किस नेता ने चाणक्य को कह दिया हमें हिंदूत्व मत सिखाओ

चर्चाओं का बाजार गर्म है कि बीजेपी चाणक्य अमित शाह ने ऐसा क्या कह दिया जिससे महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और शिवसेना यूबीटी के चीफ उद्धव ठाकरे इतने जबरदस्त नाराज हो गए और चाणक्य को जमकर खरी खोटी सुनाई। दरअसल हाल ही में तमिलनाडू सरकार ने चेन्नई हाईकोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू की है और उद्धव ठाकरे ने खुलकर इसका समर्थन किया था ,इसी पर अमित शाह ने लोकसभा में अपने एक बयान में उद्धव ठाकरे को घेर लिया । उन्होंने कहा इसे वोट बैंक की राजनीति बताया और कहा कि आजादी के बाद इतने सालों में कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई जज से अगर फैसला दे, तो उसके खिलाफ महाभियोग लाया जाए। बस इसी बात से नाराज उद्वव भी अपना पारा खो बैठे और महाराष्ट्र के नागपुर में विधानमंडल के शीलकालीन सत्र के दौरान उद्धव ठाकरे ने यह तक कह दिया कि अमित शाह मुझे हिंदुत्व न सिखाएं। उद्वव ने यह भी कहा कि जिन्ना की कब्र पर किसने सिर रखा, इससे बहुत सी चीजें सामने आएंगी। नवाज शरीफ का केक किसने खाया? इससे बहुत कुछ सामने आएगा। पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने के लेकर भी उद्वव का गुस्सा सामने आया और उन्होंने कहा कि जब अमित शाह का बेटा पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेल रहा होता है, तो उनका हिंदुत्व कहां चला जाता है? क्योंकि पाकिस्तान ही हमारे देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधिया कर रहा है, उद्धव ठाकरे यहां भी नहीं रुके और वंदे मातरम् पर भी बीजेपी को घेर लिया , ठाकरे ने कहा कि वंदे मातरम कहते समय उन्हें इस बात पर ध्यान नहीं जाता कि मेरी भारत माता कितनी तकलीफ में है।

 

डिंपल यादव किस मुद्दे पर खड़ी हो गई Rahul Gandhi के साथ

अभी कुछ समय पहले की ही बात है बिहार चुनाव में राहुल गांधी ने जमकर SIR के खिलाफ रैलियां की , और कहा कि सरकार इसके जरिए जनता को बेरोजगारी महंगाई के मुद्दे से Divert कर रही है और लगता है अब यूपी समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी राहुल के सुर में सुर मिला दिया है, जी हां लोकसभा में डिंपल ने भी SIR को लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की , उन्होंने कहा कि SIR पर सरकार 11 साल बाद क्यों जाग गई, क्या इसके पहले देश में घुसपैठिए नहीं थे, डिंपल ने कहा कि असल में आज, मुख्य मुद्दे ये हैं कि युवाओं के लिए नौकरियां नहीं हैं, और रिजर्वेशन खत्म करने की कोशिश की जा रही है और इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए SIRको सामने लाया जा रहा है। पर लगता है कि राहुल गांघी की बोली बोलने वाली डिंपल शायद बिहार में कांग्रेस का हाल भूल गई , जहां राहुल का sir विरोध का मुद्दा पूरी तरह से ना केवल फ्लाप रहा बल्कि जनता को नाराज भी कर दिया और उसने कांग्रेस को बिहार में हाशिये पर ही पहुंचा दिया है। तो डिंपल जी संभल जाइए यूपी में आपको चुनाव लड़ना है कहीं कांग्रेस जैसा हाल ना हो जाए।

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।