Reiki में पीटो या Tapping थैरेपी का भी होता इस्तेमाल -Results हैरान कर देते
हमारे पुराने जमाने चली आ रही है टैपिंग, थपकी, पीटो थैरेपी लेकिन आज लोगों ने एक बार फिर इसकी उपयोगिता को समझना शुरू किया है। रेकी के साथ-साथ इसे अपने पूरे बदन को टैपिंग करते हैं तो पूरे बदन से बदन के एक्यूप्रेशर points दब जाते हैं और जाने अनजाने में कोई ऐसी जगह आपकी टैपिंग हो जाती है जो आपको रोग ग्रस्त बीमारियों को ठीक होने में मदद करती है।
रेकी के साथ हाथों से Tapping करते हैं

रेकी के साथ साथ जो भी थेरेपी करते हैं सिर्फ अपने हाथों से करते हैं और कोशिश करते हैं उनमें हम कोई भी चीज यूज़ ना करें। सिर्फ प्रकृति को बीच में लाकर उनको हम यूज़ करें। तो वैसे ही अब हम रेकी के साथ-साथ रेकी में अपना को चार्ज करते हैं। सारे प्रतीक चिन्ह डालते हैं। और जब इन हाथों में शक्ति आ जाती है प्रतीक चिन्हों की तो इनहीं शक्ति हारी हाथों से हम प्रार्थना करते हैं कि हमारे शरीर के उस अंग को बिल्कुल निरोगी बनाओ जो हमारे शरीर को बीमार कर रहे हैं, और टैपिंग सर से लेकर पैर तक की जाती है।
Reiki के प्रतीक चिन्ह भी डाले जाते हैं

टैपिंग में हम रेकी में साइड सिंबल डालते हैं अपने ऊपर। प्रतीक चिन्ह डालते हैं। प्रार्थना करते हैं ईश्वरी शक्तियों से कि हमें निरोगी होने में मदद करें। अपनी ऊर्जाएं दे। सर से ले हम टैपिंग करते हैं। हमारा सबसे पहले जो मेन होता है सर होता है। हमारा भ्रम द्वार है ये। सारी ऊर्जा यहीं से आती है। यहां से शुरू करते करते हम सर के आसपास माथे पर, सर के पीछे अपने गालों पे, अपनी आंखों पे, अपने फोरहेड पे, गालों पे, अपने थोड़ी पे करते-करते नीचे आते हुए वही हमारे 24 अंग आ जाते हैं। सारे चक्र आ जाते हैं। जिससे टैपिंग के बाद ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है और रेकी के साथ-साथ दोनों शक्तियां मिल जाती है। जिससे बहुत जल्दी आपको स्वस्थ लाभ होता है। ऐसे करते-करते एक-एक अंग कोहम बचाते रहते हैं। धीरे-धीरे करके हम पैरों पे आते हैं। पैरों के बाद हम घुटनों पे आके नीचे आते हैं। उसके बाद हम कंधों पे, पीठ पे, बैक पे, लोअर बैग पे, अपनी टेल बोन पे और बाद में अपने हाथों को रगड़ के उसको एक्टिवेट करके अपने चेहरे पर रखते हैं और ईश्वर से एक प्रार्थना करते हैं कि वह हमें बहुत जल्दी स्वस्थ करे। हमारे सारे कार्य पूरे करें और हमें सफलता दे।
Tapping करने के लिए शऱीर में Points बनाए जाते हैं

इसके लिए सुविधा अनुसार हमपॉइंट्स बना देते हैं ताकि लोग कंफ्यूज ना हो। सर से शुरू करके हम पैरों तक टैपिंग करते हैं। सपोज जब हम अपनी क्लास लेते हैं तो पांच सात मिनट वार्मिंग कराते हैं। उसमें टैपिंग की क्लास लेते हैं। उससे क्या होता है? सामने वाले हमारे जो भी क्लाइंट होते हैं, पेशेंट होते हैं, उनका ब्लड सर्कुलेशन बढ़

