Bihar की राजनीती कितने पड़ावों से गुजरी 

बिहार के चुनाव बहुत जोर शोर के साथ चल रहे हैं और सभी राजनीतिक दलों के नेता जीत के लिए अपनी  तरह की  बयानबाजी कर रहे हैं। पर बिहार के चुनाव में अब तक क्या राजनीतिक मुद्दे रहे हैं? कौन सी राजनीतिक पार्टी रही है जो अब तक वहां पर शासन किया है और किन-किन नेताओं की इस पूरी जो बिहार की राजनीति है उसमें अहम भूमिका रही है , यह एक बड़ी कहानी है जिसको जानते हैं।

JdU ने किया बिहार में लंबे समय तक राज   

बिहार में सबसे लंबे समय तक जिस पार्टी का शासन रहा है या सबसे लंबे समय तक जिस पार्टी ने गवर्न किया है बिहार का, वो है जनता दल यूनाइटेड यानी jdu यानी  नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता दल यूनाइटेड ने लंबे समय तक बिहार की राजनीति पर कब्जा रखा और अब तक वो बिहार की राजनीति में कायम है मजबूती के साथ। दूसरे नंबर पर कांग्रेस है। 15 अगस्त जब भारत स्वतंत्र हुआ था तब से लेकर के 1967 तक 1967 तक लगातार कांग्रेस जो है वो सरकार में थी। अब 67 और सबको मालूम है पहले मुख्यमंत्री श्री कृष्ण श्री कृष्ण सिन्हा थे और श्री कृष्ण सिन्हा का अपना जो एक रुतबा रुबाब है और वो भूमिहार समाज से आते थे। उसके बाद वहां पर जन क्रांति दल आया, लेकिन उसका टेन्योर जो है बहुत छोटा था। कांग्रेस का पहला जो टेन्योर था वो लगभग 13 साल और 169 दिन का था। अब जन क्रांति दल जो है वो 5 मार्च 67 से 28 फरवरी 68 तक मतलब लगभग लगभग एक साल का था उनका टेन्योर। फिर जब कांग्रेस एक बार 13 साल के लिए गई तो 13 साल शासन करने के बाद गई तो जन क्रांति दल उसके बाद शोषित दल आया। शोषित दल ने जनवरी से मार्च 68 तक दो-ती महीने का उनका कार्यकाल था। फिर कांग्रेस आई। कांग्रेस  68 से 69 एक साल का उनका टेन्योर था। उसके बाद कांग्रेस में विभाजन शुरू हो गया। कांग्रेस आई का शासन आया।

Bihar में लगा तीन बार president rule 

फिर  प्रेसिडेंट रूल भी आया और तीन बार बिहार में प्रेसिडेंट रूल लग चुका है। फिर कांग्रेस फिर कांग्रेस आर आई जो फरवरी 70 से दिसंबर 70 तक जिसने जिसका कार्यकाल रहा। इसके बाद सोशलिस्ट पार्टी  सरकार में आई। उसका टेन्योर भी लंबा था। फिर कांग्रेस आर आई। उसका टेन्योर भी छोटा था। 71 से 72 तक फिर 72 से 77 तक आईएमसी इंडियन नेशनल कांग्रेस आर आई। उसके बाद फिर जनता पार्टी का शासन आया। अब ये एक पड़ाव के रूप में समझते हैं इसको। जो कांग्रेस का जो शासन था इंडियन नेशनल कांग्रेस का उसके बाद जो ये छोटे-छोटे सामाज राजनीतिक दल आए चाहे जन क्रांति दल हो ये ज्यादातर सामाजिक न्याय के नाम पर ये पार्टियां बिहार में उभरना शुरू हुई.

Bihar में हमेशा बोलबाला रहा  जातीवाद राजनीती 

बिहार में कास्ट डिस्क्रिमिनेशन जातिवाद  बहुत जोरों पर था तो शुरू शुरू के 10 12 साल के बाद फिर धीरे-धीरे लोगों में एस्पिरेशंस जागना शुरू हुए और इस तरह के राजनीतिक दल आना शुरू हुए। उसमें बहुत सारे लोग थे जो जैसे कृष्ण जैसे बीपी मंडल भोला पासवान हरिहर सिंह भोला पासवान दुर्गा प्रसाद राय   ये इस तरह के लोग  मुख्यमंत्री बनना शुरू हुए और उसके पीछे सामाजिक समीकरण था और जो कास्ट की पॉलिटिक्स थी उस कास्ट की पॉलिटिक्स का जवाब था।जब कांग्रेस का विभाजन हुआ तो उसमें एक की नेता इंदिरा गांधी बनी। दूसरी के नेता राजगोपालाचारी और बाकी और सारे लोग थे। तो ये  उनका शासन रहा। लेकिन फिर जब इमरजेंसी के बाद इंदिरा की हार हुई थी। उसके बाद फिर जनता पार्टी ने 77 से 80 तक जनता पार्टी के नाम पर वहां पर जनता पार्टी राज किया और इसमें एंटी कांग्रेस सेंटीमेंट काम किया और एंटी कांग्रेसिज्म के नाम पर लोग इकट्ठा हुए ।

लालू ने सब मर्यादाएं ताक पर रखकर अपनी बीबी को बनाया मुख्यमंत्री

फिर  कांग्रेस आई ने 10 साल के लिए शासन किया। लेकिन ये जो कांग्रेस आई का 80 के बाद का शासन था उसके बाद से जो है वहां पर फिर एक बार जातीय समीकरण उभरना शुरू हुए और जनता पार्टी की जो सरकार आई फिर बीपी सिंह वाला समय आया उसमें जो जनता पार्टी जनता पार्टी जनता दल बनके केंद्र में शासन बना था वो संयुक्त मोर्चा बनके तो जनता दल के नाम पर जनता दल का उसकी सरकार बिहार में बनी और 1990 से लेकर के 97 तक जनता दल का शासन रहा। बेसिकली लालू प्रसाद और नीतीश कुमार उस समय एक साथ हुआ करते थे। तो जो ओबीसी पॉलिटिक्स था और इसी दौरान मंडल और कमंडल वाली पॉलिटिक्स शुरू हुई। लेकिन पार्टी में कुछ डिफरेंसेस आए और जनता दल लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में जेल जाना पड़ा।
लेकिन लालू प्रसाद यादव ने किसी अन्य नेता की बजाय अपनी पत्नी को 97 25 जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल बना करके उनको मुख्यमंत्री बनाया और वो 2000 तक मुख्यमंत्री रही। उसके बाद फिर समता पार्टी के नाम पर जब चुनाव हुए तो समता पार्टी अलग हो गई। जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार और नीतीश कुमार ने चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मार्च 3 2000 से लेकर के 10 मार्च 2000 तक मतलब सात दिन वह मुख्यमंत्री रहे लेकिन उनकी सरकार नहीं गिरी। सरकार गिर गई और उसके बाद राष्ट्रीय जनता दल फिर सरकार में आई। रावड़ी देवी मुख्यमंत्री बनी। लेकिन उसके बाद फिर बिहार में प्रेसिडेंट रूल लगा मार्च 7 से नवंबर 2005 तक

Bihar की राजनीती सबसे अलग रही हमेशा 

लेकिन नवंबर 2005 इस प्रेसिडेंट रूल के बाद जब चुनाव हुए तो जनता दल यू की सरकार बनी और इस बार एनडीए की सरकार बनी और इस एनडीए की सरकार में भारतीय जनता पार्टी उनके साथ थी। अब इस बीच इस पूरे टेन्योर के दौरान मतलब नवंबर 24, 2005 से अभी तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं। मतलब 20 साल से ज्यादा 20 साल होने को हैं। वो मुख्यमंत्री हैं। सबसे लंबा टेन्योर किसी मुख्यमंत्री का है। यह अलग बात है कि इस दौरान वह कभी एनडीए के पार्टनर रहे, कभी महागठबंधन के हिस्सेदार रहे। मतलब कभी वह बीजेपी के साथ रहे, कभी राष्ट्रीय जनता दल के साथ रहे। बीच में थोड़े दिन के लिए जीतन राम मांझी 278 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने। अब इन सब के बीच जो महत्वपूर्ण है जिसको समझ लेना चाहिए और जो नई राजनीति हो रही है जिसमें कास्ट इनमरेशन की बात हो रही है जिसमें हिंदुत्व के अपमान की बात हो रही है लेकिन ये जो जातीय समीकरण है इसलिए कि जो बीपी मंडल साहब हैं जो जिन्होंने जिनके नाम पर मंडल कमीशन बना था वो भी अह 50 दिन तक मुख्यमंत्री रहे 22 नवंबर 1968 को तक तो यह यह एक जो जातीय समीकरण है वह हावीज होना शुरू हो गया था जब 13 साल और 169 दिन के बाद कांग्रेस की सरकार गई थी और उस समय जो कांग्रेस की सरकार हुई बनती थी उसमें ब्राह्मण – मुस्लिम और दलित का एक कॉम्बिनेशन हुआ करता था। लेकिन इसमें धीरे-धीरे फ्रेगमेंटेशंस आए और वो फ्रेगमेंटेशंस जो हैं उसने बिहार में, उत्तर प्रदेश में और बहुत सारे इलाकों में एक नई राजनीति बताई और वो राजनीति अब मुस्लिम और ओबीसी पर मुस्लिम यादव पर बिहार में टिकी है। जो नया फार्मूला लालू प्रसाद यादव ने दिया था। भूरा बाल साल करने वाला एक फार्मूला आया था। लेकिन अभी जो है वो पूरी तरह से यादव मुस्लिम पॉलिटिक्स हो गई है। रेस्ट ऑफ द ओबीसी और अपर कास्ट की पॉलिटिक्स हो गई है। जिसको दलित राजनीति ने भी जॉइ कर लिया है। इसलिए आरजेडी जैसे राजनीतिक दलों के लिए संकट वाली स्थिति है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *