अपनी बेटी सुप्रिया सुले के लिए  शरद पवार क्या जाएंगे NDA में

महाराष्ट्र के चुनाव हो गए वहां पर महायुति की सरकार बन गई है और महाविकास आघाडी के तीनों घटक आपस में ही तालमेल के अभाव में नजर आ रहे हैं ,लेकिन इस बीच एक बड़ा डेवलपमेंट हुआ है। वह  है कि जो महाविकास आघाड़ी का एक घटक है राष्ट्रवाद नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी यानी शरद पवार की पार्टी।   शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सूले जो बारामती से लोकसभा सांसद हैं उन्होंने बातचीत में मीडिया से बातचीत के दौरान देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की है । देवेंद्र फडणवीस की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि वह ही काम कर हैं और मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।  मैं तो चाहूंगी कि वह महाराष्ट्र के लोगों के कल्याण के लिए काम करते रहे और सरकार को इस तरह से काम करना चाहिए।  और देवेंद्र फडणवीस की तारीफ में उन्होंने काफी कुछ बातें कही।

 शरद पवार ने हमेशा कम MLA  के साथ भी मुख्यमंत्री पद संभाला 

 तो यह कयास चुनाव के पहले से भी लगाए जा रहे थे और चुनाव के बाद भी लगाए जा रहे थे कि शरद पवार की आखिरी अब इच्छा यह है कि वह किसी तरह से अपनी पुत्री को स्थापित कर दे। उनके दायरे में जो था वो उन्होंने ऑलरेडी कर दिया । उनके दायरे में था कि अपनी बेटी को किसी तरह से सांसद बना दे और वह सांसद उन्होंने एक बार से ज्यादा दो बार तीसरी बार भी उनको बना दिया और वह चुनाव जीत करके लोकसभा में हैं।  लेकिन जब तक किसी भी व्यक्ति को सरकार में सरकार में काम करने का अनुभव नहीं हो तब तक उसको स्थापित पूरी तरह से नहीं माना जाता है और शरद पवार तो इस बात के लिए जाने जाते हैं कि उन्होंने हमेशा कम लोगों के साथ चाहे 40 एमए ले रहे हो चाहे 50 एमले रहे हों,  इस तरह के नंबर के साथ मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला है । यह देखा गया कि चुनाव कन्विंसिंग के दौरान वह किसी  के खिलाफ नहीं बोल रहे थे । उनको यह लग रहा था कि शायद कभी इस तरह की स्थिति आ जाए जहां बीजेपी तो मान लीजिए सबसे बड़ा राजनीतिक दल हो जाए लेकिन ऐसी स्थिति आ जाए कि बाकी दोनों जो महायुति के घटक हैं उनकी मदद की जरूरत पड़े तो उनको भी साथ लेकर के सुप्रिया सूले को मुख्यमंत्री महाराष्ट्र का बनाया जाए और उनको स्थापित किया जाए। पर  वो हुआ नहीं बीजेपी ने क्लीन  स्वीप कर दिया महायुति ने क्लीन स्वीप कर दिया और शरद पवार के पूरे गेम प्लान को पूरी तरह से डिमोलिश कर दिया ।

अपनी  बेटी को स्थापित करने के लिए  केंद्र में  मंत्री बनाने का सपना

अब शरद पवार के पास क्या चारा है, अब शरद पवार के पास सिर्फ एक चारा है अपनी बेटी को स्थापित करने के लिए कि किसी तरह से वह केंद्र में उनको मंत्री बनाया जाए अब इसके लिए क्या हो सकता है इसके लिए कई तरीके हो सकते हैं । पहला यह कि बहुत सारे विषयों पर भारतीय जनता पार्टी को चूंकि उनका नंबर कम है समर्थन की जरूरत है तो शरद पवार केंद्र सरकार को समर्थन दें।  उनके नौ एमपी है ,लोकसभा में ।  दूसरा तरीका यह है कि वह सीधे-सीधे समर्थन करते हुए पार्टी मतलब सरकार के समर्थन में आ जाए और इस शर्त पर आए कि उनकी बेटी को मंत्री बनाया जाए अब इसी कड़ी का एक हिस्सा यह है कि शरद पवार ने संघ की तारीफ की है।  उन्होंने  कहा की जो पूरा का पूरा चुनाव हुआ है विधानसभा का उस विधानसभा के चुनाव में संघ की बड़ी भमिका थी, महायुति के चुनाव जीतने में संघ ने जी तोड़ मेहनत की और उस जी तोड़ मेहनत का नतीजा है कि वहां पर भारतीय जनता पार्टी और महायुति की सरकार बनी । अब इन सारी चीजों को उसी दिशा में देखा जा रहा है कि शरद पवार इस कोशिश में है कि किसी तरह से सुप्रिया सूले को सरकार में कोई असाइनमेंट  मिले । इसको कहते हैं आइस ब्रेक करना
संबंधों को सुधारने का और और इस मामले में इस काम में शरद पवार की महारत है । शरद पवार यह करते रहे हैं दूसरा यह कि जिस तरह की पर्सनालिटी शरद पवार की है उस तरह की पर्सनालिटी या उस तरह काइंडिपेंडेंट थिंकिंग या उस तरह का जोराजनीति खोजता है वैसा सुप्रिया सूले की नहीं है।  जब शरद पवार का पूरे प्रदेश में प्रभाव नहीं था तो सुप्रिया सूले का क्या होगा। यह सबको मालूम  की शरद पवार हमेशा से ही माइनॉरिटी सरकार चलाते रहे हैं, उनकी पार्टी कभी भी पूरे प्रदेश में चुनाव जीत करके नहीं आई तो व साढ़े तीन जिलों के नेता हैं तो उन परिस्थिति में जब शरद पवार पूरे प्रदेश के नेता नहीं बन पाए तो क्या सुप्रिया सूले के लिए संभव होगा कि वह पूरे प्रदेश में अपना प्रभाव एनसीपी का प्रभाव बढ़ा पाए जो खुद पिता की स्किल्स पर निर्भर रहती हैं उनपरिस्थितियों में चारा क्या है ।

अजीत पवार की पार्टी के  साथ मर्ज हो सकते हैं शरद पवार

 अभी जिस तरह से अजीत पवार को चुनावी सफलता मिली है तो निश्चित तौर पर वह ना केवल उत्साहित होंगे बल्कि उनका यह मानना है कि वही बड़े नेता हैं और चुनाव आयोग ने भी उन्हीं को वास्तविक नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी माना है अब इन परिस्थितियों में दो तीन चीजें निकल कर के आ रही हैं। पहला तो यह कि दोनों राजनीतिक दल दोनों जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के घटक है दोनों मर्ज हो जाए और मर्ज होने के बाद चूंकि इस दल का समर्थन केंद्र में है तो शरद पवार को  भी केंद्र का समर्थन हो जाएगा।  तो जो एमएलए हैं वो अभी तो दूसरे अजीत पवार का सिर्फ एक एमपी जीत के आया है दूसरी तरफ इनके आठ नौ एमएलए हैं शरद पवार वाले राष्ट्रीय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तो अगर मर्ज हो जाते हैं तो अपने आप वो एनडीए घटक का हिस्सा हो जाएंगे । जब उनके पास नौ एमपी हो जाएंगे लोकसभा में तो मंत्री एक से ज्यादा मंत्री पद की दावेदारी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की बन जाएगी ये कुल मिलाकर के जिसको कहते हैं ना बेट डालना वो  शरद पवार ने और सुप्रिया सुले ने शुरू कर दिया है क्या डेवलपमेंट होती है यह आने वाले समय में पता चलेगा।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।