नहीं लागू किया है अभी तक सातवा वेतन आयोग

जब देश आठवें वेतन मान को लगाने की तैयारी कर रहा है। पश्चिम बंगाल जो अपने आप को प्रोग्रेसिव और बहुत ऐसा प्रदेश होने का दावा करता है जो पूरे देश के तुलना में 100 साल पहले की सोचता है। उस प्रदेश में अब तक छठा वेतन आयोग लागू है। मतलब आठवें की बात तो दूर रही। सातवां भी अभी नहीं लागू हो रहा है। जबकि बाकी सारे जगहों पर सातवां तो लागू हो गया है और जैसे ही केंद्र में आठवां लागू होगा सारे प्रदेश भी आठवें की तैयारी में लग जाएंगे। अब आप इस बात का अनुमान लगाइए कि क्या स्थिति है पश्चिम बंगाल की। ना केवल सरकारी नौकरियों में बल्कि बाकी जगहों पर भी रोजगार को लेकर के मुश्किलें हैं। और डीए पर सुप्रीम कोर्ट को इंटरवेंशन करना पड़ा इसलिए कि डीए प्रदेश सरकार ने रोक रखा था और उसको तुरंत रिलीज करने की बात अदालत ने कही थी। इसके अलावा जो प्राइवेट नौकरियां हैं या बाकी सब जगहों पर हैं उसका जो वहां के लोकल लोग हैं उनका दावा है कि उस पर बांग्लादेश घुसपैठियों का कब्जा है और यह एक बड़ा कारण है कि वहां पश्चिम बंगाल के लोग माइग्रेट करके दूसरे प्रदेशों में जाते हैं। अब चुनाव में इस बात पर बहस चल रही है। प्रधानमंत्री ने भी घोषणा की है कि अगर भारतीय जनता पार्टी शासन में आती है तो वहां पर तुरंत ही सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा। अबकि सीधे छठे से आठवां वेतन आयोग पर नहीं शिफ्ट हो सकते इसलिए सातवें वेतन आयोग को लगाने की तुरंत प्रभाव से बात कही जा रही है। एक ये मिथ क्रिएट किया हुआ है कि सबसे ज्यादा माइग्रेंट लेबरर्स जो हैं वो बिहार के हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल भी इस तुलना में कहीं पीछे नहीं है और वहां भी बड़ी संख्या में लोग माइग्रेट करके दूसरे प्रदेशों में नौकरी करते हैं। यह एक बड़ी समस्या है और इस समस्या का निपटारा संजीदगी से हो सकता है दंभ से नहीं। अब और पहले के भी नेता भी लगातार इस दंभ में रहे है कि उन्होंने सबको पढ़ना लिखना और ये कुछ सिखाया पर अपने लोगों को ही कुछ नहीं सिखा पाए। तो यह अलग बात है और सारे ज एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन है उनमें से कोई भी इस तरह का नहीं है जो पश्चिम बंगाल में बचा हो। तो यह एक स्थिति है जिसको बीजेपी अपने चुनाव प्रचार में जनता के सामने ला रही है।
Congress नेता वंदेमातरम पर क्या बोली पार्टी की हुई किरकिरी

मध्य प्रदेश, इंदौर में कांग्रेस की काउंसिलर है फौजिया शेख आलिम। उन्होंने वंदे मातरम गाने से मना कर दिया। अब अभी कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने जो वंदे मातरम है उसमें जो दो स्टैंजा के बाद बाकी सारे स्टैंजा डिलीट कर दिए थे। उसको एक बार फिर जोड़ दिया और अब जो सरकार के कार्यक्रम होते हैं उनमें भी पूरा का पूरा वंदे मातरम गाया जाता है। इसको लेकर के विरोध भी हुआ था। लेकिन वंदे मातरम को लेकर के जो मुस्लिम मुसलमानों का एटीट्यूड है वो हमेशा से वो किसी भी राजनीतिक दल में रहे हो वो मुस्लिम लीग वाला ही रहा है। अब चाहे समाजवादी पार्टी के नेता संभल के साथ पुराने सांसद रहे हैं जो जिंदा जीवित नहीं है या उनकेउनके ग्रैंड सन जो है वो वहां से जीत करके आए हैं या बाकी और कोई सांसद हो वो वंदे मातरम नहीं गाता है और इसको बहुत बिना किसी लगाव उसके कहता है कि उनकी जो धार्मिक पुस्तक है वो उसको ऐसा करने से मना करती है इसलिए वो नहीं गाते हैं और यही स्टैंड जो है पार्टीशन से पहले जो है
वो रहा है मुस्लिम लीग का। अब पहली बार यहगाना जो है एक मुस्लिम नेता ने ही गाया था। लेकिन बाद में इसको विवाद बना दिया गया और जिन्ना ने इसको बखेड़ा कर दिया। अब इस बात को लेकर के अभी तक वो माइंडसेट वही है। अब बहुत सारी चीजें मुसलमानों को नहीं पसंद आती थी जो भारत में होती थी और इसी कारण उन्होंने पाकिस्तान मांगा और पाकिस्तान ले भी लिया। लेकिन एक बड़ा सेक्शन जो है वो यहां रह गया। उसके बाद भी वो उन्हीं बातों को स्वीकार करता है। अब ये जो फौजिया शेख आलिम है एक और काउंसिलर ने ऐसा मना किया था। अब ये कह रहे हैं कि कांग्रेस तो उसके समर्थन में है। तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हम कांग्रेस के गुलाम नहीं है और अगर कांग्रेस इस तरह की बात करेगी तो वो एआएआईएम में चली जाएंगी, उनका दामन थाम लेंगी। मतलब यह कि उनको मालूम है कि एआईएआईएम इस तरह की बात नहीं करता है और यह उनकी पार्टी जो है जब तक कांग्रेस मुसलमानों की बात करेगी तब तक तो उनके साथ है लेकिन अगर वो उनकी बात नहीं करेगी तो वैसे राजनीतिक दल में चली जाएंगी जो उनकी बात करेगा। लेकिन वो भारत के किसी इंटरेस्ट के साथ या भारत के किसी उसके साथ नहीं खड़ी होंगी।
पाकिस्तान को विश्व गुरू बनाने की बात कौन लोग फैला रहे—देश के खिलाफ क्या है मकसद
अब एक और मसला है कि भारत में सोशल मीडिया में दो तरह की बातें चल रही हैं। जब से सीज फायर हुआ है तब से सोशल मीडिया इस बात को लेकर के गर्म है। विशेष रूप से भारत पर तंज कस रहा है कि जो लोग विश्वुरु बनने का दावा कर रहे थे वो लोग पीछे रह गए। और अब पाकिस्तान नया विश्व गुरु है। इसलिए कि उसने अमेरिका और ईरान की जो युद्ध विराम की डील करा दी है। अब ये एक बड़ा अहम सा मसला है कि इसमें अमेरिका की इसमें पाकिस्तान की कितनी भूमिका है और क्या भूमिका है ये तो आने वाले समय में पता लगेगा। लेकिन भारत के लोगों को इससे क्या मिल रहा है? अगर अगर भारत इस जो समझौता हुआ है इस समझौते से अपने आप को अलग रखा है और पाकिस्तान का इस्तेमाल अमेरिका ने अपने हिसाब से किया है। तो और दूसरा ये कि क्या इस डील से जो वॉर है वो रुक गया है? लेबनान पर हमले नहीं हो रहे हैं या ईरान इजराइल पर हमले नहीं कर रहा है। तो क्या अमेरिका का जो ये जो फेस सेविंग वाला फार्मूला है उसको बचाने के लिए पाकिस्तान आया है और यह बात लोगों को समझ में नहीं आ रही है और क्या पाकिस्तान के समर्थन के लिए यह सब कहना जरूरी है या भारत को ह्यूमिलिएट करना जरूरी है? हालांकि इसमें भारत हमिलिएट नहीं हो रहा है। भारत ने अपनी राजनीति अपनी जो डिप्लोमेसी है वो बहुत बेहतर ढंग से खेली है। बिना किसी खेमे का हिस्सा बने। लेकिन जिन लोगों को अंदर से अंदर खाने इस तरह की खबर आई है कि भारत इसमें ह्यूमिलिएट हुआ है वो जरूर एक्सप्लेन कर रहे होंगे। लेकिन कुल मिलाकर के ये जो पाकिस्तान को विश्वुरु या कुछ लोग ईरान को विश्व गुरु बताने की कोशिश कर रहे हैं। वो अपने आप को एक्सप्लेन भी नहीं कर पा रहे हैं कि इसमें पाकिस्तान को क्या फायदा हुआ है सिवाय इसके कि उसको कुछ पैसे या कुछ ऐड या कोई कुछ डोनेशन और मिल जाएगा। उससे ज्यादा कुछ होता हुआ नहीं दिख रहा है। इससे एक आतंकवादी देश की रेपुटेशन नहीं बढ़ने बढ़ने वाली है। वो खुद आतंक फैलाने वाला देश है और दूसरे आतंक फैलाने वाले ईरान को समर्थन के बचाव में खड़ा हुआ दिख रहा है। इससे ज्यादा इसका कोई मतलब नहीं निकाला जा सकता।
