Congress leader Rahul Gandhi | PTI

CONGRESS का अजीबो-गरीब फंड़ा Rahul फिट हैं इसलिए PM के दावेदार

काफ़ी लंबे समय से कांग्रेस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर और उनके जो प्रवक्ता हैं , उनके मीडिया पैनलिस्ट हैं या जो कांग्रेस के समर्थक हैं वो लंबे समय से एक मुहिम चला रहे हैं कि अब भारत का प्रधानमंत्री राहुल गांधी को होना चाहिए और इसके लिए वो तरह तरह तरह के आर्गुममेंट्स दे रहे थे । यह पूरा का पूरा मामला 2024 के चुनाव के पहले भी था और अब चुनाव खत्म हो गया है, नरेंद्र मोदी की तीसरी पारी है उसका भी एक साल हो गया है और चार साल बाकी हैं पर बावजद इसके कांग्रेस का ये कैंपेन रुका नहीं है और कांग्रेस का सोशल मीडिया या उनका जो प्लेटफार्म है वह लगातार यह कैंपेन कर रहा है कि 2029 से पहले राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनना बन जाना चाहिए अब इसमें दो चीज है ये विशफुल थिंकिंग भी हो सकती है सहानुभूति इच्छा हो सकती है कि उनके नेता को प्रधानमंत्री बनना चाहिए लेकिन अभी कम से कम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से मजबूती के साथ सरकार में हैं उसको देखकर के ऐसा होता लग नहीं रहा, पर राहुल गांधी के फिटनेस को लेकर के जो अभी आर्गुमेंट नया चल रहा है कि राहुल गांधी फिजिकली इतना फिट है इतना मजबूत है कि उनको प्रधानमंत्री होना चाहिए। क्या यह तर्क कि कोई व्यक्ति फिजिकली फिट है तो वह प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त है, यह तर्क कहीं से डेमोक्रेसी के लिए या किसी पॉलिटिकल पार्टी के लिए किसी नेता के लिए फिट होता है क्या फिजिकली फिट होना किसी व्यक्ति के लिए प्रधानमंत्री बनने का क्राइटेरिया हो सकता है ।

Congress में क्यों बनाए गए अनफिट PM

दो तरह से देखने की जरूरत है। क्या congress में ही जो नेता राहुल गांधी से ज्यादा फिजिकली फिट हैं वह प्रधानमंत्री पद के लिए ज्यादा दावेदार नहीं है दूसरा या congress में जो नेता pm , फिजिकली फिट नहीं थे तो उनको क्यों प्रधानमंत्री बनाया गया और कांग्रेस ने ही क्यों प्रधानमंत्री बनाया. वैसे आजकल राहुल गांधी का जो चित्र दिखता है कि वह बैडमिंटन खेलते हुए नजर आते हैं वो जिम में एक्सरसाइज वर्कआउट करते हुए नजर आते हैं जहां पर डंबल्स पर उनके उनको दिखाया जाता है कि वो कितना फिजिकली वो दौड़ते हुए दिखते हैं स्प्रिंट लगाते हुए दिखते हैं भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्होंने एक लंबी दौड़ लगा करके दिखाई थी अपने साथ के लोगों को पीछे छोड़ दिया था मतलब यह जो एक्सरसाइज़ करते हुए बैडमिंटन खेलते हुए और जो भी फिजिकली आदमी को मजबूत दिखाता है वो सब करते हुए दिखाए गए हैं सोशल मीडिया पर लगातार उनके तस्वीरें डाली जाती हैं और एक अभियान शुरू किया गया है कि pm के लिए राहुल fit , तो क्या डेमोक्रेसी ऐसे ही चलती है, पर अगर देखा जाए तो मनमोहन सिंह सबसे ज्यादा फिजिकली कमजोर दिखने वाले प्रधानमंत्री थे लाल बहादुर शास्त्री तो कद काठी से भी बहुत कमजोर थे लेकिन 65 की लड़ाई जिस तरह से उन्होंने जीती वो शानदार रहा। अब चाहे मनमोहन सिंह की बात हो मनमोहन सिंह को तो इन्ह की माता जी ने सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए आगे किया था लाल बहादुर शास्त्री पुरानी बात है तो माना जा सकता है कि तब राहुल नहीं थे, कांग्रेस में तो उसको किसी ने भी लाल बहादुर शास्त्री जी को चुन लिया तो लेकिन मनमोहन सिंह तो राहुल गांधी का इरा था उस इरा में उनको प्रधानमंत्री चुना गया तो क्या यह क्राइटेरिया हो सकता है या वो प्रधानमंत्री बनेगा जिसको इस देश की जनता का समर्थन प्राप्त होगा वो कमजोर भी हो सकता है फिजिकली वह गरीब भी हो सकता है वह किसी गांधी परिवार का सदस्य नहीं हो सकता है

Congress 24 घंटे खबरों में बने रहने की बड़ी रणनीती

लेकिन ये अचानक कांग्रेस ऐसा क्यों कर रही है क्यों कांग्रेस को लग रहा है कि इस तरह की चीजें करने से कांग्रेस को फायदा होगा क्या इसके पीछे मंशा यह है कि सरकार जो भी बात कहना चाह रही है या करना चाह रही है उसके नरेटिव से पहले एक अपना नैरेटिव दिया जाना चाहिए और दिन भर हमेशा 24 घंटे खबरों में बने रहना चाहिए अब एक निश्चित तौर पर कांग्रेस ने एक नई रणनीति तैयार की है उस रणनीति के तहत वो एक नैरेटिव बनाती है उस नैरेटिव को एक दिन चला करके अगले दिन दूसरे नैरेटिव के लिए आगे आ जाती है तो क्या ये उस तरह का नैरेटिव है कि कुछ दिन एक नैरेटिव को चलाओ जैसे जब अप्रैल में आतंकवादी हमला हुआ था तो ये बोला गया था कि सरकार कुछ कर नहीं रही हैसरकार बैठी हुई है अस्थिर है सरकार कब 56 इंच का सीना दिखाएगी उसके बाद बहुत सारे नैरेटिव बदले कि जब आक्रमण किए तो वार का टाइम नहीं है हमको सीज फायर में जाना चाहिए फिर जब सीज फायर हो गया तो हम पीओके यहां कब्जा कर सकते थे वह कब्जा क्यों नहीं किया गया इस इस तरह की उसके बाद फिर जिस तरह से विदेश मंत्री के खिलाफ आक्रमण हुआ तो एक ये आक्रमण करने की एक नई स्ट्रेटजी बनी है उस स्ट्रेटजी के पीछे कोई तर्क नहीं है वो कितने देर स्टैंड करेगी कितना दिन चलेगी कितना उसका लाभ मिलेगा इस पर बिना विचार किए हुए एक कोई नैरेटिव बनाया जाता है उस नरेटिव को बमबार्ट किया जाता है उस नैरेटिव को लगातार फैलाया जाता है आजकल तो सारा का सारा खेल सोशल मीडिया पर हो रहा है सारी की सारा का सारा जो प्रचार तंत्र है  वो सोशल मीडिया पर हो रहा है अब इसमें इसमें बार-बार जो है वह घूम फिर करके राहुल गांधी को केंद्र में रख के यह सब करने की कोशिश की जा रही है लेकिन मुश्किल यह है कि वो हर बार जो है वो फेल हो जाते हैं अपने ही योजनाओं में फंस जाते हैं।

क्या युवा Rahul की Fitness से प्रभावित है

उन्होंने अपने ही नेताओं को शशि थरूर को सलमान खुर्शीद को और मनीष तिवारी को जो डेलीगेशन बाहर गया है उस पर खरीखोटी सुनाई इसमें भी वो एक्सपोज हुए तो ये इस तरह के हैं उस पर वो सरकार वो एक्सपोज होते हुए नजर आए वैसे ही जैसा मैंने कहा कि क्या किसी के मसल्स बहुत अच्छे हैं किसी के बाईसेप्स अगर बहुत अच्छे हैं तो वो प्रधानमंत्री पद का बेहतर दावेदार होता है अगर जनता कर जनता की राय भी इस पर पूछी जाएगी और जनता के सामने जब इस तरह की बात की जाएगी या ये युवाओं को एक मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कितना परसेंट युवा करता है यह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है।

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