Bihar – 12 सीटों की हार चाणक्य को बर्दाश नहीं शुरू हुई समीक्षा

अमित शाह को बीजेपी का चाणक्य यूंही नहीं कहा जाता है, वो हारी बाजी जिताने की ताकत रखते हैं और विपक्ष की हर राजनीतिक चाल का तोड़ उनके पास रहता है और शायद यही कारण है कि चाणक्य को बिहार में 89 सीटों की सीट पर जितनी खुशी है उतना ही दुख 12 सीटे हारने का है और अपने स्वाभाव के अनुरूप चाणक्य ने इन हारी हुई सीटों के पीछे वजह जानने के लिए बाकायदा यहां से हारे बीजेपी नेताओं के साथ बैठक शुरू की है , हाल ही में चाणक्य ने ढाका विधानसभा सीट से खड़े बीजेपी उम्मीदवार पवन जायसवाल से मुलाकात की जो rjd के फैसल रहमान से मात्र 178 वोट से हार गए थे और इसको लेकर चर्चा यही चल रही है कि मोतिहारी के सांसद राधामोहन सिंह के कारण ये हार हुई है। इसी तरह फारबिसगंज विधानसभा से बीजेपी के उम्मीदवार विद्यानंद केसरी केवल 221 मत से हारे तो चर्चा है कि यहां के एमपी प्रदीप सिंह इसके जिम्मेदार हैं क्योंकि दोनों नेताओं के संबंध अच्छे नहीं थे।इस तरह चनपटिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही लग रही है जहां बीजेपी के उमाकांत सिंह भी केवल 602 वोट से हार गए। यहां चुनाव हराने का आरोप बेतिया के सांसद डॉ संजय जायसवाल पर लगा हुआ है , इसी तरह और सीटों पर भी समीक्षा की जाएगी और पता यह भी चला है कि चाणक्य उन नेताओं को सबक सिखाने की सोच रहे हैं जिनके अंदर ही अंदर विद्रोह के चलते कईं सीटों पर बीजेपी बहुत ही कम अंतर से हारी है । इसको लेकर लगातार आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं और आने वाले समय पर कुछ नेताओं पर गाज गिरेगी तो कोई चौकाने वाली बात नहीं होगी।
तेजस्वी के खिलाफ बगावत क्या टूटेगी RJD

लालू पुत्र तेजस्वी यादव ने चुनाव को लेकर सपने तो बहुत सजाए थे, इसके लिए हर तरह की राजनीती भी कर डाली, अपना नाम मुख्यमंत्री पद के लिए भी ok करवा लिया , लेकिन सब सपने धाराशायी होकर बिखर गए , गद्दी तो गई साथ ही परिवार में हुए विवादों के चलते मान-सम्मान भी खतरे में पड़ गया है खासतौर पर अपनी बहन रोहिणी के साथ किए दुर्व्यवहार का खामियाजा उन्हें अभी तक उठाना पड़ रहा है , जी हां पता चला है कि बिहार में RJD की महिला कार्यकर्ता ही तेजसवी और उसके साथियों के खिलाफ खुलकर सामने आ गई हैं , हाल ही में सैकड़ों महिलाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर विरोध मार्च निकाला और पार्टी के मुख्य रणनीतिकार राज्यसभा सदस्य संजय यादव और MLC सुनील सिंह के खिलाफ जमकर बरसी, महिलाओं ने जोरदार नारों के साथ रोहिणी की हिम्मत बंधाई, महिलाओं ने नारे लगाए “रोहिणी दीदी आप मत घबराना, सारण की जनता आपके साथ है, आपको बता दें कि 14 नवंबर को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के घर पर हुई एक बैठक में डॉ. रोहिणी आचार्य ने चुनाव में करारी हार की जिम्मेदारी तय करने की बात कही तो उनके साथ कुछ लोगों ने बदतमीजी की।रोहिणी ने इसके लिए अपने भाई तेजस्वी और उसके साथियों पर खुलकर आरोप लगाया था। साफ लग रहा है कि बिहार में RJD का भविष्य खतरे में ही है, एक तरफ परिवार टूट कर बिखर गया और अब पार्टी भी बिखरती जा रही है, वैसे गजब है दूसरों को राजनीती का पाठ सीखाने में माहिर लालू यादव आज अपनी पार्टी को समेटने में असहाय ही दिख रहे हैं
विपक्ष को तमाचा दो महिला BLO ने रिकार्ड समय में पूरा किया काम

आजकल चर्चाओं का बाजार गर्म है कि देश में चल रहे SIR यानी गहन संशोधन अभियान के काम के कारण बहुत से सरकारी कर्मचारी परेशान हैं, तनाव में हैं और कईयों की मौत भी हो रही है, पर इन सब के बीच पश्चिम बंगाल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिससे पता चलता है कि जिन लोगों में काम का जज्बा है वो sir का काम रिकार्ड समय में पूरा कर रहे हैं और वो भी विपरीत हालातों में क्योंकि बंगाम में टीएमसी और ममता बनर्जी लगातार sir का विरोध करने में लगी हैं और सरकारी तंत्र ही इस काम को पूरा होने में तमाम बाधा खड़ी कर रहा है. पर बंगाल की दो बीएलओ महिलाओं ने अपना काम समय पर करके sir का विरोध करने वाले विपक्ष को आईना दिखा दिया है, जी हां बंगाल की दो बूथ लेवल ऑफिसर करुणा और बिनिता ने अपना काम रिकॉर्ड समय में पूरा करके देशभर में मिसाल पेश की है। आसनसोल क्षेत्र की करणा पेशे से Teacher हैं और मात्र 21 दिनों में फार्म कलेक्शन और अपलोडिंग का काम पूरा कर लिया है। उनके बूथ में लगभग 700 वोटर थे, दूसरी तरफ बीनीता कुमारी ने मात्र 20 दिनों में अपना काम पूरा कर लिया।
