Maharashtra – क्या जल्दी होने वाला सरकार में आया राम-गया राम

महाराष्ट्र की राजनीती में जबरदस्त उठापठक शुरू हो गई है, एक तरफ हाल ही में उद्वव ठाकरे और फणडवीस की मुलाकात से चर्चाएं चल रहीं हैं कि उद्वव वापस एनडीए आने वाले हैं पर दूसरी तरफ एनडीए के सहयोगी दल के नेता अजीत पवार जिस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं उससे लग रहा है कि एनडीए में एक आएगा तो शायद दूसरा जाने को तैयार बैठा है, यहां हम उद्वव के आने और अजीत के जाने की बात कर रहे हैं, वैसे अकसर यह तो नोटिस किया जा रहा था कि सरकार के किसी भी बड़े फंक्शन में फणडवीस और एकनाथ शिंदे के साथ अजीत पवार कम ही नजर आते हैं, और एनडीए और उनके बीच संबंध भी ऐसे कुछ नहीं चल रहे हैं, पर हाल ही में अजीत पवार ने मराठी भाषा को लेकर जो बयान दिया उससे उनके बगावती तेवर खुलकर सामने दिखने लगे हैं, जी हां अजीत पवार ने उद्वव और राज ठाकरे के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि कोई ऐसा कहेगा कि मैं मराठी नहीं बोलूंगा तो नहीं चलेगा। अजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी का अपमान नहीं होना चाहिए। ये बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कुछ ही दिन पहले जब राज्य के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णनन ने कहा था कि अगर मराठी नहीं बाेलूंग तो क्या मारेंगे। राज्यपाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर नफरत फैलाएंगे तो कौन निवेश को आएगा।इस पर राज ठाकरे की पार्टी ने ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था , हमारे लिए मराठी पहले है, निवेश बाद में है।और अब अजीत पवार के बयाने से साफ लग रहा है उन्होंने एक तरफ महाराष्ट्र के राज्यपाल को तंज मारा है वहीं दूसरी तरफ इशारों इशारों में cm देवेंद्र फणडवीस को भी सुना दिया क्योंकि cm ने साफ कहा है की भाषा -जाती को लेकर किसी भी तरह की मार-पिटाई, दबाव बर्दाश नहीं किया जाएगा। अब पहले से ही महाराष्ट्र में मराठी को लेकर पहले से ही राज ठाकरे की पार्टी मनसे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी अपनी राजनीतीक रोटियां सेक रही हैं , अब उनके बीच एक और खिलाड़ी भाषा को लेकर लोगों को बांटने के मैदान में खेलने पहुंच गया है। चर्चाएं यह भी चल निकली हैं कि हिंदी भाषी राज्यों में पूरी तरह अपनी पकड़ बनाने वाली बीजेपी इन विवादों से अपने आप को अलग रखने की पूरी कोशिश कर रही है , क्योंकि मराठी के लिए हिंदी का किसी भी तरह का विरोध और राज्यों में भारी पड़ सकता है, यही नहीं यह भी खबरें आ रही हैं कि बीजेपी ने मुंबई के बीएमसी चुनाव को छोड़कर हर जगह अपने दम पर चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय के चुनाव तीन चरणों में होने की संभावना है। मुंबई बीएमसी के चुनाव अंतिम चरण में कराए जाने की उम्मीद है।अब देखना यही है कि इन चुनावों से पहले महाराषट्र में कौन सा दल किस पाले में जाकर बैठता है.

Bihar – नीतीश को तोड़ने के लिए बड़ा खेला


बिहार में चुनाव जीतेने को लेकर सभी छोटे बड़े दलों की जबरदस्त रणनीती चल रही है और हर कोई बस कुर्सी पाने के लिए अपना समीकरण बनाने में लगा है, पर हाल फिलहाल में जो घटनाक्रम घट रहे हैं, उससे लग रहा है कि पूरा विपक्ष मिलकर NDA के एक मजबूत घटक चिराग पासवान को तोड़ने की कोशिश में लगा हुआ है, इससे एक तीर से दो शिकार वाली बात होगी एक तरफ बिहार में बीजेपी कमजोर होगी और दूसरी तरफ केंद्र में बनी मोदी सरकार को चाहे बड़ा नहीं छोटा झटका तो जरूर ही लगेगा। बड़ी बात यह भी है कि पिछले कुछ समय से खुद चिराग पासवान के तेवर बदले बदले से लग रहे हैं और साफ लग रहा है कि वो बिहार में अपना वर्चस्व साबित करने के लिए जरूरत से ज्यादा कोशिशे कर रहे हैं और बिहार चुनाव को देखते हुए चिराग जनता को लुभाने के लिए नीतीश सरकार पर भी हमला बोल रहे हैं। बस विपक्ष इसी बात का फायदा उठा रहा है , जिस तरह से पिछले कुछ समय से चिराग पासवान बिहार में law and order की बिगड़ती हालत को लेकर नीतीश कुमार पर हमला कर रहे हैं और चिराग के इसी बगावती तेवरों को विपक्षी दल और ज्यादा हवा दे रहे हैं, हाल ही में चिराग ने नीतीश पर सीधे तौर पर हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में पुलिस ने अपराधियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है और मुझे ऐसी सरकार का समर्थन करने का अफसोस है जो अपराधों को रोकने में असमर्थ है। चिराग ने यह तक कह दिया कि बिहार में स्थिति वाकई भयावह हो गई है। बस फिर क्या था विपक्ष को मौका मिल गया चिराग को उकसाने का , सबसे पहले तो तेजस्वी ने ही चिराग को सलाह दे डाली और कहा कि बिहार की चिंता है तो NDA से इस्तीफा दें, वैसे साफ लग रहा है कि तेजस्वी चिराग पासवान को अपने पाले में लाने के लिए दोहरी रणनीती अपना रहे हैं, एक तरफ उन्हें पुचकारते हुए अपना भाई बता रहे हैं और दूसरे उनपर तंज कसकर NDA छोड़ने के लिए लगातार उकसा रहे हैं। यही नहीं प्रशांत किशोर से लेकर पप्पू यादव तक खुलकर चराग पासवान को NDA यानी नीतीश का साथ छोड़ने के लिए लगातार बयानबाजी कर रहे हैं । ये सब NDA के लिए शुभ संकेत नहीं है क्योंकि सब को पता है कि चिराग की दलितों के बीच गहरी पैठ है और उनका जाना NDA से काफी हद तक दलित वोट खींच सकता है। माना जा रहा है कि बिहार में इस बार नीतीश और बीजेपी के लिए जीत की राह इतनी आसान नहीं होगी, क्योंकि एक तरफ चिराग पासवान बगावती हो रहे हैं और दूसरी तरफ राहुल गांधी के लगातार बिहार में होने वाले दौरे से कुछ हो ना हो पर बिहार में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ उनके नेताओं का भी moral बढ़ रहा है और वो बिहार चुनाव जीतने में पूरी ताकत से काम कर रहे हैं, यही नहीं JDU और BJP के कईं कद्दावर नेता जो पार्टी से नाराज चल रहे हैं ,उन्हें कांग्रेस में अपना भविष्य दिखने लगा है और वो कांग्रेस आ भी रहे हैं जैसे की हाल ही में पूर्णिया मेयर के पति जितेंद्र कुमार और बीजेपी के एक और नेता कुणाल किशोर सहनी कांग्रेस में शामिल हो गए और उनके पीछे पीछे JDU नेता कुणाल अग्रवाल भी अपने बहुत से समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो हुए। इस बदलते समीकरण से बिहार में कांगस फायदे और NDA नुकसान की ओर जा सकती है,

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