तमिलनाडु की राजनीती में अन्नामलाई की क्या भूमिका
ऑल इंडिया अन्ना द मुनेत्र कड़गम AIDMK के जनरल सेक्रेटरी पलानीस्वामी से मुलाकात के दो दिन बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अन्ना मलाई को केंद्रीय नेतृत्व ने तलब किया है । अब पहले जो मुलाकात हुई है उससे तो यह बात साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी और अन्ना मलाई एक बार फिर तमिलनाडु में एलायंस चाहते हैं जिस तरह से DMK के नेता एम के स्टालिन उनका बेटा उदय निधि , एग्रेसिवली भारतीय जनता पार्टी और हिंदुत्व और हिंदी के खिलाफ कैंपेन चलाए हुएहैं उसके मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी का यह मानना है कि सबसे पहले तमिलनाडु से DMK को सरकार से हटाना ज्यादा जरूरी है जिस तरह की divided पॉलिटिक्स कर रहे उसका एक मात्र समाधान यह है कि वहां से सबसे पहले डीएमके को सत्ता से हटाया जाए उसके बाद आगे का क्या तरीका हो सकता है वह बाद में विचार होगा और इस पर लगभग सबकी सहमति बन रही है
अन्नामलाई के कारण ही BJP वोट शेयर 3 फीसदी से बढ़ 11 फीसदी पहुंचा
हालांकि अन्ना मलाई वहां पर किसी भी एलायंस के विरोध में रहे हैं बीजेपी के और इसीलिए बीजेपी नेतृत्व ने उनको बुलाया है कि अब वह इस पर नहीं बोले, उनको यह बता दिया गया है कि यह अलायंस होगा शर्तें हैं कुछ बातें हैं जिसको फाइनलाइज किया जाना है, लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण बात जो इसमें यह है कि वह अन्ना मलाई को यह मैसेज देने की कोशिश की गई है कि निश्चित तौर पर उनकी स्ट्रेटजी महत्त्वपूर्ण है और उसी स्ट्रेटजी का हिस्सा था कि बीजेपी वहां अपना वोट शेयर 3 फीसदी से बढ़ा कर के 11 फीसदी तक पहुंची है , आगे बढ़ने में टाइम लगे पर जिस जिस तरह की परिस्थितियां है उससे निपटना ज्यादा जरूरी है इसलिए अन्ना मलाई को तलब किया गया और उनसे इस तरह की उम्मीद उम्मीद नहीं उनको इस तरह का इंस्ट्रक्शन है कि अब इस मामले में AIDMK के जो नेता है उन पर कोई आक्रमण नहीं करेंगे उनको टारगेट नहीं करेंगे ,अमित शाह से मुलाकात के बाद यह डेवलपमेंट हुए हैं ।
अन्नामलाई से ली जाएगीं Power – तीन लोगों की बनेगी कमिटी
अब इसमें एक जो महत्त्वपूर्ण बात है कि बातचीत के दौरान कहीं यह बात नहीं निकल कर के आई कि अन्ना मलाई को अध्यक्ष के पद से हटाया जाए हां यह बात जरूर निकल करके आई है कि वहां पर एक तीन लोगों की एक स्टीयरिंग कमेटी बना दी जाए जो निर्णय करे प्रदेश के मामलो में निश्चित तौर पर केंद्र का जो नेतृत्व है वह सब पर नजर बनाकर रखता है गाइड करता रहता है लेकिन वहां पर जो स्टेट के उस पर फैसला हो वह एक तीन लोगों की स्टीयरिंग कमेटी या समिति करें अब चकि चुनाव बहुत ज्यादा दूर नहीं है 2026 में चुनाव होने हैं तो इसलिए उसके पहले इस तरह की तैयारियां करना बहुत जरूरी है अगर डीएमके को हराना है क्योंकि जयललिता के जाने के बाद से मतलब उनके स्वर्गवासी होने के बाद से कोई भी aidmk का कोई नेता इस तरह का नहीं उभर करके आया जो करिसमेटिक हो और जो वह स्टालिन के करिश्मा को काउंटर कर पाए तो अन्ना मतलब एआईडीएमके भी यही सोचती है भारतीय जनता पार्टी भी यही सोचती है कि दोनों को साथ मिलकर के ही लड़ने का फायदा है तभी वह डीएमके को हरा सकते हैं । AIDMK वो पुराने अपने पुराने प्रभाव को मद्देनजर रखते हुए इस बात पर भी नहीं अड़ा रहेगा कि उसको ही लीड रोल में रखा जाए और यह मामला बराबरी का या बीजेपी को एडवांटेज के तौर पर भी हो सकता है लेकिन फिर भी एक इस तरह की परिस्थिति है जहां पर बीजेपी और एआईडीएम के जो है वो एक इक्वल उस पर नंबर्स पर काम करें या इक्वल अथॉरिटी के साथ काम करें तो यह लगभग इस पर सहमति बन गई है तो उस दृष्टि से देखें तो अन्ना मलाई की भूमिका में बहुत ज्यादा अंतर नहीं पड़ेगा निश्चित तौर पर दो और नेता है एक एम राजा या डी राजा करके कोई है उनकी भूमिका है और एक और दो दो नेताओं की को और सक्रिय किया जा सकता है अन्यथा तमिलनाडु में और भी
बहुत सारे नेता हैं तो यह सारे के सारे लोग अब सक्रिय किए जा रहे हैं।
BJP और AIDMK हार मिली और मिला lesson था
पिछले दो चुनाव में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी या एआईडीएमके को हार का सामना करना पड़ा , बेज्जत होना पड़ा वो दोनों के लिए ही lesson था। एलायस के बाद 2021 के चुनाव में जो भाजपा और एआईडीएम का का अलायंस था उसको 23 33 पर के आसपास वोट मिले थे और डीएम के प्लस को लगभग 37 पर के आसपास मिले थे 24 में यह अंतर बढ़ गया 24 में डीएमके को लगभग 47 पर 4.97 पर वोट मिले थे मतलब डीएम के प्लस को जबकि एआईडीएम के प्लस को 23.5 23.5 और बीजेपी प्लस को 18.25 पर वोट मिले थे तो अगर इन परिस्थितियों को देखें और एआई डीएमके और बीजेपी का अलायंस एक साथ मिलता है तो डीएमके के लिए दो एंटी इनकंबेंसी है लोकसभा वाली और ये विधानसभा वाली उनके लिए मुश्किल होगा प्लस बीजेपी अपने हिंदुत्व वाली राजनीति के चक्कर में मतलब राजनीति के तहत बड़ी संख्या में तमिलनाडु के हिंदुत्व वोटर को इकट्ठा करने में कामयाब हो रहा है और अन्ना मलाई की सफलता यही है यह जो भाजपा का और एआईडीएम के का एलायंस है 2023 में टूटा था और उस एलायस के टूटने में अलाय से दूर होने में अन्नामलाई की की भूमिका थी इसलिए कि अन्ना मलाई इन प्रिंसिपल किसी भी तमिल जो द्रविड आइडेंटिटी वाली पॉलिटिकल पार्टी है उसके साथ नहीं जाना चाह रहे हैं लेकिन जिस तरह की राजनीति अभी की चल रही है तमिलनाड में उस दृष्टि से यह नया अलायंस मतलब पुराने अलायंस को एक रिवाइव करना जरूरी है और यह जो बातें शुरू हुई है पलानी स्वामी का दिल्ली आना इसमें दिल्ली नेतृत्व की भूमिका रही है इसलिए कि दिल्ली नेतृत्व में इसको ने इसको लेकर के उन पर दबाव डाला कि हमको एक बार फिर बैठना चाहिए अलायंस पर बात करना चाहिए इसलिए कि जो तीन बड़े मुद्दों पर हमने चर्चा की उसके अलावा जो डीलिमिटेशन का मामला है वो बहुत तेजी से उठने वाला है और न्यू एजुकेशन पॉलिसी को लेकर के जिस तरह से डीएमके के नेता स्टालिन और उनके सुपुत्र जो है वो बात कर रहे हैं वो नुकसान कर रहा है और बहुत एग्रेसिवली अपनी बात कर रहे हैं चाहे वो नॉर्थ इंडियन के खिलाफ हो चाहे एंटी हिंदी बात हो चाहे डीलिमिटेशन की बात हो न्यू एजुकेशन पॉलिसी की बात हो हिंदुत्व की बात हो ये सारी बातें वो कर रहे हैं और लगातार इस मामले को लेकर के अग्रेसिव है तो आने वाले दिनों में क्या सूरते हाल तमिलनाडु में होने वाले हैं वह निश्चित तौर पर बहुत इंटरेस्टिंग होने वाले हैं।