क्या नीतीश कुमार बनने जा रहे हैं कार्यकारी CM

बिहार में नीतीश कुमार का MLC पद से एक पन्ने का इस्तीफा देने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है, जहां विपक्ष इसको लेकर नीतीश कुमार पर तंज कस रहे हैं ,वहीं दूसरी ओर इस्तीफा के बाद से बिहार में नीतीश की सफल लंबी ताजपोशी की चर्चाएं चल रही हैं और इन सब के बीच चर्चा ये भी है कि क्या नीतीश राज्यसभा में जाने के बाद कुछ समय कार्यकारी मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं,जो भी है बिहार की जनता ही नीतीश को नीतीश के काम को शायद ही भुला पाए और यही बात विपक्ष को सबसे ज्यादा खल रही है, जी हां इस्तीफे की बात सामने आते ही लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने नीतीश कुमार पर तीखा तंज कसते हुए कह दिया कि चाचा जी किए गए बिहार से तड़ी पार’, सोशल मीडिया पोस्ट पर रोहिणी आचार्य ने यह भी कह दिया कि बीजेपी ने नीतीश कुमार से जबरन इस्तीफा ले किया है।और उन्होंने नीतीश ने जैसा बोया, वैसा ही पाया है। रोहिणी ने जिस तरह से कुछ ज्यादा ही तीखी बात की उससे लगा कि रोहिणी नीतीश से क्या कोई पुराना हिसाब किताब पूरा करना चाहती हैं जो इतनी आक्रमक हो गई और ये तक लिख दिया कि कुर्सी से चिपके रहने की सुविधा के मोह में मुख्यमंत्री की कुर्सी भी गई और बिहार .भी चला गया हाथ से उनकी अंतर्मन की चीत्कार को समझा जा सकता है। ।
तीन महीने के लिए नीतीश की देखरेख में काम करेगा कार्यकारी CM
दूसरी तरफ JDU और BJP खेमे में कुछ अलग ही चर्चाएं चल रही हैं आपको बता दें कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद नियमानुसार संवैधानिक 14 दिनों में त्याग पत्र देना जरूरी होता है, अब नीतीश ने यह त्यागपत्र तो दे दिया और बिहार में इतना तय हो गया है कि 20 साल बाद नीतीश युग समाप्त होने वाला है। पर क्या वह अभी भी कार्यकारी मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं , बिहार के सियासी गलियारे में अचानक से तेज हलचल शुरू हो गई है कि क्या दशकों बाद बिहार को एक कार्यकारी सीएम मिलने वाला है और क्या ये कार्यकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे।
बिहार को सालो बाद एक कार्यकारी मुख्यमंत्री मिलने की चर्चा ने जब तूल पकड़ा जब हाल ही में सीएम नीतीश के आवास JDU के तमाम नेताओं की एक बड़ी बैठक हुई। वैसे बिहार में पहले भई ऐसा कईं बार हो चुका है। जब तक नई सरकार का गठन नहीं होता और बीजेपी CM पद के लिए कोई चेहरा घोषित नहीं करती बिहार के राज्यपाल भी नीतीश कुमार को कार्यकारी सीएम बने रहने को कह सकते हैं। ये भी चर्चा चल निकली है कि नीतीश के जाने से बहुत से JDU नेता और उनके चाहने वाले वोटर्स भी हताशा और निराश भी हैं , ऐसे में माना जा रहा है कि नीतीश कुमार तीन महीने के लिए बतौर राज्यसभा सदस्य दिल्ली रहेंगे, लेकिन वो नए मुख्यमंत्री के काम पर नजर रखेंगे। कार्यकारी सीएम के कामकाज को नीतीश 3 महीने तक देखेंगे और अगर नए कार्यकारी सीएम का काम नीतीश की नीतियों के मुताबिक रहा तो नीतीश उन्हें आगे के लिए हरी झंडी दे देंगे। एक चर्चा यह भी है कि बीजेपी के किसी नेता को कार्यकारी CM बनाकर जनता और दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं का रूख देखा जाएगा और यदि कही कोई विरोध सामने नहीं आया तो वही नेता Permanant कुर्सी पर बैठ जाएगा।
बिहार में पहले भी बना 4 दिन का कार्यकारी मुख्यमंत्री
वैसे कईं बार बिहार में कार्यकारी सीएम बनाए जा चुके हैं जैसे बिहार के पहले कार्यकारी सीएम दीप नारायण सिंह थे, जो सिर्फ 17 दिन मुख्यमंत्री रहे फिर फरवरी 1961 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के निधन के बाद वो कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए गए थे। 1968 में दिवंगत सतीश प्रसाद सिंह को भी कार्यकारी मुख्यमंत्री बनाया गया था उनका कार्यकाल बहुत सबसे छोटा सिर्फ 4 दिन का रहा था।
