MODI की विदेशी कूटनीती विपक्ष पर बड़ा तमाचा —LPG जहाज आ रहे हैं
STRAIT of HORMUZ की आजकल बहुत चर्चा है और एलपीजी के संकट को इसके साथ जोड़ा जा रहा है, तो क्या है ये hormuz कैसे इसके कारण देश में गैस की जबरदस्त कमी है , कैसे भारत इस मुसीबत से निकल रहा है, क्या ये मोदी की सफल रणनीती है कि ईरान ने उसके दो जहाज यहां से निकलने दिए तमाम बातों पर हमने बातचीत की Former Major General P, K Sehigal से
Ques —— सब लोगों को लग रहा है कि हमारे Ships Hormuz से सुरक्षित निकल कर आ जाएंगे तो एलपीजी का संकट खत्म हो जाएगा , पर इसको लेकर लगातार विपक्ष फैला रहा है कि कोई दो जहाज नहीं आए हैं , असली खबर क्या है
Ans—— ये बिल्कुल सच है कि हिंदुस्तान के दो शिप्स जो है वो स्टेट ऑफ हार्मोस से आ गए हैं , गुजरात पहुंचने वाले हैं, इनमें बहुत बड़े पैमाने पर एलपीजी के 55000 टन से ज्यादा है एक में और दूसरे में तकरीबन 70-80 टन्स है। हमारे जो एक्सटर्नल मिनिस्टर है जयशंकर उन्होंने तीन बारी अपने काउंटर पार्ट से इस बारे में बातचीत की और ये जहाज भारत पहुंचे। फिर ईरान के जो एंबेसडर है हिंदुस्तान में उन्होंने साफ तौर पे कहा कि हिंदुस्तान और ईरान के ताल्लुकात बड़े अच्छे हैं। और हम हर प्रकार से हिंदुस्तान को इजाजत देंगे लेकिन हमारा विपक्ष जो है उसको ये एक बहुत बड़ी ओपोरर्चुनिटी नजर आती थी। वहां एक किस्म से अफवाहें फैला रहा है, पैनिकि करना चाहता है। जिसका उसको लगता है कि आने वाले इलेक्शन में उसको फायदा हो सकता है।पहले विपक्ष ने कहा कि ये न्यूज़ फेक है। फिर उसने विपक्ष ने कहा एक जहाज तो अमेरिका की तरफ जा रहा है। जब अमेरिका खुद गैस बेचता है दूसरे देशों को तो ये जहाज वहां कैसे जा सकते हैं, ये दोनों जहाज हिंदुस्तान की तरफ बढ़ रहे हैं। और आज या कल तक करला पोर्ट में मुंद्रा पोर्ट में लैंड भी कर जाएगें। दोनों पोर्ट गुजरात में है और हिंदुस्तान को इससे काफी ज्यादा राहत मिलेगी।
Ques—— जब इस तरह के हालात होते हैं तो विपक्ष को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए पर यहां ऐसा नहीं हो रहा। फेक न्यूज़ फैलाई जा रही है, यहीं नहीं विपक्ष बार-बार कह रहा है कि मोदी सरकार की foreign policy फेल हो गई है। लेकिन जिस तरह से दो जहाज हार्मोस से निकल कर भारत आ गए , उससे दिख रहा है कि चाहे भारत एक तरफ से इजराइल के साथ खड़ा हुआ है। अमेरिका के साथ भी खड़ा हुआ है और ईरान से भी उसके अच्छे ताल्लुकात बने हुए हैं। आपको क्या लगता है?
Ans ——-हिंदुस्तान की कूटनीति जो है बहुत ही उच्च दर्जे की है। बहुत ही सफलतापूर्वक है और उसका सारी दुनिया ने उसका दृश्य देख लिया है। केवल हिंदुस्तान ही एक ऐसा देश है और चाइना कुछ हद तक जिसको ने इजाजत दी है कि अपने शिप्स को आप निकाल सकते हैं। उनके ऊपर किसी प्रकार का कोई हमला नहीं होगा। साफ तौर पर उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का जो झंडा है वो ऊपर लगाया जाए और बड़ी साफ तरीके से नजर आना चाहिए। उन्होंने हुक्म दिए कि किसी प्रकार से इनके ऊपर कोई हमला नहीं किया जाएगा और जब सक्सेसफुली हमारे दो ships निकल कर आ गए तो यह
दर्शाता है कि हमारी कूटनीति जो है बहुत ही सफल रही है और हिंदुस्तान के रिश्ते नाते जो है ईरान के साथ में
सिविलाइजेशन रिलेशन है बहुत सालों से बहुत मजबूत है अमेरिका के साथ बहुत मजबूत है इजराइल के साथ बहुत मजबूत है और जितने जीसी कंट्रीज है उनमें से आधों से ज्यादा
ने अपना सबसे हाईएस्ट सिविलियन अवार्ड हमारे प्राइम मिनिस्टर को दिया है , जब देश के ऊपर इस तरह की बात आती है तो विपक्ष एक responsible विपक्ष होना चाहिए कोशिश होनी चाहिए कि सरकार के साथ खड़ा हो जाए। किसी प्रकार का पैनिक ना फैलाए , लोगों को गुमराह करने की कोशिश ना करे। पर विपक्ष पूरी तरह से लोगों को गुमराह कर रहा है , विपक्ष ने इसी प्रकार कारवाई की थी कोविड के समय मे, उस समय भी हिंदुस्तान एक ऐसा देश था जिसने अपनी कोविड बनाई और हर इंसान को दो-दो फ्री डोज़ दे दिए और 100 देशों को हिंदुस्तान ने फ्री मुफ्त भी दिए। आज बिल्कुल वही हालात है। लोग काफी ज्यादा होशियार है, समझदार है। और साफ तौर पर जानते हैं कि जो विपक्ष है वह गुमराह कर रहे हैं। इसकी सजा आने वाले इलेक्शन के अंदर जरूर मिलेगी खासतौर पर कांग्रेस पार्टी को मिलेगी।
Ques—- Strait of Hormuz का जिक्र बार-बार आ रहा है ईरान वहां पर स्ट्राइक कर रहा है, ईरान धमकी दे रहा है कि हम यहां से किसी भी जहाज को गुजरने नहीं देंगे। और सभी यही कारण है कि जो काफी सारे देश हैं वहां पर सिलेंडर की, तेल की उन सब की कमी हो रही है। तो ये hormuz है क्या और क्यों इतना ज्यादा important रास्ता है ?
Ans—— Strait of Hormuz है वो तकरीबन 157 कि.मी. लंबी है। लेकिन जो इसका सबसे कम नर्वेस्ट पॉइंट है वो केवल 33 कि.मी. है। और दोनों साइड में शलोर्स है जिनमें टैंकर्स नहीं जा सकते। टैंक जो है केवल सेंटर सेवन 8 किलोमीटर है जिसमें से 3 किलोमीटर जाने के लिए जाते हैं और 3 किलोमीटर वापस आने के लिए तो बीच में 2 किलोमीटर बफर जोन है और इस बफर जोन के एक साइड में ईरान है और दूसरी दूसरी साइड में ओमान है ,और यूएई है। जहां तक ईरान का ताल्लुक है ज्यादातर एरिया जो है ईरान के कंट्रोल में ईरान ने वहां पे अपनी मिसाइलें भी लगाई है , ड्रोन भी और हथियार भी तैनात हैं, उनके पास हजारों की तादाद में
माइस भी है और एक 500 डॉलर की माइन जो है तीन से चार बिलियन डॉलर का डिस्ट्रयर है या टैंकर है उसको बर्बाद कर सकते हैं और किसी प्रकार की दुनिया में कोई भी रडार नहीं है कोई भी हवाई ताकत नहीं है या ऐसे सेंसर नहीं है जो पानी में डूबी हुई माइन को डिटेक्ट कर सके और उनको खत्म कर सके, अब सऊदी अरेबिया का 90 टू 95% % ऑइल जो है जो इसी रास्ते से आता है। इराक का ऑलमोस्ट 90 टू 90 टू 95% फिर ईरान का भी तकरीबन 90 टू 95% ऑइल व से व से आता है। यूएई का 100% ऑयल व से निकलता है। जहां तक ओमान है ओमान थोड़ा नीचे बाहर है। ओमान का इंडिपेंडेंट भी रास्ता है। लेकिन उसका फिर भी जो टर्मिनल्स है वो ऐसी जगह लोकेटेड है। उसका भी ज्यादातर जो है खास करके एलएजी वगैरह है जो हिंदुस्तान खरीदता है उससे वो स्टेट ऑफ़ हार्मोन से यूज़ करते हैं ,ऐसे में इस रास्ते की अहमियत इस युद्ग के दौरान काफी बढ़ गई है। हाल ही में ईरान न यह भी कह दिया है कि तमाम जहाज जो दुनिया के वो आज जा सकते हैं लेकिन किसी प्रकार से अमेरिका के या अमेरिकन का साथ देने वाले देशों के जहाज नहीं आ सकते उनपर हमला किया जाएगा। जहां तक हिंदुस्तान का ताल्लुक है, चाइना का ताल्लुक है उनको किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होगी। कोई रुकावट नहीं होगी। वो खुले आम आ सकते हैं जा सकते हैं लेकिन हमसे पहले उसकी इन देनी चाहिए ताकि हम अपने मिलिट्री फर्सेस को अलर्ट कर सके कि उनको प्रवाह नहीं करना तो ये बहुत ही बड़ी कुटनीति है हिंदुस्तान की और ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि हम बाकी देशों के जहाज आने देंगे, यूरोपियन देशों के उनको भी आने देंगे कर देंगे अगर उनकी पेमेंट वो युवान में करें ना कि डॉलर्स में युवान में करें ना कि डॉलर्स में ।
Ques —— क्या युद्द के दौरान ईरान से हमारे रिशतों पर कुछ फर्क पड़ा है ?
Ans——-ईरान के रिश्ते नाते पिछले ढाई हजार साल से बहुत अच्छे हैं और ईरान के अंदर हिंदुस्तान ने अच्छा चाहबार बनाया है जिससे अच्छा फोर्ट का फायदा जो है हिंदुस्तान को भी है ईरान को भी है क्योंकि नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जिससे ईरान का सामान हिंदुस्तान का जो सामान है वो यूरोप में सेंट्रल एशिया में और रशिया में जाता है जिसमें स्टेट चार्जेस तकरीबन 25% बचते हैं। इंश्योरेंस चार्जेस बचते हैं। ट्रांसपोर्टेशन चार्जेस बचते हैं। इसका फायदा यह सारा का सारा डेवलप कर रहा है हिंदुस्तान और बाकी यूरोप वगैरह मिलकर ईरान का इस खर्चा बहुत कम है। फिर हिंदुस्तान को लैंड और रेल कनेक्टिविटी मिली है अफगानिस्तान के अंदर और अफगानिस्तान का भी जो माल है बजाय पाकिस्तान के दिन आने से इसी रास्ते से आएगा। आपको बता दूं कि इस युद्द में ईरान हार कर भी जीत रहा है, खुद अमेरिकन ये कहने लगे हैं, अमेरिका की हार हुई है कि जिस तरह से ईरान सर्वाइव कर रहा है और एक बड़ी बात है कि पिछले 40 साल से ईरान इस युद्ध की तैयारी कर रहा है। आप सोच सकते हैं कि जो देश पिछले 40 साल से इस युद्ध की तैयारी कर रहे हैं वो कितना तैयार होगा और साथ में जो एक स्ट्रेटजी लेकर ईरान चल रहा है कि हम तो जाएंगे ही सबको साथ लेके जाएंगे और यही कारण है कि अमेरिका और इजराइल पर बहुत ज्यादा दबाव बन गया है क्योंकि और देश भी जो उसके चपेटे में आ रहे हैं वो चाह रहे हैं कि युद्ध जल्दी से जल्दी खत्म हो।
