karnakta —उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार पढ़ी दो लाइन Rahul क्यों गुस्साए

कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने असेंबली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ rss की प्रार्थना बोली , जिसको हमें अंग्रेजी में लोग आरएसएस का एंथम कह रहे हैं। शाखा जब लगती है डिस्पर्स होने के पहले गाया जाता है। जब भी जहां भी जैसे गैदरिंग होती है। शिवकुमार ने दो लाइन पढ़ी नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि तया सुखम व , इसको लेकर के पूरे कांग्रेस में बवाल हो गया और उनकी आलोचना होने लगी। अल्टीमेटली डी के शिवकुमार को माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने बोला कि अगर इससे किसी को दुख हुआ हो तो मैं माफी मांगने के लिए तैयार हूं। उसके अलावा उन्होंने जो महत्वपूर्ण बात कही वो यह कि मैं एक पैदाइशी कांग्रेसी हूं और मरूंगा भी। कांग्रेसी और मेरे लिए गांधी परिवार के साथ लॉयल्टी या गांधी परिवार के प्रति मेरा जो विश्वास है वो नकंडीशनल है। गांधी परिवार मेरे लिए भगवान की तरह से है। अब इससे ज्यादा कोई क्या कह सकता है कि किसी की बात करने कुछ पढ़ने पर गांधी परिवार नाराज हो जाता है और उसको खुश करने के लिए इस तरह की बात करनी पड़ती है क्योंकि राहुल गांधी संघ को लेकर के बहुत कटु रहते हैं और संघ को भला बुरा वो लगातार कहते रहते हैं।

 क्या बांग्लादेशी घुसपैठियों की वकालत कर सैयदा हमीद Congress को कर रही खुश


सैयदा हमीद योजना आयोग की सदस्य रही हैं। उसके अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय में रही हैं। उसके अलावा वो एक उर्दू विश्वविद्यालय जो हैदराबाद में है उसकी चांसलर रही हैं। उन्होंने एक दावा किया है कि जो भारत में रहने वाले बांग्लादेशी हैं उनके साथ मानवीयता का व्यवहार करना चाहिए। वह भी मतलब ह्यूमैनिटी के कारण उनको यहां से भगाना नहीं चाहिए। यह जो पूरा का पूरा जो लैंड है वो अल्लाह को बिलोंग करता है। तो क्या किसी एक ऐसे जिम्मेदार व्यक्ति से इस तरह के स्टेटमेंट की उम्मीद की जा सकती है कि कोई दूसरे देश का नागरिक आकर के भारत के संसाधनों पर कब्जा करे। भारत के लोगों का एंप्लॉयमेंट खा जाए। जमीन खा जाए। इंफ्रास्ट्रक्चर पर कब्जा कर कब्जा बनाकर रखें। क्या यह किसी भी दृष्टि से उचित है? लेकिन इसमें दो बातें कही जा रही है। पहली ये कि ये उनका अपना जो इस्लामिक एजेंडा है वो हो सकता है और दूसरा ये बात उन्होंने जो गांधी परिवार है उसके बहस्त पर कहा हो। क्योंकि गांधी परिवार का भी आईडियोलॉजी इसी तरह से है। वो लोग भी शरणार्थियों को शरणार्थी नहीं घुसपैठियों को भारत से निकाले जाने के विरोध में हैं। तो ये सैयद सैयदा सैयदन हामी हमीद के बात को की बात के माध्यम से कांग्रेस अपनी बात कहने की कोशिश कर रही है जो बहुत ही खतरनाक है। ये बेहद खतरनाक बयान है और ये देश के खिलाफ बयान है। इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये जो घुसपैठिए हैं ये इंटरनल अग्रेशन की तरफ तरह से हैं और इस बात को सैयदा नकार रही हैं। ये बहुत खतरनाक स्थिति है। ये देशद्रोह जैसा मामला
है।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।