विचारधारा का Follower माना जाता है, लेकिन राजेंद्रभाई बारोट के कांग्रेस में शामिल होने से एक तरफ बीजेपी चितिंत है और दूसरी तरफ गुजरात में अपनी पैठ मजबूत करती काग्रेस में खुशी का माहौल है।
