Bihar —तेजस्वी पहले अपना घर बचाओ फिर किसी दूसरे की चिंता करना
कहावत है कि अपने घर शीशे के हों तो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फैंकते नहीं तो लेने के देने पड़ जाते हैं, और लगता है यही कहावत आजकल तेजस्वी यादव पर फिट बैठ रही है, जिनसे ना अपना घर ना अपनी पार्टी संभल रही है पर दूसरों पर तंज कसने, दूसरों की बुराई करने में वो सबसे आगे खड़े रहते हैं, अभी हाल फिलहाल में ही उन्होंने नीतीश कुमार को फिर से मानसिक रूप से अस्वस्थ बता कर उनका मजाक उड़ाया था और अब केजरीवाल के मसले पर वह बीजेपी पर टूट पड़े है और यही नहीं दिल्ली में दोबारा विधानसभा चुनाव तक कराने की मांग कर डाली है। तेजस्वी ने आरोप लगया है कि बीजेपी एजेंसियों का दुरुपयोग करके अपने पक्ष में चुनावी माहौल तैयार करती है। तेजस्वी यह भी कहते हैं कि जब कोर्ट में मामला टिक नहीं पाया, तो इतनी बड़ी कार्रवाई किस आधार पर की गई
तेजस्वी-तेजप्रताप आमने-सामने जबरदस्त तनाव

इतना तो ठीक था पर इस दौरान और जो हुआ वो तेजस्वी के लिए यही सबक ही है कि पहले अपने घर-परिवार से रिश्ते ठीक कर लो उसके बाद किसी दूसरे दल की चिंता करना, दरअसल हुआ यूं कि कोर्ट के आदेश पर बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, उनकी बहन मीसा भारती और बड़े बेटे तेज प्रताप यादव अदालत पहुंचे थे, वहीं वहीं, लालू यादव और राबड़ी देवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े हुए थे, कोर्ट परिसर में काफी समय बाद तेजस्वी यादव और तेजप्रताप का आमना -सामना हुआ और यह बात खुलकर सामने आ गई कि दोनों भाईयों के बीच बहुत ही तनाव चल रहा है। हुआ यूं कि तेजस्वी अपने करीबी मित्र संजय यादव, अपने वकीलों, और मीसा भारती के साथ थे, तभी सामने से तेज प्रताप यादव वहां पहुंच गए पल भर के लिए पूरा माहौल बहुत tense हो गया, वहीं मौजूद लोगों को लगा कि दोनों भाई एक दूसरे से बात करें कुछ discussion होगा पर ऐसा कुछ हुआ नहीं, तेज प्रताप यादव ने लाल चेहरे , सख्त भाव से तेजस्वी को देखा और आगे बढ़ गए। मतलब साफ लगा कि तेजप्रताप अपने भाई से सख्त नाराज हैं, वैसे लालू की बेटियां जिसमें रागिनी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है वो भी तेजस्वी से काफी नाराज चल रही हैं और ऐसी हालात में जब तेजस्वी अपनी पार्टी को जोडने, अपने भाई-बहनों को मनाने में नाकामयाब रहते हैं तो चर्चाएं तो उठेंगी ही कि दूसरों की ओखली में क्यों सिर दे रहे हैं, वैसे चर्चा ये भी है कि केजरीवाल की रिहाई और फैसले की आड़ में तेजस्वी ‘लैंड फॉर जॉब’ का भी मुद्दा उठाना चाहते हैं क्योंकि वो कह रहे हैं कि कई बार उन सब की जांच के बावजूद कोई घोटाला साबित नहीं हुआ है, तेजस्वी यह भी दावा करते हैं कि तीन बार राहत मिलने के बाद भी मामले को दोहराया गया, पर जो भी हो लालू परिवार के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई में लालू परिवार की अंदरूनी कलह एक बार फिर कैमरों की नजरों में आ गई है और कईं बीजेपी नेता तेजस्वी को यही सलाह दे रहे हैं कि पहले अपनी पार्टी बचाओ फिर किसी दूसरी पार्टी की चिंता करना।
अखिलेश का बढ़ता प्यार कहीं योगी के लिए मुसीबत ना बनें

चर्चाओं का बाजार गर्म है कि यूपी में बहुजन समाजवादी पार्टी के इकलौते विधायक Umashankar Singh पर आयकर विभाग का छापा, बीजेपी को महंगा पढ़ रहा है, क्योंकि अब तक इसके विरोध में ना केवल कईं कद्दावर नेता उतर चुके हैं, बल्कि अहम बात ये है कि खुद उमाशंकर कैंसर से जूझ रहे हैं और जनता भी कहीं ना कहीं उनसे सहानुभूति रख रही है। अब कुछ दिन पहले ही जहां बीजेपी नेता और योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विधायक उमाशंकर सिंह के लखनऊ और अन्य स्थानों पर आवास व प्रतिष्ठानों पर हुए आयकर छापे की निंदा की थी, इसको लेकर अब राजनीती कुछ ज्यादा गर्म हो गई है क्योंकि अब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी इन छापों की कड़ी निंदा कर डाली है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपाई यह भी नहीं देखते हैं कि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीडित है , परेशान है । वैसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अखिलेश यादव का यह बयान काफी चर्चा का विषय बन गया है और लग रहा है कि आने वाले समय में बहुजन समाजवादी पार्टी के लिए अखिलेश का यह प्यार कहीं योगी के लिए मुसीबत ना बन जाए।
