By Arati Jain
कुंडली में दूसरा घर अच्छा है तो समझ लीचिए घन की बरसात

कुंडली में ग्रहों के जो घर होते हैं, वो आपके भविष्य के बारे में काफी कुछ बता देते हैं, पहले घर के बारे में आपको बता चुके हैं आज बात कर रहे दूसरे घर के बारे में , दूसरे घर से आप क्या-क्या अपनी कुंडली में देख सकते हैं और कैसे पता कर सकते हैं कि दूसरे घर को अच्छा करने के लिए हम कैसे करें क्या करें और कैसे उसको हम अच्छा करें .दूसरा घर हमारा होता है धन का वाणी का कि आपका बोलने का ढंग कैसा है आपके दांत होते हैं जी हां दांत भी आपके दूसरे हाउस में ही आते हैं। दूसरे घर और साथ ही साथ आपके जो परिवार है, कुटुंब है, मतलब आपका जो पूरा परिवार है, चाचा, दादा, नाना आप किस कुटुंब में पैदा हुए हैं, वह भी हम दूसरे घर को ही मानते हैं। और साथ ही साथ जो आपको एक संस्कार मिले हैं पूर्व जन्म से वो भी दूसरे घर से ही देखे जाते हैं। तो अगर आपका दूसरा घर अच्छा है तो आपकी ये सब चीजें अच्छी हो जाएंगी। मतलब आप अच्छे कुटुंब में पैदा हुए हैं। आपके पास धन भी बहुत है। आपके पास वाड़े भी बहुत अच्छी है। आपके दांत भी बहुत खूबसूरत है। आपको कोई प्रॉब्लम भी नहीं है। और साथ ही साथ आपका चेहरा भी खूबसूरत है। हसमुख है। खूबसूरत ना होते हुए भी उसमें आकर्षण होगा।
बहुत ज्यादा मेहनत करने पर नहीं मिलता पैसा तो इस घर का असर

पर अगर दूसरा घर आपका खराब है। खराब का मतलब उसमें ग्रह अच्छे ना हो या उसके ऊपर दृष्टि अच्छी ना हो या उसमें कोई पा प्रभाव इतना ज्यादा हो जाए कि दूसरे घर का आपको शुभ प्रभाव नहीं मिल रहा। जैसे आपक आप बहुत ज्यादा मेहनत करते हैं। बहुत पैसा कमाने की कोशिश करते हैं। पर आप धन को नहीं कमा पाते। कमाना अलग चीज है। धन आपके पास इकट्ठा नहीं हो पाता क्योंकि दूसरा घर धन को इकट्ठा करने के लिए है।साथ ही साथ आपके दांत आप दांतों की बहुत केयर करते हैं। सब कुछ दांतों के लिए अच्छा करते हैं। पर तब भी आपके दांत अच्छे नहीं रह पाते। कुछ तो कुछ तो जन्मजात होते हैं कि आपके दांत अच्छे नहीं है। कुछ आपकी लापरवाही से भी खराब हो जाते हैं। और साथ ही साथ आपके पास संस्कार कैसे आए हैं पिछले जन्मों से। जी हां। क्योंकि आप घर में अगर तीन चार भाई बहन हैं सबके ही आदतें अलग होती हैं। सबका स्वभाव अलग होता है और सबके अंदर एक जो एक खाने-पीने की एक वो होती है ना इच्छा कि मेरे को यह पसंदहै, मेरे को वो पसंद है। वो सब भी अलग-अलग होता है। तो वो आप कैसे करेंगे? क्योंकि आपके दूसरा घर आपकी बहन का घर में दूसरा प्रभाव है और आपकी कुंडली में दूसरा प्रभाव है। तो उससे आपका जो खानपान है वो भी दूसरे घर से ही देखा जाएगा कि खानपान आपका कैसा है? आपको क्या पसंद है? क्या पसंद नहीं है? जैसे अब हम सबसे पहले धन को लेते हैं। जैसे आपके जीवन में धन का थोड़ा अभाव है और आपका दूसरा घर अच्छा नहीं है तो आपके जीवन में आप धन को कितना भी कोशिश करें उसको इकट्ठा नहीं कर पाते। तो आपको थोड़ा सा जतन-पतन करना पड़ेगा।
घन को छोटी छोटी जगह invest कीजिए
आप छोटे-छोटे अमाउंट में इन्वेस्टमेंट करिए। छोटी-छोटी अपनी आरडी बनाइए, एफडी बनाइए। जिससे कि आपको जबरदस्ती आपको अपने धन को रोकना पड़ेगा क्योंकि धन को रोकने के लिए आपको थोड़ी सी मेहनत करनी पड़ेगी और उसके लिए सबसे बड़ा अच्छा उपाय है कि आप अपने दांतों की केयर करिए। जी हां, दांत अगर आप केयर करते हैं, उनकी साफ सफाई रखते हैं, उनको अच्छी तरह से रखते हैं, तो आपको धन कमाने में, धन को इकट्ठा करने में भी कोई प्रॉब्लम नहीं आ पाएगी। और ऐसे ही अगर आपका खाना पीना अच्छा है, आप एक अच्छा खाना खाते हैं, संतुलित खाना खाते हैं, पोषण वाला खाना खाते हैं तो उससे भी आपका जो धन है वो आपका जुड़ेगा क्योंकि अगर आप बाजार का खाते हैं, फास्ट फूड खाते हैं, पैसा वेस्ट करते हैं तो आपका धन खत्म होग और साथ ही साथ वाणी। जी हां, आपका बोलने का ढंग कैसा है? आपकी कर्कश वाणी है। आपकी मधुर वाणी है। आप दूसरों से बहुत जल्दी घुलमिल जाते हैं। आप अपने दूसरों को आकर्षित कर लेते हैं अपनी वाणी के द्वारा। तो ये सब चीजें भी हमको दूसरे घर से ही पता चलती हैं। तब आपको पता चल ही गया है कि दूसरे घर से हम क्या-क्या देखते हैं। और दूसरे घर को अच्छा करने के लिए हम अपने खानपान को अच्छा रखें। अपने वाणी को अच्छा रखें, अपने दांतों को अच्छा रखें। अपने संस्कार जो हमारे थोड़े से अगर हमको पिछले जन्म से संस्कार अच्छे नहीं मिले हैं उनको ठीक करें तो आपको कोई भी कोई ताकत आपको धन को जोड़ने में कोई ताकत आपको रोक नहीं पाएगी और आपकी कुंडली में कितना भी दूसरा घर खराब हो पर आप धन को ठीक से जोड़ पाएंगे और अपनी जिंदगी को बहुत अच्छा बना सकेंगे। तो यह तो हो गया व्यवहारिक बातें कि आप दूसरे घर से धन को कैसे आकर्षित करें और धन को कैसे अपने जीवन में लाएं। पर इसमें हमको बहुत चीजें देखनी होती है। जैसे कौन सा ग्रह बैठा हुआ है, किस ग्रह की दृष्टि है, कौन सा नक्षत्र है? इन सब चीजों को भी देखा जाता है। जैसे अब एकउदाहरण लेते हैं। जैसे कि आपकी कुंडली में मंगल दूसरे घर में बैठा हुआ है। मंगल क्या है? साहस का है। थोड़ा सा फुर्ती का कारक है। जल्दबाजी का कारक हैऔर वाणी को थोड़ा सा कर्कश भी बनाता है। मतलब आपकी वाणी थोड़ी सी तेज हो सकती है। थोड़ा तीखा बोलने वाले हो सकते हैं। तो उसके लिए आपको फिर जतन प्रतन करना पड़ेगा अपनी वाणी को कंट्रोल करना पड़ेगा क्योंकि आपको पता चल गया कि मेरा मंगल यहां बैठा हुआ है और मेरी वाणी में यह दोष आ सकता है। तो आप वाणी को ठीक करिए। साथ ही साथ खाने में तीखा थोड़ा सा कम खाइए क्योंकि मंगल तीखे खाने को भी रिप्रेजेंट करता है। तो तीखा कम खाइए, संतुलित भोजन खाइए और इस तरह से आप अपने दूसरे घर को अच्छा बना सकते हैं।
