Politics क्यों इतनी गिर गई दूसरे दल के नेता या अच्छे काम की भी तारीफ गुनाह बन गई

तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ क्या की, कांग्रेस में हंगामा मचा दिया है। इसहंगामे के लिए जिम्मेदार कौन है? इस  हंगामे के लिए जिम्मेदार हैं दिल्ली के पूर्वी दिल्ली से सांसद रहे संदीप दीक्षित का जो शीला दीक्षित के सुपुत्र हैं। उन्होंने हमला बोल दिया और शशि थरूर को उन्होंने ढोंगी तक कह दिया, और यह कहा है कि अगर आप को भारतीय जनता पार्टी या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने पसंद हैं तो आप यहां क्या कर रहे हैं? यहां का मतलब आप कांग्रेस में क्या कर रहे हैं? वैसे विवादित बयानों के लिए संदीप दीक्षित को जाना जाता है। जिस तरह से उन्होंने सेना प्रमुख के बारे में बयानबाजी की थी, लेकिन पार्टी में जिस तरह की बातें हो रही है और एक नेता दूसरे नेता के बारे में इस तरह की बात कर रहा है वह तो निश्चित तौर पर दुखद है। जो बात शशि थरूर ने कही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में वो क्या कही है? उन्होंने यह कहा है कि भारत जो है वह एक केवल इमर्जिंग मार्केट नहीं है बल्कि एक इमर्जिंग मार्केट मॉडल की तरह से उभर रहा है। अब अपने देश की तारीफ करने को अगर कोई प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ से तुलना करें तो ये किसी व्यक्ति की समझ का फेर हो सकता है। तो यह यह कुछ वैसा ही मामला है और इस तरह के हार्स शब्द इस्तेमाल करना कि जिस तरह के शब्द संदीप दीक्षित ने इस्तेमाल किया कि वो ढोंगी है।

 

पीवी नरसिम्हा राव ने UN में विपक्ष नेता अटल बिहारी वाजपेई को भेजकर मिसाल कायम की

लेकिन समझना यही है कि क्या ऐसा पहली बार हो रहा है , क्या शशि थरूर कांग्रेस के अकेले ऐसे नेता हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री की तारीफ की? क्या जो चंडीगढ़ के सांसद हैं मनीष तिवारी उन्होंने तारीफ नहीं की? या जब ऑपरेशन सिंदूर का मामला चल रहा था तब खुर्शीद सलमान खुर्शीद ने कांग्रेस की बात को नहीं नकारा या इस तरह के और बहुत सारे नेता जो कांग्रेस के कामों की भारतीय जनता पार्टी के कामों की तारीफ करते रहते हैं। जिस तरह से प्रधानमंत्री के काम की तारीफ की जा रही है। क्या यह ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक पार्टी का नेता दूसरे पार्टी के नेता की तारीफ नहीं करता रहा हो या उनके बारे में अच्छी बात नहीं करता रहा हो। पहले जो पुरानी राजनीति थी उसमें एक नेता दूसरे नेता के कामों की तारीफ करता था और अच्छे ढंग से करता था और उनके टैलेंट को रिकॉग्नाइज भी करता था। जैसे पीवी नरसिम्हा राव ने जब यूएन में भारत का पक्ष रखना था तो विदेश मंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेई को भेजा और अटल बिहारी वाजपेई ने वहां भारत को रिप्रेजेंट किया और भारत के लिए जो बात हो सकती थी उसको रखा जिसके लिए उनकी तारीफ हुई तो कांग्रेस सरकार का भारतीय जनता पार्टी के नेता को यूएन भेजना ये अपने आप में एक अनोखा है जिसके बारे में तारीफ होती है दोनों नेताओं की। दूसरा उदाहरण देते हैं जब 1988 में प्रधानमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई को कुछ किडनी की दिक्कत हुई थी तो उनके इलाज के लिए उनके अमेरिका में इलाज के लिए राजीव गांधी ने मदद की। राजीव गांधी तब प्रधानमंत्री हुआ करते थे। 1984 से 1989 तक वो प्रधानमंत्री रहे तो 1988 में उन्होंने उनकी मदद की।

BJP नेताओं ने कईं बार की है Rahul Gandhi की तारीफ

इसके अलावा अगर बात करें तो राम माधव ने राहुल गांधी की तारीफ की थी जब 2018 के चुनाव में कांग्रेस जो है वो राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा का चुनाव जीत करके आई थी। हालांकि उन्होंने ये बोला कि ये प्रधानमंत्री बनने लायक
अभी राहुल गांधी की राजनीति नहीं है लेकिन जिस तरह से उन्होंने पार्टी का नेतृत्व किया था वो तारीफ के काबिल था। इतना ही नहीं सुमित्रा महाजन ने जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा वह निकाल रहे थे तब उन्होंने तारीफ की थी राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को किस तरह से उनकी उसकी सफल यात्रा को लेकर के तो इस तरह के बहुत सारे उदाहरण हैं अब राहुल गांधी पर ही आ जाते हैं। राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के सांसद कमलेश पासवान के बारे में उनकी स्पीच की तारीफ की थी। जब वोट ऑफ थैंक्स में वो 2022 में बोल रहे थे तो बोला था कि जो है आप की स्पीच बहुत अच्छी थी लेकिन आप गलत जगह है जिसका जवाब बाद में कमलेश पासवान ने दिया था वो अलग बात है।

इंदिरा गांधी के काम को BJP के कद्दावर नेता ने सराहा था

वाजपेई जी ने खुद 71 में वॉर के बाद सरकार के कामों की तारीफ की जिस तरह से उन्होंने बांग्लादेश वाले मामले को जिस तरह से उन्होंने तब के पाकिस्तान और अब के बांग्लादेश वाले मामल को हैंडल किया तो उसके उसको लेकर के प्रधानमंत्री की उन्होंने इंदिरा जी की तारीफ की थी। अब पीवी नरसिम्हा राव से लेकर के राजीव गांधी प्रधानमंत्री वाजपेई के अलावा उस चाहे बाकी और नेता हो सलमान खुर्शीद हो शशि थरूर हो और कई सारे नेता हैं। इन सब ने जिस तरह से पार्टी के लाइन से अलग जाकर के व्यक्तिगत तौर पर तारीफ की उसमें कोई गलत नहीं है। आप आईडियोलॉजी के तौर पर नहीं है। अगर कोई आदमी काम कर रहा है उसकी तारीफ करते हैं तो उसकी तारीफ होनी चाहिए।

Congress क्यों बदलती जा रही है

पहले पॉलिटिशियंस एक दूसरे की तारीफ करते थे पार्टी में ना होने के बावजूद लोहिया जी की राम मनोहर लोहिया की सब तारीफ करता है। राम मनोहर लोहिया जो है वो इंदिरा गांधी के सबसे एक बिटर क्रिटिक थे। लेकिन आजकल कांग्रेस के लोग राम मनोहर लोहिया की तारीफ करते हैं। और ऐसी ऐसी एक लंबी फेयर हिस्ट है जहां पर जॉर्ज फर्नांडिस कांग्रेस के बड़े आलोचक थे। सेकुलरिज्म के बड़े पॉलिटिशियन बड़े सपोर्ट सपोर्टर थे। वह भारतीय जनता पार्टी के साथ उन्होंने सरकार बनाई। उनके साथ रेल
मंत्री रहे डिफेंस मिनिस्टर रहे तो काम पर तारीफ करना पर किसी को प्रश्न नहीं करना चाहिए और कम से कम इस तरह की अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए कि कोई आदमी ढोंगी है या कोई आदमी गली का कुत्ता है ये सारी चीजें जो है वो आदमी के अपने पर्सनालिटी को रिफ्लेक्ट करती हैं। राहुल गांधी जिस तरह से उन्होंने भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में एक ऐसी ओपिनियन बना रखी है और इस तरह की आलोचना करते हैं जिसका जिसके पीछे कोई तर्क नहीं होता है , जिसके पीछे कोई प्रमाण नहीं होता है वो कांग्रेस की एक परंपरा बन गई है। कांग्रेस को उसी परंपरा को या उसी लीग पर चलने की मजबूरी हो गई है। जो बात संदीप दीक्षित ने कही वह गैर जरूरी थी और इस तरह की चीजों को अवॉइड करना चाहिए और अगर प्रधानमंत्री देश के हैं और देश के लिए कोई अच्छा काम कर रहे हैं तो वो देश की तारीफ है। वो किसी व्यक्ति की नहीं तारीफ है। वो प्रधानमंत्री नाम के संस्था की तारीफ है और प्रधानमंत्री के किए गए कामों की तारीफ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *