अतीक अहमद का बचाव अखिलेश यादव की मजबूरी

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अतीक अहमद को डिफेंड कर रही है। जब से अतीक अहमद के बारे में धुरंधर में दिखाया गया है। धुरंधर में बिल्कुल मिलता-जुलता नाम है और मिलता-जुलता चेहरा है। गतिविधि भी उसी तरह की है और जो जिस तरह की घटना उनके साथ हुई थी उस तरह की घटना दिखाई गई है। इसलिए लगातार प्रश्न किए जा रहे हैं और उसको डिफेंड करती हुई समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में दिख रही है। यहां तक कि जो इमरान प्रतापगढ़ी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं उन्होंने भी डिफेंड किया है।
अब अतीक अहमद को समाजवादी पार्टी के डिफेंड करने का जो कारण है वह निश्चित तौर पर समझ में आता है मुस्लिम मतदाताओं को लेकर के। लेकिन मुस्लिम मतदाताओं के लिए अतीक अहमद को डिफेंड करना एक बात है और दूसरा क्या- अतीक अहमद जो जिनके ऊपर आरोप लगे हैं उनका पाकिस्तान के आईएसआई से संबंध आतंकवादी संगठनों से संबंध वो भी इसके साथ-साथ समाजवादी पार्टी समर्थन करती हुई नजर आ रही है, जो चार्जशीट अतीक के खिलाफ दायर हुई है जो बातें हुई है उनमेंउनका संबंध सीधे तौर पर आईएसआई आर्म डील फॉरेन जो फेक करेंसी है उन सब में जोड़ा गया है और इस बात को उत्तर प्रदेश में काम किए बहुत सारे पुराने पुलिस अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं और बताते हैं कि सीधे तौर पर अतीक का इनवॉल्वमेंट इस तरह की गतिविधियों में रहा है और उनकी संलिप्तता के कारण ही को समर्थन अपने कम्युनिटी से मिलता रहा है। इसके अलावा वो समाजवादी पार्टी के बड़े फंडर्स का भी उन पर आरोप लगता है कि समाजवादी पार्टी पर आरोप लगता है कि वो एक बड़े फंडर थे। इसलिए भी उनकी सारी गलतियों को समाजवादी पार्टी माफ़ करती रही है। और अब
उनको डिफेंड करना मजबूरी हो गई है।

कांग्रेस का नक्सलवाद को खुला समर्थन, इंदिरा गांधी ने भी साध रखी थी चुप्पी

इस बात को लेकर के बहुत सारी बातें कही जाती हैं। बहुत सारी बातें हो रही हैं, जिस तरह से गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे मामले में कांग्रेस को घसीटा और कांग्रेस के समर्थन में या कांग्रेस के कहने पर जो लोग इस तरह की चीजों को समर्थन करते रहे उनका नाम लेकर के भी बात कहिए। लेकिन पॉलिसी के तौर पर कांग्रेस जो है वह लगातार लेफ्ट का समर्थन लेती रही है और वो चाहे आर्थिक मामला रहा हो चाहे शिक्षा का मामला रहा हो या और इस तरह का मामला रहा हो शिक्षा के नाम पर जिस तरह से लेफ्ट से जुड़े हुए लोगों को बढ़ाया गया उसने पूरा का पूरा जो करिकुलम है उसको इंपैक्ट लोगों को लोगों की सोच को प्रभावित किया। यह सारी चीजें हुई है और वही बताने की कोशिश की गई कि जो अर्बन नक्सल हैं या जो नक्सल्स हैं उनको कवर फायर इसी तरह के लोग देते हैं जो इस तरह की आईडियोलॉजी के साथ खड़े हैं। अब उसमें बहुत सारे बड़े-बड़े लोगों का नाम लिया गए हैं। नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि इनकी भूमिकाएं किस तरह से रही हैं और कांग्रेस की भूमिका या कांग्रेस की योजनाओं की बात करें तो जो लेफ्ट का इन्फ्लुएंस था चाहे वो बैंक के राष्ट्रीयकरण की बात हो चाहे जो को भंडार के राष्ट्रीयकरण की बात हो चाहे इंश्योरेंस के राष्ट्रीयकरण की बात हो, ये सारा काम लेफ्ट के दबाव में हुआ। शिक्षा की बात मैंने पहले ही की कि शिक्षा में किस तरह से जो लेफ्ट आईडियोलॉजी के लोग थे उन्होंने कब्जा किया और उसी का नतीजा ये हुआ कि ये जो लेफ्ट का एक्सट्रीमिज्म है वो बढ़ा और जो नक्सलवाद नक्सलबाड़ी में पहली बार नक्सल हिंसा का काम शुरू मतलब आतंक शुरू हुआ था, उस पर इंदिरा गांधी ने लीनियंसी दिखाई चुप्पी साध के रखी और बाद में भी यह लगातार उसी तरह के एटीट्यूड के साथ रही जिसका जिसके कारण यह नक्सलवाद ने विकराल रूप लिया और उसका शिकार उनके अपने खुद के बहुत सारे नेता हुए विद्याचरण शुक्ला समेत बहुत सारे लोगों को एक साथ मार दिया गया।

 

रामनवमी का सेलिब्रेशन पश्चिम बंगाल में हवा बदलने वाली

हिंदुत्व और घुसपैठिए , पश्चिम बंगाल में बड़ा मुद्दा बनते जा रहे हैं। जो घुसपैठिया वाला मुद्दा था वो लंबे समय से प्रधानमंत्री से लेकर के गृह मंत्री गृह मंत्री समेत वहां के जो नेता हैं शुभेंदु अधिकारी दिलीप घोष उसके अलावा जो बाकी और नेता हैं वो सब बात कर रहे थे घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल से भगाया जाना चाहिए। देश से भगाया जाना चाहिए। लेकिन वहां पर एक और बात होती थी कि हिंदुत्व की तो उस पर जो पश्चिम बंगाल के की रूलिंग पार्टी है तृणमूल कांग्रेस वहां के जो उस पार्टी के जो नेता हैं उनके प्रवक्ता हैं वो लगातार ये कहते रहे हैं कि जो काऊ बेल्ट का मतलब इसको थोड़ा डेरोगेटरी बोलते थे कि काऊ बेल्ट का हिंदु हिंदुत्व है और जो जय जय श्री राम के नारे या राम की की बात करने वाले लोग वो पश्चिम बंगाल में नहीं चलता है। लेकिन अभी जो रामनवमी पर जिस तरह से पूरे पश्चिम बंगाल में जुलूस निकले लोग सड़कों पर आए और रामनवमी को जिस तरह से सेलिब्रेट किया उसके बाद ऐसा लगा कि पश्चिम बंगाल में हवा बदलने वाली है और ये मैसेज जो है वो ममता बनर्जी को दिया गया।

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