REIKI सीखने के बाद शरीर के चक्र भी आसानी से खोल सकते

रेकी सीखने के बाद आप अपने घर परिवार की हर समस्या को ठीक कर सकते हैं आज बात करते हैं कि रेकी करने के साथ-साथ अगर मेडिटेशन को भी उसमें जोड़ देते हैं तो उसके फायदे डबल हो जाते हैं। मेडिटेशन जैसे कि हम सब जानते हैं एक क्रिया है यूनिवर्सल से जोड़ने की, यूनिवर्सल के एनर्जी लेने की। अगर उस क्रिया को आप रेकी की ऊर्जाओं के साथ जोड़ देते हैं तो बहुत ज्यादा आपको शरीर में फर्क दिखना शुरू हो जाता है और आपके शरीर के अंग बहुत जल्दी निरोगी होते हैं। हमारे शरीर में बहुत सारे चक्र हैं लेकिन हमारे जो सात चक्र जो विशेष
चक्र जो होते हैं हमारे शरीर के प्राण ऊर्जा केंद्र होते हैं हमारे शरीर के आगे पीछे स्थित रहते हैं अपने रंगों की विशेष ऊर्जाओं के साथ और अपनी एक विशेष ध्वनि के साथ जी हां साथियों हर चक्रा की इनकी कोई ना कोई ध्वनी होती है अगर आप उन ध्वनि को रेकी की ऊर्जा के साथ जोड़ देंगे साथ में उनकी रंगों की ऊर्जा को जोड़ देंगे तो आप देखेंगे आपके शरीर में आपके जीवन में चमत्कारी उपचार होने शुरू हो जाते हैं।ये चक्र मेडीटेशन से एक्टिव हो सकते हैं, सबके अलग अलग बीज मंत्र है, अलग अलग रंग है। अगर इन सबको आप इकट्ठा करके रेकी के प्रतीक चिन्हों के साथ जोड़ देंगे तो शरीर की बीमारियां बहुत जल्दी ठीक होनी शुरू हो जाती हैं।
शरीर के सात चक्र हर पर काम करे Reiki

शरीर के सात चक्र होते हैं। सबसे पहला हमारा क्राउन चक्र होता है जो हमारे क्राउन के ऊपर जुड़ा होता है। यह चक्र है। इससे पावर जीव होती है। इसका रंग जामिनी होता है। उसके बाद दूसरा हमारा आज्ञा चक्र होता है जो हमारे ठीक जहां पे बिंदी लगाते हैं तीसरा नेत्र होता है। वहां पे स्थित होता है। इसका रंग गहरा नीला होता है। उसके बाद हमारा तीसरा चक्र जो हमारे गले पे विशुद्ध चक्र पे स्थित होता है। और हमारे गले की सारी समस्याओं को ठीक करने की उसके अंदर पूरी क्षमता होती है। उसका रंग हल्का नीला होता है। उसके बाद हमारा
चौथा चक्र हृदय चक्र होता है जो हमारे हृदय के बिल्कुल बीचो बीच स्थित होता है। इसका रंग हरा होता है। उसके बाद हमारा पांचवा चक्र जो हमारी नाभि के ऊपर होता है। मणिपुर चक्र होता है। इसका रंग पीला होता है। उसके बाद हमारा छठा चक्र होता है जो हमारी नाभि से ठीक तीन उंगल नीचे होता है। स्वादुष्टान चक्र बोलते हैं। इसका रंग ऑरेंज होता है। उसके बाद सबसे जो मेन हमारा चक्र होता है हमारा रूप चक्र हमारी दोनों जांघों के बीच में स्थित होता है और इसका रंग लाल होता है। ये सात जो विशेष चक्र है समझिए हमारी शरीर के प्राण ऊर्जा के केंद्र है। अगर आप इन चक्रों पे ध्यान देंगे उस पर कंसल्टेशन करेंगे और रेकी की ऊर्जाओं के उनको साथ जोड़ देंगे तो आपको देखिए शरीर में कितनी जल्दी उपचार में लाभ मिलेगा।
Crown चक्र का रोल बहुत महत्वपूर्ण
सबसे पहले क्राउन चक्र की बात करें , जो सीधा ब्रह्मांड से जुड़ा होता है। इसे हम रिसीविंग चक्र बोलते हैं। इसे हम कुदरत की भाषा का एक मेडिटेशन समझते हैं जो हमें बताता है, समझाता है इंट्यूशन के जरिए कि आपको क्या करना है, क्या आपके लिए अच्छा है, क्या
बुरा है? और किस रूप में आपको पावर मिलती है यह जामिनी रंग में जुड़ा होता है और ब्रह्मांड की जो सर्वोच्च शक्ति का जो रंग होता है वह जामिनी रंग में होता है, तो यह चक्र सबसे पहले आपके अंदर आके आपके लिए जो भी ऊर्जा निर्धारित यूनिवर्सल करता है आपके शरीर के लिए आपको अपने कर्मों ग्रहों के अनुसार यह चक्र आपके शरीर के अंदर उन ऊर्जाओं को पूरे शरीर में भेजता है फैलाता है और ठीक उस अंग पे ले जाता है जहां पे आपको जरूरत होती है। तो यह चक्र हमारा ईश्वर से जुड़ा हुआ होता है। ईश्वरी शक्ति के साथ होता
है। इसक का हमारे पास कोई बीज मंत्र नहीं होता। इसको हम सिर्फ एक कुदरत का भाषा समझते हैं जो कुदरत हमको समझाती है। तो साथियों यह चक्र सबसे ज्यादा हमारे पास पावरफुल चक्र है। इस चक्र के साथ जुड़ते ही आप ब्रह्मांड की दिव्य शक्तियों से जुड़ जाएंगे। मेडिटेशन में मैं आपको बता दूं अगर आपका मन नहीं लगता और आप रेकी सीख चुके हैं। रेकी के प्रतीक चिन्हों के साथ अगर आप मेडिटेशन से जुड़ते हैं तो आपका मेडिटेशन में मन भी लगेगा और आपके अंदर एनर्जी भी आएगी।
