वास्तु का अहम रोल Visiting Card बनवाने में भी — अच्छा कार्ड मतलब अच्छी सफलता
हम वास्तु को अपने विजिटिंग कार्ड पर भी कर सकते हैं। वास्तु के हिसाब से यदि आप अपना विजिटिंग कार्ड बनाएं तो आपको जीवन में और सफलता मिलेगी। वास्तु कार्ड की जो विजिटिंग कार्ड्स बनाने के नियम हैं उसमें एक तो कलर का ध्यान रखना पड़ता है। सबसे पहले जो सेंटर होता है, भ्रम स्थान होता है। कोशिश करें कि भ्रम स्थान में अपना नाम या कंपनी का नाम रखें और भ्रम स्थान से नीचे रख लिखेंगे थोड़ा तो वह ज्यादा अच्छा रहेगा। ज्यादातर ब्रह्म स्थान को बहुत ज्यादा भरा नहीं जाता है। बहुत शॉर्ट में आप अपना नाम लिख सकते हैं और उसका कलर कॉम्बिनेशन आपकी डेट ऑफ़ बर्थ के हिसाब से भी हो सकता है। जो डेट ऑफ़ बर्थ से आपका प्लनेट है उसके हिसाब से भी ले सकते हैं।
Visiting Card बनवाते समय दिशाओं और रंगों का ध्यान रखना जरूरी
हम डायरेक्शंस के हिसाब से भी लेते हैं। इसके अंदर पूरे विजिटिंग कार्ड पे हम वास्तु की सारी डायरेक्शंस निकाल लेते हैं। वास्तु की डायरेक्शंस नॉर्थवेस्ट, नॉर्थ, नॉर्थ ईस्ट ऊपर की तरफ़ मानी जाती है। ईस्ट और वेस्ट साइड में मानी जाती है। ईस्ट हमारा टुवर्ड्स राइट आएगा और वेस्ट टुवर्ड्स हमारा लेफ्ट आएगा। साउथ वेस्ट टुवर्ड्स लेफ्ट, साउथ सेंटर में होता है और आपका साउथ ईस्ट राइट साइड पे होगा। तो इसके अंदर जो हम कोशिश करते हैं कि एक तो इसका जो आकार है वो समकोण हो। जितने भी हमारे समकोण वाले विजिटिंग कार्ड्स होते हैं। वो अच्छे होते हैं। उनके रिजल्ट्स अच्छे मिलते हैं। समकोण वाले सारे ही देखेंगे कि आप आपको कार्ड अच्छे दिखेंगे।ट्रायंगल है, स्क्वायर है या फिर बहुत उसके अंदर कटे फिटे आपके आकार हैं या आपका बहुत डार्क कलर है। ये अच्छा नहीं माना जाता। अब ऊपर नॉर्थ डायरेक्शन को आपने कर दिया है। जैसे आपकी डायरेक्शन जो भी निकालते हैं अगर टुवर्ड्स नॉर्थ आपकी डायरेक्शन निकल रह है विज़िटिंग कार्ड में। वहां पर यदि आपने रेड कलर दे दिया और नीचे की तरफ आपने ब्लू कलर दे दिया कार्ड में लाइन ही भले दी हो तो भी आपको वो एंटी कलर डायरेक्शन के हिसाब से हो जाते हैं तो उसके कारण आपके बिजनेस में ग्रोथ में जॉब में है तो उसमें फर्क पड़ता है।
Card हमेशा Simple रखें, पूरे भरे नहीं होने चाहिए
कार्ड हमेशा छोटा सिंपल उसको पूरा भरने की जरूरत नहीं है और कार्ड के पीछे भी कभी भी डबल साइड से लिखना नहीं चाहिए। यदि किसी आकार का आड़ा टेढ़ा तिरछा ट्रायंगल वाले विजिटिंग कार्ड शौकिया एक नए डिज़ाइन
का बनाने की कोशिश करते हैं तो आप देखेंगे कि आपके बिज़नेस में टेंशनंस है, तनाव है। इस तरह की चीज़ होंगी ही होंगी। बिजनेस पार्टनर के साथ आपके तनाव अच्छे संबंध नहीं होंगे। यदि समकोण स्क्वायर है। समकोण
आपका बहुत अच्छा माना जाता है। विजिटिंग कार्ड विजिटिंग कार्ड में ये दिशाएं आपको इसी हिसाब से देखनी है। प्लस जो वेस्ट और नॉर्थ में हम यदि टेलीफोन नंबर लिखें टुवर्ड्स वेस्ट एंड नॉर्थ में अपना कांटेक्ट नंबर टेलीफोन नंबर लिखेंगे तो बहुत अच्छा निकलता है। जहां से भी आपको संपर्क वाले लोग करें संपर्क आपके नंबर पे तो वह आप वेस्ट और नॉर्थ में लिखें। कार्ड के मध्य में अपना नाम लेकिन बिल्कुल सेंटर में ना करके ऊपर या उसके थोड़ा सा नीचे कार्ड का सेंटर जो आप क्रॉस करके देखेंगे जैसे कि हम अपने घर में बोर्डिंग करते हैं तो एक्सेस पे नहीं करते हैं। इसी प्रकार से आपका नाम भी एक्सेस पे नहीं आना चाहिए। और यदि आपके जगह नहीं है वहां पे आपके लिखने की तो आप टुवर्ड्स वेस्ट या साउथवेस्ट में जो आपका कार्ड डिसाइड करेंगे आप वो आपको मिल सकता है।
Visiting Card आपका फेस है – जितना सरल और simple होगा उतना बेहतर
आपको पिक कार्ड की जिस तरह से सीधा रखते हैं तो कहां-कहां कैसी डायरेक्शन जाएंगी। विजिटिंग कार्ड आप या तो स्क्वायर बना सकते हैं, रेक्टेंगल बना सकते हैं या आप खड़े भी इस लंबाई में ज्यादा हो और चौड़ा में कम हो उसको भी बना सकते हैं। वह भी अच्छा माना जाता है विजिटिंग कार्ड और विजिटिंग कार्ड के कलर्स आपकी डेट ऑफ़ बर्थ के हिसाब से हो सकते हैं। आपके प्रोफेशन के हिसाब से हो सकते हैं। तो यह छोटी से जानकारी है कि विजिटिंग कार्ड्स भी का भी आप वास्तु यदि करते हैं जिसको भी आप देंगे आपका कार्ड इंप्रेस इंप्रेसिव होना चाहिए क्योंकि विजिटिंग कार्ड आपका फेस है। विजिटिंग कार्ड आपकी कंपनी का फेस हैजिसको देखते ही क्लाइंट आपको समझ जाएगा कि किस प्रकार का इंसान है। यदि एक मुड़ा टुड़ा हल्की क्वालिटी का खराब क्वालिटी का विजिटिंग कार्ड रखते हैं तो कभी भी किसी के ऊपर अच्छा इंप्रेशन नहीं पड़ता है। तो विजिटिंग कार्ड थोड़ा क्वालिटी वाला लेना चाहिए और वास्तु के हिसाब से उसको कि पूरा का पूरा ना भर दें।
