GST में बदलाव क्या Bihar  में जीत का रास्ता आसान

बिहार चुनाव से पहले हुए एक नया चुनावी नारा सामने आ गया है  GST impact on Bihar यानी इस  बदलाव का बिहार पर असर। जैसा की सबको पता है कि नए GST के तहत जीएसटी में अब केवल दो स्लैब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत रह गए हैं। माना यही जा रहा है कि इससे  हेल्थ इंश्योरेंस, बाइक, फ्रीज और घरेलू काम की कई चीजें सस्ती होंगी जो  बिहार की जनता पर असर डालेंगी और NDA का पाला मजबूत करेंगी , चलिए इसे समझते हैं  जीएसटी बिल को लेकर छोटे व्यापारियों में बीजेपी से काफी नाराजगी थी लेकिन जीएसटी की दो स्लैब करने से  छोटे और बीच के  कारोबारियों पर टैक्स का का बोझ कम हो सकता है और  बिहार में बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी एनडीए के पाले में आ सकते हैं। दूसरा इससे महंगाई कम होने की बात की जा रही है कुछ आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स घटने से उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलेगी और बिहार में  विपक्ष का  महंगाई का  मुद्दा एक तरह से चुनाव से पहले छिन जाएगा। बिहार के गांवों में रोज़गार, शिक्षा और कृषि  मुद्दे ज्यादा हावी रहते हैं  लेकिन माना जा रहा है कि जीएसटी में बदलाव शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले वोटर्स को एनडीए से जोड़ेगा। कुल मिलाकर बीजेपी चाणक्य ने GST बदलाव के रूप में बिहार की जनता को लुभाने के लिए जबरदस्त तुरूप का इक्का फैंक दिया है जो NDA के जीत के रास्ते को आसान कर सकता है।

Bihar —राहुल  की यात्रा  तेजस्वी-लालू पर भी भारी 

राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद जैसे की ये बात छनछन कर सामने आ रही है कि नीतीश , बीजेपी से ज्यादा यह यात्रा कहीं RJD पर भारी ना पड़ जाए, बिहार में नंबर एक विपक्ष बनने की चाह तो कांग्रेस पहले ही सामने ला चुकी है और अब इस यात्रा की सफलता से पता चला है कि कांग्रेस ने सीटों के लिए भी एक लंबी लिस्ट तैयार कर ली है, जहां पहले कांग्रेस 70 सीटों की बात कर रही थी अब सुनने में आ रहा है कि  कांग्रेस ने  105 सीटों की लिस्ट RJD को थमा दी है और यही नहीं जिन इलाकों में  कांग्रेस मजबूत है ,उसमें उन सीटों को पाने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। राहुल गांधी की यात्रा के बाद ही कांग्रेस ने परिहार और सीतामढ़ी विधानसभा सीट पर अपना दावा ठोक दिया है जहां RJD के उम्मीदवार लगातार लड़ते आए हैं। आपको बता दें कि पिछली बार RJD  ने सीट बंटवारे के समय कांग्रेस को लगभग तीन दर्जन ऐसी सीटें दे दी थी  जहां RJD पिछले पिछले तीन-चार चुनावों से हार रही थी,यहां  कांग्रेस की  हार स्वाभाविक थी। लेकिन इस बार कांग्रेस सीटों को लेकर कहीं से भी compromise करने को तैयार नहीं है, हो सकता है कांग्रेस अपनी मांग से थोड़ी कम सीटों पर मान जाए पर इस बार वो लड़ने के लिए अपनी मनपसंद सीटे ही लेगी और इसी को लेकर RJD के साथ उसका अंदर ही अंदर घमासान भी चल रहा है।

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