BJP का सिखों नेताओं को लुभाने के पीछे मकसद है पंजाब पर जीत
भारतीय जनता पार्टी जिस तरह से सिख नेताओं को एक के बाद एक ना केवल अपनी पार्टी में लेकर के आ रही है बल्कि उनको जिम्मेदारियां सौंप रही है। उससे लगता है कि वह पंजाव में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में लग गई है। हालांकि यह प्रक्रिया पहले से चल रही है लेकिन जैसेजैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं , वो इंटेंसिफाई हो रहा है, अब जैसे ही भारतीय जनता पार्टी ने एच एस फुल्का को अपनी प्राथमिक सदस्यता दिलाई तब से ये बातें चर्चा में भी आने लगी है।इससे पहले मनजिंदर सिंह सिरसा को पार्टी में ले आया गया था, उसके पहले हरदीप पुरी को मंत्रालय दिया गया था। अब 2027 में विधानसभा के चुनाव हैं तो उसके बाद एक के बाद एक कुछ इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं जो महत्वपूर्ण है। अब उसमें सबसे महत्वपूर्ण बात है कि एच एस फुल्का का भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना वह महत्वपूर्ण इसलिए है कि वह लगातार जो 84 के सिख दंगों में मारे गए लोग हैं उनकी लड़ाई लड़ते रहे हैं। उनकी बात करते रहे हैं। उन्होंने पहले आप पार्टी ज्वाइन किया था। आप पार्टी से 2014 का चुनाव लड़ा था। चुनाव में उनको कांग्रेस के रवनीत सिंह बिटू ने हराया था। उसके बाद फिर उन्होंने 2017 में विधानसभा का चुनाव लड़ा। विधानसभा के चुनाव में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के मनप्रीत सिंह आयली को हराया और विधानसभा में गए। लेकिन 2019 में ही उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से और आम आदमी पार्टी से मुक्ति ले ली। उसके बाद 2019 में उनको पद्मश्री भी अभी की मोदी सरकार ने दिया। लेकिन इन सब से ज्यादा महत्वपूर्ण ये बात है कि उन्होंने सिखों का नरसंहार, उसकी लड़ाई में वो लगातार लड़ते रहे हैं और उस लड़ाई के कारण ही उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी। अब जब उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की है तो उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से अटल बिहारी वाजपेई ने एक सूची जारी की थी जिसमें लगभग 27-2800 लोग थे और वो सारे दंगे में मार गए थे और उन दंगों में कांग्रेस के कमलनाथ , सज्जन कुमार जो अभी जेल में हैं , जगदीश टाइटलर एच के एल भगत इन सारे नेताओं का हाथ था। मामला अभी भी बहुत सारा अदालत में है। लेकिन इन सब के अलावा जो भारतीय जनता पार्टी करती हुई दिख रही है वो ये है कि तरणजीत सिंह संधू जिनको दिल्ली का एक महीने पहले ही एलजी बनाया गया था इसका प्रभाव भी पंजाब में नजर आएगा। अब यही तरणजीत सिंह संधू जो हैं वो पिछले चुनाव से पहले ही बीजेपी ज्वाइन किए थे और लोकसभा चुनाव 2024 का उन्होंने अमृतसर से लड़ा। हालांकि वो चुनाव हार गए। वैसे ही रणवीर सिंह बिटू लड़े पर चुनाव वो हार गए। बावजूद इसके उनको भाजपा ने राज्यसभा भेजा और मंत्री बनाया। लेकिन इस बीच जो बुरी बात हुई वो ये कि राहुल गांधी ने उनको ट्रेटर कहा। तो ये एक जो सिख सेंटीमेंट है वो जो है कांग्रेस के खिलाफ है और भारतीय जनता पार्टी सिखों को साथ लेकर के चल रही है। अब 2027 के चुनाव से पहले क्या शिरोमणि अकाली दल के साथ वो चुनाव लड़ेंगे कि क्या होगा यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन एक और बड़े नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह उनकी पार्टी जो है वो भाजपा में मर्ज हो गई है और ये एक कॉम्बिनेशन इस तरह का बन रहा है जहां भाजपा जो है एक बड़ी रणनीति के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
ममता के राज में Supreme Court के आदेशों पर भी हमला

पश्चिम बंगाल, मालदा में जुडिशियल अधिकारियों का घेराव करके और उनकी गाड़ियों पर तोड़फोड़ हुई उस पर जो सुप्रीम कोर्ट है में नाराजगी दर्ज की है और बताया है कि किस तरह से जुडिशियल अधिकारी जो मालदा में हैं , उनकी जान खतरे में पड़ गई थी और सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए उनको ये कहिए धिक्कारते हुए बोला कि पूरा का पूरा जो घेराव मालदा में हुआ है वो योजनाबद्ध था कैलकुलेटेड था और उसके पीछे एक योजना थी वो मोटिवेटेड था एक योजना के तहत काम किया गया है और यह भी कहा सुप्रीम कोर्ट ने कि यह सुप्रीम कोर्ट की अथॉरिटी को चैलेंज करने की कोशिश की गई। हालांकि यह चीज ममता बनर्जी की सरकार लगातार करती रही। सुप्रीम कोर्ट की अथॉरिटी को ना केवल चैलेंज करती रही है। बहुत बार सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को मानने के लिए मना इंकार करती रही है। लेकिन यह जो एसआईआर को लेकर के जुडिशियल ऑफिशियल बनाए गए हैं, नियुक्त किए गए हैं। यह सुप्रीम कोर्र्ट मैंडेटेड था। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा किया है लेकिन ममता बनर्जी हमेशा सड़क पर केस का फैसला करके चुनाव जीतने की कोशिश करती हैं। प्रीपोल हिंसा करती रही हैं। इस तरह से चुनाव जीती रही। लेकिन वो जो संवैधानिक संस्थाएं हैं उनका भी माखौल उड़ाती है। चाहे चुनाव आयोग हो, मुख्य चुनाव आयुक्त हो, सुप्रीम कोर्ट हो, पार्लियामेंट हो, उसके अलावा जो राज्यसभा के चेयरमैन हो, लोकसभा के स्पीकर हों। ये पूरा का पूरा एक डिज़ाइन है , जिसके तहत ममता काम करती नजर आती हैं।
