Bihar में congress की हार का झटका महाराष्ट्र तक पहुंच गया

बिहार में कांग्रेस की हार का झटका महाराष्ट्र तक पहुंच गया है, बिहार चुनाव में मिली शर्मनाक हार के बाद देश की सबसे अमीर सरकारी इकाई महाराष्ट्र के बीएमसी चुनाव कांग्रेस ने अपने दम पर लड़ने का एलान कर दिया, कांग्रेस ने सभी 227 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया, पर जैसे ही कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्निथला ने इसका ऐलान किया महाराष्ट्र की राजनीती में जबरदस्त भूचाल आ गया, जहां कांग्रेस की इस घोषणा से उद्धव सेना परेशान नजर आई वहीं बीजेपी खेमे में खुशी दिखाई दी, वैसे कांग्रेस ने यह कदम क्यों उठाया है इसके पीछे दो बड़ी वजह सामने आ रही हैं पहली खुद कांग्रेस के कईं नेता खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि उद्धव सेना बार-बार बीजेपी का भय दिखाकर कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है जिसे और बर्दाश नहीं किया जा सकता, दूसरा कांग्रेस को लग रहा है कि किसी का साथ उसे रास नहीं आ रहा, खासकर बिहार के रिजल्ट देखकर कांग्रेस एकला चलो की रणनीती बना रही है। अब माना यही जा रहा है कि इससे बीएमसी चुनाव में सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे की पार्टी को नुकसान होगा क्योंकि अलग-चुनाव लड़ने से मुस्लिम,दलित और अल्पसंख्यक वोट विभाजित होंगे और जाहिर सी बात है कि कांग्रेस चूंकि नेशनल पार्टी है साथ ही दलित- अल्पसंख्यक समाज पारंपरिक रूप से कांग्रेस का समर्थन करता आया है इसलिए गठबंधन न होने पर भी वो बावजूद इस वर्ग का झुकाव कांग्रेस की तरफ ही होगा। अब देखना यही है कि क्या उद्धव ठाकरे इस बारे में राहुल गांधी या शरद पवार से बात करके मामला सुलझा लेंगे, पर यह मुशिकल लगता है।

 

Bihar —- की हार अखिलेश भी एकला चलो की राह पर

 

बिहार के रिजल्ट ने महागठबंधन का पूरा तालमेल बिगाड़ कर रख दिया है , पहले से ही इसमें शामिल कईं बड़े दलों के बीच कुछ अच्छा नहीं चल रहा है लेकिन बिहार में महागठबंधन की जबरदस्त हार के कारण गठबंधन का पूरा समीकरण बिगड़ गया है, बिहार के रिजल्ट ने सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को पहुंचाया है, जहां एक तरफ बिहार में ही rjd के कुछ नेताओं ने हार का ठीकरा कांग्रेस के गले मढ़ दिया, वहीं दूसरी तरफ बिहार चुनाव होने पर rjd का बुरा हाल देखने के बाद यूपी में भी उसका असर देखने को मिल रहा है, समाजवादी पार्टी के नेता खुलकर बोलने लगे हैं कि यूपी में 2027 में आने वाले चुनाव में कांग्रेस का साथ ठीक नहीं रहेगा। मतलब चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या अब इंडि गठबंधन टूटने के कगार पर पहुंच चुका है क्योंकि खुद कांग्रेस ने कोई कुछ कहे इससे पहले ही महाराष्ट्र में bmc चुनाव अकेले लड़ने का फैसला कर लिया है। अब यूपी में देखना यही है कि क्या 2027 में राहुल-अखिलेश की राहें अगल हो जाएंगी और इसके लिए पहल कौन करेगा क्या अखिलेश आगे बढ़कर इसकी घोषणा करेंगे क्योंकि याद कीजिए पहले चुनाव को जहां अखिलेश की पार्टी ने कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर किसी भी तरह का समझौता करने से मना कर दिया था तब प्रियंका के हस्तक्षेप पर मामला पटरी पर आया था, पर इस बार बिहार में कांग्रेस की करारी हार के बाद अखिलेश के तेवर और कड़े होंगे और ऐसे में या तो वो कांग्रेस को नमस्ते कहेगी या फिर अपनी शर्तों पर उसके साथ सीट शेयरिग करेगी। वैसे यह सब जानते ही हैं कि 2017 के विधानसभा चुनावों में खराब परिणाम आने के बाद दो लड़कों यानी राहुल और अखिलेश की जोड़ी अलग हो ही गई थी।

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