Bihar में बढ़ता Crime Graph क्या कोई साजिश

बिहार में चुनाव नजदीक जा रहा है और कई तरह के डेवलपमेंट हो रहे हैं। एक तो जो स्पेशल जो एसआईआर की बात हो रही है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन है वोटर्स का। एक वह मसला है जिसको लेकर के विपक्ष बहुत मुखर है। उसके अलावा डेवलपमेंट की तो बात होती ही रहती है। दूसरा जो मसला है वो जिस तरह से बिहार में एक के बाद एक हत्याएं हुई है। अगर हम पिछले कुछ दिनों की बात करें तो पिछले 10 दिनों में सात लोग मारे गए हैं। मैं नाम बताता हूं। उसके बाद आगे समझने की कोशिश करते हैं। यह मामला गोपाल खेमका से शुरू हुआ था। उसके बाद अजीत कुमार, रमाकांत यादव, विक्रम झा, जितेंद्र कुमार महतोल जो एक लॉयर थे, सुशीला देवी, सुरेंद्र केवट और पुत्तू खान। अब इसमें एक घटना वो भी है जिसमें एक यादव बच्चा मतलब एक यादव यंग आदमी था जिसको जो मुहर्रम के जुलूस के दौरान मार दिया गया था।

 

क्या नीतीश सरकार फेल law -Order में

पूरे मामले के बाद दो तरह की चीजें हो रही हैं। पहला तो यह कि कहा यह जा रहा है कि लॉ एंड आर्डर को रखने में सरकार फेल हो गई है , दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर जो लोग एक्टिव हैं उनका यह मानना है कि यह शायद जानबूझकर किया जा रहा है और इसमें विपक्ष के लोगों की भूमिका हो सकती है। लेकिन इसको साबित नहीं किया जा सकता सिर्फ अहसास किया जा रहा है कि अचनाक बिहार में क्राइम रेट इतना ज्यादा क्यों बढ़ गया। क्या इस तरह के मर्डर्स विपक्ष के लोग करवा करके या सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर सकते हैं सोशल मीडिया पर इस तरह की बात हो रही हैं। यह बाते आंकड़ों को लेकर भी की जा रही हैं क्योंकि इसके पहले 1 साल पहले लगभग 2024 में जब जीतन साहनी का जुलाई 2024 में मर्डर हुआ था जो वीआईपी पार्टी के मुखिया के पिताजी थे। उसके अलावा उसके अलावा इस तरह की कोई घटना नहीं बड़ी हुई और यह बात भी तय है कि जो घटनाएं होती हैं हिंसा की या मर्डर की इसको आप जीरो पर कभी कहीं किसी समाज में नहीं लाया जा सकता है। जो मोस्ट डेवलप्ड कंट्रीज हैं वहां पर भी अमेरिका में भी फायरिंग्स में बहुत सारे लोग मारे जाते हैं। लेकिन फिर भी लॉ एंड ऑर्डर जो है वो स्टेट की जिम्मेदारी होती है और उसमें अगर वो चूकेगी तो विपक्ष डेमोक्रेसी में उस पर प्रश्न करेगा। मैंने गिनाया कि कैसे पिछले 10 दिन में आठ लोग मार दिए गए हैं। अब ये कंपैरिजन हो रहा है, होना शुरू हो गया है कि लॉ एंड ऑर्डर के मामले में बुरी तरह से फेल हो गई है नीतीश कुमार की सरकार और यह विशेष रूप से आरजेडी और कांग्रेस की तरफ से आ रहा है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी नेता जो प्रतिपक्ष हैं वो बता रहे हैं कि किस तरह से जंगल राज बिहार में हो गया है।

 

लालू राज में था जंगल राज

1990 से 2005 के बीच में जब तक लालू प्रसाद यादव का एक छत्र एक राज था, वह जंगल राज का प्राय बना हुआ था। और जिस तरह की घटनाएं होती थी कि आईएएस ऑफिस सर मैं विश्वास परिवार की बात कर रहा हूं। किस तरह से उनकी पत्नी के साथ रेप हुआ था जो आईएस अधिकारी थे उसके बाद उनको फोर्स अबॉर्शन कराना पड़ा था। कई बार ये स्टेरला मतलबउनको नसबंदी कराना पड़ा था। शिल्पी जैन और गौतम सिंह का मामला उसको सुसाइड कहा जाता है। इस तरह की अनगिनत घटनाएं जिसमें गाड़ियों की लूट और मोबाइल फोन और मर्डर और हफ्ता वसूली अपहरण ये पूरा एक व्यवसाय बना हुआ था लालू राज में मतलब 2000 1990 और 2005 ये वहां की जनता कहती है कि ऐसा है और अब यह बताने की कोशिश की जा रही विशेष रूप से कांग्रेस और आरजेडी के द्वारा कि अह अभी की स्थिति उस समय से भी खराब है।लेकिन शंका तब होती है जब पिछले तीन साल की अगर आप बात करें तो ऐसी कोई बड़ी घटना नहीं होती है लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे एक के बाद अपराधिक घटनाएं हो रही हैं।

 

लोग नही चाहते Bihar में दोबारा जंगलराज

 

सोशल मीडिया पर चल रही है कि क्या ये किसी साजिश का हिस्सा है और अगर साजिश का हिस्सा है तो सरकार को उस पर भी ध्यान देना चाहिए। लेकिन यह बात आने लगी है जो लोग जंगल राज जो तथाकथित जंगल राज था उसके भुक्त भोगी हैं उनका मानना है कि वैसी स्थिति फिर नहीं आनी चाहिए नहीं आ सकती है वो बहुत बुरा दौर था गुजर गया लेकिन अगर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादवकी सरकार आती है तो वो फिर वो राज वापस लौट लौटेगा। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह जो है यह जो कंपैरिजन किया जा रहा है यह कंपैरिजन उसी
पुराने समय को धोने की कोशिश है और जो लोग इतने लंबे समय से सरकार से गायब हैं वो इस कोशिश में है कि किसी तरह से यह सरकार जाए और तेजस्वी मुख्यमंत्री बने लालू प्रसाद यादव की अपनी ख्वाहिश है ये कि वो अपने रहते रहते तेजस्वी को मुख्यमंत्री तौर पर देखें।

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