अखिलेश को क्यों नहीं भाती योगी और रविकिशन की दोस्ती

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद रवि किशन के बीच की कैमिस्ट्री ना केवल लोगों को पसंद आती है पर खुद योगी को रविकिशन की कंपनी पसंद है और यही कारण है गोरखपुर में अकसर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों में योगी रवि किशन की चुटकियां लेते रहते हैं और कईं बार तो उनपर हास्य रस से भरपूर टिप्पणियां तक कर देते हैं जिसे ना केवल रवि किशन बल्कि वहां मौजूद जनता भी पसंद करती है। पर लगता है कि योगी और रविकिशन के बीच की टीका टिप्पणियां समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को पसंद नहीं आ रही और यही कारण है कि हाल ही में रविकिशन की एक टिप्पणी पर उन्होंने राजनीतिक विवाद पैदा करने की कोशिश कर डाली, दरअसल गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने हाल ही कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनकी संगत पसंद है और वह उनके लिये ‘स्ट्रेस बस्टर यानी तनाव दूर करने वाला का काम करते हैं, बस यही बात अखिलेश ने पकड़ ली और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में तंज कसते हुए लिख डाला कि सांसद समझ लें कि वह जन प्रतिनिधि हैं, न कि मुख्यमंत्री का खिलौना, अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि जनता के मुद्दों के प्रति रविकिशन असंवेदनशील रहते हैं और मुख्यमंत्री का तनाव दूर करने की बात करते हैं। अखिलेश ने यह भी कह डाला कि प्रदेश की जनता दुख का सामना कर रही है पर भाजपा सरकार के लोग आपस में विदूषक-विदूषक के खेल का आनंद ले रहे हैं।यह भाजपा सरकार है या सर्कस? चलते चलते अखिलेश ने यह भी तंज मार दिया कि मुख्यमंत्री जी ‘स्ट्रेस’ में हैं यह खुलासा करने के लिए सांसद जी (रवि किशन) को दंड जरूर मिलेगा
विपक्ष शांत BJP क्यों हैं परेशान SIR की फाइनल लिस्ट आई

यूपी में जब से sir शुरू हुआ था विपक्ष इसको लेकर बहुत ज्यादा आक्रमक था, अखिलेश ले लेकर कांग्रेस के बड़े बड़े नेता इसे विपक्ष के वोट काटने का हथकंड़ा बता रहे थे , सियासी चर्चाएं चल रही थी और विपक्ष का रूख चिंतित था पर अब SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन होने के बाद आई फाइनल वोटर लिस्ट को देखकर विपक्ष खामोश है पर भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ी दिख रही हैं, जी हां इस लेिस्ट में जिन सीटों पर बीजेपी विधायक बैठे हैं वहां पर वोट अधिक कम हुए हैं। जबकि दूसरी ओर समजावादी पार्टी की सीटों पर वोटर्स का नाम कम कटा है। बस इसको लेकर चर्चाएं गरम हैं कि इससे किसको फायदा मिलने वाला है और किसका नुकसान होगा। आपको बता दें कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक वोट कम हुए हैं। उनमें प्रतिशत के हिसाब से लखनऊ कैंट विधानसभा सबसे आगे है यहां डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक 2022 में 39 हजार वोटों से जीते थे अब SIR के बाद 1.24 लाख वोट कम हो गए है जो कुल वोटरों का का 33% फीसदी है, अयोध्या सीट पर
2022 में भाजपा ने 20 हजार से कम अंतर से जीती थी। इस सीट पर ही 80 हजार से अधिक वोट कट गए हैं। आपको बता दें कि यूपी में 16 विधानसभाएं ऐसी हैं जहां पर एक लाख से अधिक वोट कम हुए हैं। इसमें 15 सीट भाजपा के खाते में है। केवल लखनऊ पश्चिम इकलौती सीट है जहां समाजवादी पार्टी है और यहां पर 1.07 लाख वोट घटे हैं।
ममता क्यों मजबूर अपना चुनाव प्रचार BJP की तरह करने को

पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीख जैसे जैसे करीब आ रही है , यहां जबरदस्त राजनीती शुरू हो गई है, फिलहाल ममता की सरकार है तो जाहिर सी बात है की PM से लेकर बीजेपी के तमाम नेता जो भी यहां पहुंच रहे हैं वो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके राज में चल रही तमाम धांधलियों पर दीदी को घेर रहे हैं, और अब तो हुमांयू कबीर से लेकर, औवैसी ने भी बंगाल पहुंचकर ममता की मुशिकलें बहुत बढ़ा दी हैं और तभी चर्चाएं चल रही हैं कि इस बार ममता के लिए बंगाल फतह करना इतना आसान नहीं होगा। और शायद यही कारण है कि ममता का प्रचार का तरीका भी इस बार बदला बदला दिख रहा है, साथ ही उसके साथ चलने वाले साथी भी बदल गए हैं और कुछ bjp स्टाइल में प्रचार करते नजर आ रहे हैं , जी हां साफ दिख रहा है कि इस बार ममता ने अपनी Favorite महुआ मोइत्रा को साइड लाइन किया हुआ है और हाथ पकड़ लिया है सायंतिका बनर्जी का। आपको बता दें कि सायंतिका बंगाली ब्राह्मण हैं और बारानगर विधानसभा क्षेत्र से TMC उम्मीदवार हैं, पिछले काफी समय से वो बंगाल के लगभग घर में एक परिचित चेहरा हैं। बड़ी स्क्रीन पर वह बहुत ज्यादा नहीं चली पर बांग्ला टेलिविजन के जरिए लगभग हर घर में अपनी पहचान बनाई हुई है। बंगली ब्राहमण हैं, देखा यही जा रहा है ममता उनके साथ मीलों की यात्राएं कर रही हैं और इस दौरान सायंतिका बनर्जी के चुनाव प्रचार के स्टाइल की काफी चर्चा हो रही है, लोग कहने लगे हैं कि वो बीजेपी स्टाइल में प्रचार कर रही हैं, अपने प्रचार में वो लगतार जय श्री राम के नारे लगवाती है , इनके माथे पर बड़ा सा टीका होता है, खूबसूरत साड़ी पहन, सायंतिका, रास्ते में पड़ने वाले हर मंदिर का दर्शन करती हैं, यही नहीं अपनी यात्राओं में वो सिर पर पगड़ी पहनकर भी लोगों के बीच श्री राम के नारे लगवाती हैं, और यही कारण है कि आजकल बंगाल में ममता और सायंतिका बनर्जी की जो़डी की खूब चर्चा हो रही है, अब चर्चा यह भी है कि अपनी हार के डर से और बंगाल में चल रही हिंदू लहर को देखते हुए ममता एक बार फिर हिंदू वोटर्स को लुभाने के लिए सायंतिका का सहारा ले रही हैं, आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में जब से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की धमाकेदार एंट्री हुई है तभी से ममता ने इस तरह की रणनीती पर ज्यादा जोर दे रही हैं क्योंकि योगी लगातार बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठा रहे हैं, बंगाल में भी हिंदूओं पर होंने वाले अन्याय की बात कर रहे हैं ,सीएम योगी यूपी की बात करते हैं और कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में तुष्टीकरण नहीं, बल्कि संतुष्टीकरण है। अब प्रदेश में दंगे नहीं होते। उन्होंने कहा कि यूपी में जितने माफिया थे, सब जहन्नुम की यात्रा पर चले गए। अब बीजेपी पश्चिम बंगाल में भी यही करने वाली है। सीएम योगी ने कहा कि टीएमसी और वामपंथ के जितने भी गुंडे हैं, इनका उपचार किसी के पास है तो बीजेपी की डबल इंजन सरकार के पास है। अब जाहिर सी बात है जब योगी इस तरह से प्रचार करेंगे तो कहीं ना कहीं ममता का किला तो जरूर हिलेगा और ये बात ममता भाप गई और कहीं ना कहीं ममता को लगने लगा है कि मोदी और योगी की जोड़ी के चलते कहीं बंगाल में उनके हिंदू बंगाली वोटर्स हाथ से ना निकल जाए, और ऐसे में सायंतिका बनर्जी को वह एक तुरूप के इक्के की तरह इस्तेमाल कर रही हैं, आपको बता दें कि सायंतिका बनर्जी साल 2021 में पार्टी में शामिल हुई थी उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बांकुरा निर्वाचन क्षेत्र टिकट भी दिया गया था, पर वो हार गई थी, पर एक बार फिर ममता ने उनपर विश्वास जताया है और कारण यही माना जा रहा है कि सायंतिका के जरिए वो एक तीर से दो शिकार करना चाह रही हैं, पहला बंगाल में चल रही मोदी लहर , हिंदू लहर को काटने की कोशिश कर रही हैं। और दूसरा योगी को टक्कर देने भी सायंतिका बनर्जी का सहारा लिया है जो, जय श्रीराम का नारा लेकर लोगों के बीच निकलती हैं, और भीड़ उनके साथ हो लेती है।
