Rahul Gandhi का गद्दार कमेंट -Politics में भाषा की मर्यादा खत्म हो रही

 

अब जो राजनीति है वो व्यक्तिगत आरोपों पर पहुंच गई है। अब उन व्यक्तिगत आरोपों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आठ सांसदों को स्पीकर ने निष्कासित कर दिया था। उसके बाद आज प्रधानमंत्री इस बात पर बोलने वाले थे पर उनका रास्ता ब्लाक किया गया, फिर इस बात के विरोध में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बाकी सांसद मकरद्वार पर विरोध कर रहे थे और उसी समय केंद्रीय मंत्री जो है राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिटू आए और उनको देख के राहुल गांधी ने कमेंट किया और उनको दोस्त या ये कहिए कि एक तरह के से हालांकि वो इंग्लिश में बोल रहे थे गद्दार दोस्त बताने की कोशिश की और उनसे हाथ मिलाने की कोशिश की जिसको रवनीत ने बिना उनसे हाथ मिलाए और उनको ये कहते हुए कि मतलब ये जब उन पर गद्दार दोस्त का तंज कसा तो उन्होंने उनको जो है देश के दुश्मनों से कोई लेना देना नहीं है। ये कह करके वो आगे बढ़ गए। हालांकि राहुल गांधी ने यह उनको कहा कि आज नहीं तो कल फिर वह वापस कांग्रेस में आएंगे। यह जो जुबानी जंग है जो चल रही है और जिस तरह की भाषा एक दूसरे के लिए नेता इस्तेमाल कर रहे हैं उसमें राजनीति जो है वो बहुत खराब दौर में पहुंचती हुई नजर आ रही है। एक दूसरे के दूसरे के प्रति जो एक तल्खी है उस तल्खी का स्तर बहुत खराब हो गया और यह केवल राहुल गांधी और अवनीत के बीच का मामला नहीं है। यह हर तरह से है। चाहे वो बीजेपी वर्सेस टीएमसी हो, चाहे बीजेपी वर्सेस कांग्रेस हो, चाहे बीजेपी वर्सेस डीएमके हो, चाहे बीजेपी वर्सेस शिवसेना के लोग हो या बाकी तृणमूल कांग्रेस के लोगों का कांग्रेस के लिए है, डीएमके का एआईए, डीएमके के लिए है या भारत राष्ट्र समिति का कांग्रेस के लिए राजनीती में भाषा की मर्यादा खत्म होती जा रही है, पर राहुल गांधी का गद्दार कमेंट, pm का घेराव, इसका राजनीतिक फायदा कितना मिलेगा खासकर कांग्रेस को अगर वो एक केंद्रीय मंत्री से इस तरह की बात करते हैं। क्या इससे कोई राजनीतिक फायदा होगा
या नहीं होगा ये तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन देखा जाए तो ये बहुत अच्छा सिंबल नहीं दिख रहा है।

Manipur एक बार फिर उम्मीद जगी है

मणिपुर में एक बार फिर सरकार भारतीय जनता पार्टी की बन सकती है। लगभग एक साल से वहां पर राष्ट्रपति शासन लागू है वहां पर जिस तरह से एथनिक वायलेंस हुआ था, हिंसा हुई थी, अह वह लंबे समय तक सरकार उसको रोकने में अह जो मुख्यमंत्री एन वीरेन सिंह थे, वह रोकने में नाकामयाब रहे। तो उसके बाद वहां पर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया और उसके बाद से वहां पर और एक बहुत सीनियर ब्यूरोक्रेट को वहां गवर्नर बना करके भेजा गया पूर्व गृह सचिव को तो उसके बाद वहां पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। अब इन सबके बीच भारतीय जनता पार्टी जिसके वहां पर 60 में से 37 एमएलए हैं। मतलब अलायंस के सब मिलाकर के 37 एमएलए हैं। उन लोगों ने मिलकर के ये फिर वो किया है कि युनान खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री पद केलिए मतलब उनको नेता जो है विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी का नेता चुन चुना है जो वो आगे जाकर के मतलब वो सरकार का दावा करेंगे और सरकार का दावा करने के बाद वह प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन इस बार बीजेपी थोड़ा कॉशसली प्ले कर रही है और उस इस कॉशस प्ले के चक्कर में सब चीज का ध्यान रख रही है। जैसे कास्ट कम्युनिटी और वो लेकर के ये जो सिंह है मिस्टर सिंह वाई के सिंह जो है यह स्पीकर रह चुके हैं मणिपुर विधानसभा में। और यह अब इस तरह की बात निकल कर के आ रही है कि इनके अलावा दो उप मुख्यमंत्री भी बनाए जा सकते हैं और वो दो उप मुख्यमंत्री जो हैं वैसे होंगे जो जो वहां एथनिक डायवर्सिटी है या जो वहां एथनिक क्लशेस है उनको ध्यान में रख के जैसे एक उप मुख्यमंत्री कुकीज जो कम्युनिटी और दूसरा नागा कम्युनिटी का होने की बात कही जा रही है। तो कुल मिलाकर के यह जो मामला निकल कर के आया है वह यह कि अब वहां पर बहुत जल्दी जो है वो सरकार बहाल हो जाएगी और कुल मिलाकर के यह एक नया डेवलपमेंट नजर आ रहा है।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।