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जो चीजें अमेरिका से आएंगी उस पर जीरो ड्यूटी होगी या बहुत कम ड्यूटी होगी? जो देश से वहां जाएगी उसपर 18% डूयूटी लगेगी। उसके बावजूद अमेरिकन इंडियन डील बहुत फायदेमंद क्यों मानी जा रही है, इसी पर चर्चा की Former Major General P K Seighal से

 

Ques-लोग को समझ में नहीं आ रहा कि एक्सैक्टली ये डील क्या है? 18 फीसदी टैरिफ के साथ ये भी चर्चा है कि इसमें फार्मा सेक्टर है, एग्रीकल्चर सेक्टर को इंक्लूड किया जा रह है। तो किस तरह से आप मानते हैं कि डील अच्छी है

Ans—— हिंदुस्तान के लिए डील बड़ी फायदेमंद है। पिछले 10 महीने से हिंदुस्तान को बहुत नुकसान हु था। स्टॉक मार्केट जो है एक किस्म से अनस्टेबल थी रूपया, डॉलर के मुकाबले गिरता जा रहा था। फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टर्स थे वो इक्विटी में से अपना पैसा निकालते जा रह थे, बहुत बड़े पैमाने पर हमारे उपर जबरदस्त प्रेशर था, साथ हमारा जो एक्सपोर्ट था अमेरिका को ऑलमोस्ट काफी कम हो गया था। बड़े पैमान पे हमारे जो टेक्सटाइल वाले थे और जो फि थी खास करके जो साड़ी भेजते हैं उनको काफ नुकसान था। ऐसे में 18% टैरिफ लगाने के बाद भी हिंदुस्तान के लिए बहुत फायदेमंद है। फायदे पांच छह तरीके के हुए हैं। सबसे पहले हमारे स्टॉक मार्केट में नुकसान हुआ था वो लोगों ने देखा है दूसरा हमारा जो रुपी वर्सेस डॉलर उसमे स्ट्रेंथन हो गया करीबन 124 पैसे का। तीसरा बड़े पैमाने पर पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम, इंडोनेशिया जो हमारे कंपटिटर्स थे उनको झटका लगा है। क्योंकि हमारे कंपैटिटर्स पर टैरिफ बहुत ज्यादा लगा हुआ है, चाइना पर 37% है, पाकिस्तान के लिए 19% है। बांग्लादेश के लिए 19% है। इंडोनेशिया वियतनाम के ऊपर 20% है। सो कंपैरेटिव टैरिफ जो हमारे ऊपर काफी कम है। इसके बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोदी ने हमसे चार पांच चीजें एक्सेप्ट की है। सबसे पहले उसने कहा है कि प्राइम मिनिस्टर मोदी ने एक्सेप्ट किया कि वो रशिया से नहीं खरीदेंगे। जी दूसरा उन्होंने ये भी कहा है कि वो अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का नया नया सामान खरीदेंगे। तीसरा उन्होंने कहा है कि उनसे जो सामान खरीदा जाएगा उसमें टेक्नोलॉजी है एयरक्राफ्ट एयरक्राफ्ट है और साथ में कहा है एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स भी जी और चौथा उन्होंने कहा है कि जहां तक हिंदुस्तान का ताल्लुक है हिंदुस्तान अमेरिका के ऊपर टेरेस या नॉन टेरेस जीरो% लगाएगा , अब ध्यान देने वाली बात ये है कि हमारे प्राइम मिनिस्टर ने अपने Social media पर ट्रंप की बात का किसी भी प्रकार का जिक्र नहीं किया एकनॉलेज नहीं किया, मतलब ट्रंप जो बोल रहे हैं। हमारे पीएम ने उसको एक्नॉलेज नहीं किया है। हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि 1.4 बिलियन लोगों की तरफ से मैं आपको धन्यवाद करता हूं कि आपने हमारा 50% से 18% टैरिफ कर दिया। दूसरा उन्होंने कहा कि मैं बड़ा खुश हूं कि आप दुनिया में बड़ा काम कर रहे हैं शांति लाने के लिए। इसके लिए मैं हर प्रकार से आपको सहायता देने के लिए तैयार हूं। यहां साफ हो जाता है कि जहां तक हिंदुस्तान का ताल्लुक है हिंदुस्तान किसी भी हाल में अपनी स्ट्रेटेजिक एटमी को कॉम्प्रोमाइज नहीं करेगा। अपनी इकोनमिक इंडिपेंडेंस को या हमारी एनर्जी सिक्योरिटी को कॉम्प्रोमाइज नहीं करेगा। हिंदुस्तान ने एक बारी नहीं अनेकों बारी कहा है कि जो हिंदुस्तान के हित में है जो हमारे फायदे में है हम उसी से तेल खरीदेंगे और अगर रशिया से तेल सस्ता दाम पे मिल रहा है तो हिंदुस्तान जो है खरीदता रहेगा हमारी फॉरेन पॉलिसी जो है वो मेक इन अमेरिका नहीं होगी वो मेक इन इंडिया होगी दूसरा हिंदुस्तान ने साफ तौर पे कहा है और पीयूष गोयल ने राज्यसभा और लोकसभा में भी दोहराया बार-बार कि हिंदुस्तान ने किसी प्रकार से कॉम्प्रोमाइज नहीं किया जहां तक फार्मर्स का इंटरेस्ट है फिशरमैन का इंटरेस्ट है या डेरी फार्मर्स का इंटरेस्ट है। अमेरिका जरूर कह रहा है ट्रंप जो है उसकी क्रेडिबिलिटी ऑलमोस्ट निल के बराबर है। अगर देखो ट्रंप ने कम से कम 100 बारी कहा है अनेकों फोरम पे कि हिंदुस्तान और पाकिस्तान जो दोनों न्यूक्लियर नेशंस है उनके बीच में जब लड़ाई हुई ऑपरेशन सिंदूर, तो सीजफायकर उनन्होंने करवाया, जबकि हिंदुस्तान ने साफ तौर पर कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ।

 

Ques—डील में फार्मा और एग्रीकल्चर शामिल हैं, एक तरह का भ्रम फैलाया जा रहा है क्या लोगों की समझ में ये बात आ रही है कि उन्हें कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं।

Ans—— हिंदुस्तान की एक बदकिस्मत है कि हमारी जो अपोजिशन है वो हमेशा ही हर डील का फायदा उठाना चाहती है। अपोजिशन के समय किसी प्रकार का कोई डील नहीं हुआ। जब तक जब से प्रधानमंत्री मोदी आए हैं नौ देशों के साथ में हमारे एफडीए साइन हुए और 20 देशों के साथ बातचीत और हो रही है। हाल ही में यूरोपियन यूनियन से जो बात हुई उससे अमेरिका घबरा गया और अमेरिका को साफ तौर पर नजर आना शुरू हुआ कि हिंदुस्तान जो दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है सबसे बड़ी डेमोक्रेसी शक्ति है वो आहिस्ते आहिस्ते उनसे अलग हो रही है। और यही नहीं हिंदुस्तान और चाइना जो है कुछ हद तक नजदीक आ रही है। वो भी अमेरिका को चुभ रहा था। यही नहीं अमेरिका के अंदर ही बहुत बड़े पैमाने पर ट्रंप से कहाजा रहा था कि जो उन्होंने हिंदुस्तान के साथ कारवाई की है वो दुरुस्त नहीं है।इसमें ज्यादा सफर जो है अमेरिका की कंज्यूमर है ना कि हिंदुस्तान का हिंदुस्तान की इकॉनमी उसके बावजूद भी बढ़ती हुई है। हिंदुस्तान का एक्सपोर्ट फिर भी बढ़ता रहे ।मोदी जी की चुपी है इस बी यूज्ड एस ए टूल और मैं तो कहूंगा इट इज़ इंडिकेटिव ऑफ़ इंडिया मैच्योरिटी 10 महीने तक हिंदुस्तान ने चुप्पी ठाड़ी रही और अगर इस समय साफ तौर पे अगर हिंदुस्तान कहे या हमारे प्रधानमंत्री कहे या हमारे एक्सटर्न मिनिस्टर कहे या पीयूष गोयल कहे कि ट्रंप जो बोल रहे हैं गलत बोल रहे हैं तो कोई फायदा नहीं होगा उसका तो ट्रंप जो है डील को रद्द कर देंगे अगर आप देखो उन्होंने साउथ कोरिया को 50% से 15% किया और फिर उसके बाद में उसकेदोबारा 25% कर दिया। ये कहकर कि उनके पार्लियामेंट ने सात दिन हो गए हैं डील को अभी तक एक्सेप्ट नहीं किया। वो हिंदुस्तान के साथ भी ऐसा कर सकते हैं। आज अगर आप देखो हमारे कॉमर्स मिनिस्टर ने साफ तौर पे कहा है कि जो डील जो है जिसको फाइन प्रिंट है ये कम से कम मिड मिड से मार्च से पहले नहीं होने वाला। यानी बहुत बड़े पैमाने पर अभी भी काफी समस्या हैं। लेकिन ट्रंप को साफ तौर पे नजर आ रहा है कि भारत से खराब रिलेशन उनके फायदे में नहीं है। उनके हित में नहीं है। खास करके ये रखता हूं कि नवंबर में मिड टर्म इलेक्शंस है और वो ट्रंप के लिए भारी पड़ सकते हैं। यहां पे एक बात और आ रही है जैसे मोदी जी बहुत बड़े डिप्लोमेट है और आपने कहा कि 10 महीने तक साइलेंस रखा और सब मान रहे हैं कि साइलेंस रख के उन्होंने जंग जीत लिया।

Ques—आपको लगता है कि ट्रंप भी बहुत बड़े डिप्लोमेट आए। अपनी देश में नवंबर में इलेक्शन भी होने वाले हैं। वहां पर वो दिखा रहे हैं कि इंडिया पे हमने पूरा प्रेशर बना लिया है। वहां पे वो इस तरह का प्रोपोगेंडा हो रहा है, प्रचार हो रहा है कि फार्मा सेक्टर भी आगया है। एग्रीकल्चर भी हम करेंगे। हमने जो हमारी जो हम वहां से भेजेंगे इंडिया उसमें जीरो ड्यूटी होगी। इस तरह की बातें वो कर रहे हैं। तो ट्रंप भी एक तरह से आपको लगता है डिप्लोमेटिकली पूरे इस डील को ले रहे
हैं।

Ans—ट्रंप की पूरी कोशिश है कि ऐसी डील साइन की जाए जो अमेरिका के हो। ट्रंप तो बेसिकली एक्सपर्ट है इस डील मेकिंग में। लेकिन हिंदुस्तान किसी प्रकार से अपने जो प्रिंसिपल कारण है उनको कॉम्प्रोमाइज नहीं करेगा। हिंदुस्तान ने बार-बार एक बार नहीं बार-बार दोहराया है कि अब रशिया के साथ किसी प्रकार से अपने रिश्ते नाते बिगाड़ेंगे नहीं। हम तेल उसी से खरीदेंगे जो हमसे सस्ते दाम में देगा। अभी हमने टेल एनर्जी सिक्योरिटी को कायम रखते हुए 42 देश हैं जिनसे हम ऑयल इंपोर्ट कर रहे हैं। हमने कहा अमेरिका से ज्यादा ले लेंगे वेनेजुला से लेकिन ये नहीं कहा कि हम रशिया से नहीं लेंगे। देखो हिंदुस्तान साफ तो कह रहे हैं हमारे एमएसएम को बहुत फायदा होगा। हमारे जो रिटेलर्स हैं खास करके जो टेक्सटाइल इंडस्ट्री वाले जो ऑटोमोटिव पार्ट्स स्पेयर पार्ट्स बनाते हैं और फार्मा वाले हैं उनको बड़ा फायदा होगा

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