BIHAR हाथ लगा बीजेपी के एक बड़ा मुद्दा

बिहार में जिस तरह से महागठबंधन में सीटों को लेकर अंदर ही अंदर जबरदस्त कलह की शुरूआत हो चुकी है, खासकर जिस तरह से कांग्रेस लगातार RJD को ओवर पावर कर रही है या कहिए राहुल तेजस्वी का कद लगातार छोटा कर रहे है, इससे बीजेपी को एक बड़ा हथियार मिल गया है बिहार में विपक्ष पर वार करने का। और शायद यही कारण है कि बिहार के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने यह तक कह दिया कि महागठबंधन की ट्रेन का हर डिब्बा इंजन बनना चाहता है, उन्होंने कहा कि अभी तक बिहार में विपक्ष ने अपना मुख्यमंत्री घोषित नहीं किया है, गिरिराज यह भी कहने से नहीं चूके कि विपक्ष यह तक तय नहीं कर पा रहा कि मुख्यमंत्री राहुल की पसंद का होगा या आरजेडी का होगा । यही नहीं बीजेपी नेता ने बिहार में चल रही राजनीतीक घमासान को देखते हुए कह दिया कि साफ लग रहा है कि तेजस्वी, राहुल गांधी के साये में दब रहे हैं। वैसे गिरिराज सिंह के बयान को लेकर कांग्रेस सफाई दे रही है कि वो महागठबंधन के दलों में फूट डालवाना चाहते हैं। वैसे खुद कांग्रेस जानती है कि बिहार में हाल ठीक नहीं है, एक तरफ तेजस्वी अपने आप को बार बार मुख्यमंत्री का चेहरा बता रहे हैं पर इस बार में ना तो कांग्रेस और ना ही राहुल ने मुंह खोला है, साफ है कि कांग्रेस इसके पक्ष में नहीं है। वैसे देखा यही जा रहा है कि जिस तरह से कांग्रेस, बिहार में अपनी भूमिका बढ़ा रही है, ज्यादा सीटों की दावेदारी ठोक दी है उससे कांग्रेस की मुख्यमंत्री पद पाने की चाहत सामने आ रही है।

Bihar ——साल 1980 क्यों बन गया congress की परेशानी का सबब


साल 1980 में ऐसा क्या हो गया जो अब कांग्रेस की परेशानी का सबब बन गया है और राहुल की वोट चोरी अभियान की काट बनता जा रहा है, जी हां 1980 का हवाला देकर ही बीजेपी लगातार कांग्रेस को घेर रही हैं और पहले अपने घर में वोट चोरी के मामले देने की सलाह दे रही है। खैर यह मामला इतना पेचिदा, इतना संवेदनशील बन चुका है कि दिल्ली की एक अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर बुधवार को कोई फैसला देने से परहेज किया और कहा कि आदेश सुरक्षित रखा जा रहा है। चलिए अब आपको बताते हैं कि साल 1980 में क्या हुआ था, दरअसल आरोप यह है कि इस समय सोनिया गांधी भारत की नागरिक नहीं बनी थी पर उनका नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में एक वोटर के रूप में लिस्ट में शामिल कर लिया गया था, अब बीजेपी खुलकर आरोप लगा रही है कि कांग्रेस किस मुंह से वोट चोरी अभियान चला रही है।यही नहीं बीजेपी ने यह भी मुद्दा उछाल दिया कि अगर वह नागरिक थीं तो फिर 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से डिलीट क्यों किया गया। बीजेपी यह भी बता रही है कि उस election comminssion ने दो नाम हटाए थे एक संजय गांधी जिनका प्लेन क्रैश होने से उनका निधन हुआ और दूसरा सोनिया गांधी का था। अब मुद्दा यही उछल रहा है कि क्या चुनाव आयोग को उस सोनिया गांधी के वोटर बनने पर कुछ गड़बड़ी मिली होंगी तभी उनका नाम मतदाता सूची से काट दिया गया।वैसे इस मुद्दे के जरिए लगातार बीजेपी congress के वोट चोरी अभियान पर हावी पड़ रही है।

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