Maharashtra — अब नेताओं पर मजाक भारी पड़ सकते हैं

नेता हो या अभिनेता या फिर कमेडियन आजकल देश में यह फैशन बनता जा रहा है कि इस पेशे से जुड़े लोग बडी आसानी से दूसरे लोगों पर, नेताओं, पार्टी के कामकाज पर बेतुके बयान दे देते हैं , कमेडी के नाम पर भद्दी, अपमानजनक टिप्पणी कर देते हैं और अगर बायचांस बात बिगड़ जाए तो माफी मांग लेंगे या कह देगे कि भई मैं तो मजाक कर रहा था, अब मुंबई में कॉमेडिन कुणाल कामरा को इस तरह का मजाक करना भाऱी भी पड गया , एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने कॉमेडियन के खिलाफ जबरदस्त माेर्चा खोल दिया , वहीं बीजेपी भी कहां पीछे हटने वाली थी उनके नेताओं ने भी लोगों से अपने कार्यकर्ताओं से कुणाल कामरा के चेहरे पर कालिख पाेतने की अपील कर दी । आपको बताते हैं कि माजरा क्या है दरअसल कुणाल ने महाराष्ट्र की राजनीति और एकनाथ शिंदे के शिवसेना से अलग होने को लेकर एक पैरोडी गीत बनाया है। चाहे इस गीत में उन्होंने शिंदे का नाम नहीं लिया पर गद्दार शब्द का इस्तेमाल किया है और जैसा की सब जानते हैं कि उद्धव ठाकरे गुट , एकनाथ शिंदे पर गद्दार शब्द का इस्तेमाल करके ही लगातार हमले कर रहा है बस फिर किया था जहां पर कुणाल का कार्यक्रम हुआ वहां पर तोड़फोड़ कर दी गई और शिंदे सैनिकों ने कुणाल कामरा पर पुलिस कार्रवाई की भी मांग की है। अब जैसा की होता आया है कुणाल ग्रुप की तरफ से कहना शुरू कर दिया गया कि यह तो सब एक जोक है यानी मजाक है, पर समझना तो यही है कि freedom of speech के नाम पर किसी का अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता है।

 

नीतीश का यह दांव भौचक्के रह गए लालू-तेजस्वी

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले छोटी बडी हर पार्टी जनता को लुभाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है क्योकिं इस बार बिहार चुनाव कुछ हटकर, चुनौती भरे होने वाले हैं । बिहार नें चुनाव में बीजेपी और JDU के लिए सिर्फ RJD बड़ी चुनौती नहीं है बल्कि बिहार में बरसों से साइड लाइन हुई कांग्रेस चुनावों के लिए बहुत ज्यादा एक्टिव हो गई है , साथ ही प्रशांत किशोर की नई नवेली पार्टी ने भी सरकार के सामने कई चुनौतियां डाली हुई है और इसकी सबसे ज्यादा चिंता नीतीश कुमार को सताती दिख रही हैं और यही कारण है वो ना केवल बहुत ज्यादा एक्टिव हो गए हैं बल्कि अपने बेटे को राजीती में उतारने के लिए भी कमर कस ली है। और अब सीएम नीतीश कुमार ने बिहार के वोटरों को लुभाने के लिए एक और दांव फेंका है और कर दिया है इफ्तार पार्टी का आयोजन। माना जा रहा है कि इसके जरिए नीतीश यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अब भी मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग उनके साथ है और उनकी पार्टी अल्पसंख्यकों की कद्रा करती है। वैसे आपको बता दें कि इस पार्टी का 7 मुस्लिम संगठनों ने बॉयकॉट किया था पर बावजूद इसके नीतीश की पार्टी में बड़ी संख्या में मुसिल्म समाज के नेता पहुंचे । नीतीश ने इस पार्टी के जरिए RJD के एमवाई समीकरण यानी मुसिलम् यादव को चुनौती देने की कोशिश की है।

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