NDA घोषित किया vice president का नाम -एक तीर से कईं शिकार

उपराष्ट्रपति पद के लिए जैसे ही एनडीए ने तमिलनाडु में जन्मे और RSS से जुड़े सीपी राधाकृष्णन का नाम सामने आया तो इसके पीछे छुपी एनडीए या कहिए चाणक्य की कुशल रणनीती भी सामने आ गई , जी हां जैसे ही अपने चैनल में हमने पहले ही discuss किया था कि बीजेपी उपराष्ट्रपति पद के लिए उस नेता का चयन करेगी जिससे आने वाले समय में विधानसभा चुनावों में उसे फायदा मिले, अब जब जाट नेता जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति बनाया गया तो हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र के चुनाव सिर पर थे और जाट उम्मीदवार बनाने का जबरदस्त फायदा हुआ। अब सीपी राधाकृष्णन को vice president बनाने के पीछे बीजेपी ने एक तीर से कईं शिकार कर लिए हैं , सबको पता है तमिलनाडु में अगले साल ही विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में तमिलनाडू के एक नेता का देश के दूसरे सरवोर्च पद पर चुना जाना वहां के वोटर्स को लुभाएगा, दूसरा दक्षिण राज्यों में बीजेपी को अपनी पकड़ और मजबूत करने का मौका मिलेगा, फिर कम लोग ही ये जानते होंगे कि सीपी राधाकृष्णन, ओबीसी समुदाय से आते हैं और मोदी सरकार जिस तरह से आदिवासियों, पिछड़ों को उचित सम्मान और पद दिलाने पर जोर दे रही है उससे उसका इस समुदाय का वोट बैंक लगातार पक्का हो रहा है। तीसरा ये माना जा रहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह जमीन से जुड़े नेता रहे है और लोगों के बीच उनकी अच्छी छवि है ये बातें चुनावों में बीजेपी के काम ही आएंगी। और जो बीजेपी चाहती थी वही हुआ सीपी राधाकृष्णन का नाम vice president पद के लिए आते ही जहां एक तरफ तमिलनाडू में बीजेपी की पाटनर बनी AIADMK के महासचिव पलानीस्वामी ने खुशी वयक्त की और बाकायदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को तमिलनाडु के एक व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के लिए बधाई दी और साथ में यह भी कह दिया कि राधाकृष्णन को उनकी जनसेवा के लिए पुरस्कार मिला है, वहीं दूसरी तरफ एनडीए के एक प्रमुख सहयोगी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू भी इस फैसले से बहुत खुश दिखे और अपना पूर्ण समर्थन देने की बात कह डाली वहीं व्यक्त करती है।वहीं जीतनराम मांझी, चिराग पासवान समेत कई और नेताओं ने इस फैसले पर खुशी जताई है। लेकिन दूसरी तरफ लगता है कांग्रेस को इस नाम ने झटका दिया है और उन्हें लग रहा है कि इसमें बीजेपी राजनीती कर रही है, कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने सीपी राधाकृष्णन को आरएसएस का आदमी बताकर आलोचना की और कहा कि प्रधानमंत्री और स्पीकर के बाद एक और महत्वपूर्ण पद को संरक्षण की लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है।

आंकड़ों की बात करें तो एनडीए का पलडा उपराष्ट्रपति पद के लिए काफी भारी है पर इसके बावजूद बीजेपी ने दक्षिण भारत और rss में सक्रिय सीपी राधाकृष्णन का नाम का ऐलान करके अपना किला बहुत ज्यादा मजबूत कर लिया है जिसे भेदना मुशिकल ही नहीं असंभव ही लगता है चलते चलते आपकोन बता दें कि सीपी राधाकृष्णन 2004 से 2007 के बीच तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, और अभी महाराष्ट्र के राज्यपाल है पर कम ही लोग ये जानते होंगे कि राधाकृष्णन एक खिलाड़ी भी रह चुके हैं, वह टेबल टेनिस चैंपियन और लंबी दूरी के धावक भी थे। उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल का भी शौक था। वैसे इंडी गठबंधन ने अभी किसी नाम की घोषणा नहीं की है पर हां अब राधाकृष्णन की इतनी सारी योग्यताओं को देखते हुए नाम का चयन इंडी गठबंधन के लिए तेड़ी खीर साबित होगा

 

क्यों बढ़ती जा रही हैं अखिलेश की मुशिकलें

UP में अखिलेश यादव की मुशिकलें खत्म नहीं हो रही हैं, घटती लोकप्रियता के चलते उनके एक एक नेता पार्टी से किनारा कर रहे हैं और इन सब के बीच समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल ने वो कर दिया जिससे समाजवादी पार्टी के साथ साथ अखिलेश के राज में न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, एक तरफ उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और दूसरी तरफ पूजा पाल ने कड़े तेवर अपनाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि मुझे चुनाव की चिंता नहीं है, मुझे पति के हत्यारों का टिकट जहन्नुम के लिए कटने की खुशी है।आपको बता दें 2005 में पूजा पाल के पति राजू पाल की हत्या हो गई थी। जिसमें पूजा पाल ने माफिया अतीक अहमद और उसके छोटे भाई अशरफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उसके बाद मायावती उन्हें राजनीती में लेकर आई और 2007 में वो पहली बार विधायक बनी , उसके बाद पूजा समाजवादी पार्टी में चली गई पर हाल ही में उन्होंने जिस तरह से सदन में योगी आदित्यनाथ की न्यायप्रियता और कानून व्यवस्था की प्रशंसा की थी उसके बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें 14 अगस्त को पार्टी से निकाल दिया, वैसे आपको बता दें कि इससे पहले भी पूजा पाल ने, राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर भाजपा के पक्ष में मतदान किया तब समाजवादी पार्टी पूजा पाल के पीछे खड़े वोटर्स को देखकर और पीडीए यानी पिछड़ा-दलित अल्पसंख्यक की राजनीति के चलते चुप बैठ गई थी और अखिलेश भी खून की घूंट पीकर रह गए पर अब तो हद ही हो गई जब पूजा ने खुलेआम योगी की तारीफ कर दी और इशारा कर दिया कि बीजेपी में ही उनका भविष्य है और निष्कासन के बाद से ही वो समाजवादी पार्टी और उनके कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले कर रही हैं,

माना जा रहा है कि जल्द ही वो भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगी।

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