Centre का आदेश सभी अधिकारी जनप्रतिनिधियों से मिलें

अभी दो-तीन दिन पहले कैबिनेट सेक्रेटरी ने एक चिट्ठी लिख के सभी राज्यों के सेक्रेटरीज को, सभी डिपार्टमेंट और मिनिस्ट्रीज के सेक्रेटरीज को ये इंस्ट्रक्शन दिया या उनसे कहा कि आप लोग जो भी अपॉइंटमेंट ले उसमें कोई रिलक्टेंसमत दिखाइए। उनसे कहा कि जो भी इंडिविजुअल्स सरकार के बाहर के हैं , उनसे मिलिए। उनको समय दीजिए। और ये सब प्रशासन को बढ़िया बेहतर ढंग से चलाने में मदद करेगा और जो पॉलिसीज को लेकर के मिसअंडरस्टैंडिंग है उसको दुरुस्त करने में मदद करेगा। मतलब ये कि मिलने मिलने वालों में इंडिविजुअल प्रोफेशनल्स हो सकते हैं, कॉन्ट्रैक्टर्स हो सकते हैं, ट्रेड यूनियन के नेता हो सकते हैं, पॉलिटिशियंस हो सकते हैं। इवन उन लोगों से भी मिलने की बात कही। लेकिन जो जिनके जिनको जिनका मामला इन्वेस्टिगेशन में है और पॉलिटिशियन से भी मिलने की मांग की। केंद्र में इस तरह का डिसीजन हुआ है और उसी समय एक विवाद खड़ा हो गया है जिसे समाजवादी पार्टी पूरी तरह से भुना रही है। इस तरह की रिपोर्ट्स आती रही कि फला अधिकारी ने फला मंत्री के साथ या फला अधिकारी ने फला नेता के साथ अभद्रता की और विशेष रूप से यह मामला तब होता है जब विपक्ष का नेता मिलने जाता और जो चीफ सेक्रेटरी का आदेश था वह था कि पॉलिटिशियन से भी और विपक्ष के पॉलिटिशियन से भी मिलना चाहिए, मतलब यह केंद्र का आर्डर है पर यूपी में क्या इस आर्डर को फोलो किया गया, नहीं किया गया, ये एक विवाद सामने आया है।

ADM पर लगया गलत व्यवहार करने का आरोप

हाल ही में कैराना की सांसद इकरा हसन समाजवादी, पार्टी की वह सहारनपुर के एडीएम से मिलने जाती हैं और उसके बाद आरोप सामने आ रहे हैं कि एडीएम साहब ने उनसे उन्होंने अभद्रता की और इसको लेकर राजनीती शुरू हो गई है, लोकल पॉलिटिशियंस हैं वो इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने और इसको एक बड़ा इशू बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि कैराना की सांसद इकरा हसन और नगर पंचायत अध्यक्ष समा परवीन के साथ अभद्रता की बात कही जा रही है। जब ये लोग एडीएम से मिलने गए थे तो उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया, पर इसपर अभी तक कुछ सप्ष्ट रूप से बातें सामने नहीं आ पा रही है, आमतौर पर जब ऐसे आरोप सराकरी अधिकारी पर लगाए जाते हैं तो होता यही है कि नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए ऐसे आरोप लगा देते हैं, इस तरह की घटनाओं के पर आरोप मढ़ करके सरकार को कटघरे में खड़ा करके अपना राजनीतिक रोटियां सेकने का काम किया जाता

अखिलेश यादव भी कूदे इस मुद्दे पर

अब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस पर अपनी तीखी प्रक्रिया जताई है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जनह जनप्रतिनिधि का सम्मान नहीं कर सकता और वो जनता का क्या सम्मान करेगा और इसको जनप्रतिनिधि के अपमान से जोड़ते हुए बोला कि ये महिलाओं के खिलाफ भी है। अब ये इस पर राजनीति शुरू हो गई है। एक और सांसद ने हाजी फजलुर रहमान ने तो इकरा हसन को अपनी बेटी बता दिया और इसकी आलोचना शुरू कर दी। अब बहस यह भी छिड़ गई है कि एक तरफ चीफ सेक्रेटरी कैबिनेट सेक्रेटरी कह रहे हैं कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से मिलना चाहिए। लेकिन जनप्रतिनिधियों से मिलने का ये सबसे बड़ा नुकसान है कि वो हर चीज को अपने राजनीतिक फायदे और नुकसान की दृष्टि से देखते हैं। उसमें डेवलपमेंट से ज्यादा सरकार के ऊपर स्कोर कर इसलिए कि जिस भी सरकार की जो जिस भी पार्टी की सरकार होती है अधिकारियों को उसी पार्टी का कार्यकर्ता या उसी पार्टी का मान लिया जाता है और उसके खिलाफ विपक्ष के नेता राशन पानी लेकर चढ़ने की कोशिश करते हैं अब क्या इकरा के मामले में कुछ ऐसा तो नहीं हुआ है कि जानबूझकरसी एक सरकारी अधिकारियों को टारगेट किया जा रहा है, इसका कसूर सिर्फ इतना रहा कि वह आदेश अनुसार जन प्रतिनिधि से मिले।कुल मिलाकर के मामला इसको गरमाने की कोशिश की जा रही है। फजलुर रहमान ने Facebook मे लिख करके इसकी आलोचना की। लेकिन अब इसमें एडीएम का की भी बात सुन लेनी चाहिए। एडीएम संतोष बहादुर सिंह ने सीधे सिरे से इसको इस पूरे मामले को न कार दिया। उन्होंने कहा कि जैसे ही उनको इस बात की सूचना मिली कि सांसद महोदया और जनप्रतिनिधियों के साथ आ रहे हैं। उन्होंने वो तुरंत अपने कार्यालय पहुंचे और एक सामान्य बातचीत हुई। एडीएम ने यह बताया कि ईओ से जुड़ी शिकायत बताई गई लेकिन कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई। और जो मामला है कि किसी को बाहर निकालने की बात कही उसको भी उन्होंने सिरे से नकार दिया है और इस मामले में जब मंडलायुक्त को मतलब डिवीजन जो कमिश्नर है डिवीजनल कमिश्नर है उसको इस मामले में रिपोर्ट किया गया तो उन्होंने इस मामले में कार्यवाही के आदेश दे दिए हैं। जिलाधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं।

BJP को घेरने की पूरी कोशिश

अब इस मामले में वो बीजेपी के नारे दोहराए जा रहे हैं कि जो लोग बेटी बचाओ और महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं वो महिलाओं के प्रति इस तरह की भावना रखते हैं। पर समझना यही है कि अधिकारी सामान्यत नियमबद्ध होता है। नियम के तहत कार्यवाही नियम के तहत काम करता है। निश्चित तौर पर अगर कोई आदमी कानून नियमों के उल्लंघन करता हुआ पाया जा रहा है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए। लेकिन उतनी ही जिम्मेदारी राजनेताओं की जनप्रतिनिधियों की होती है कि जनप्रतिनिधि अपने राजनीतिक फायदे के लिए किसी अधिकारी को इस तरह से टारगेट ना करें। इसलिए कि इसका मैसेज गलत जाता है। फिर जो है फिर जो बात कैबिनेट सेक्रेटरी ने कही है वो पूरा का पूरा मामला ही कॉम्प्रोमाइज हो जाता है। ये ये एक बड़ा मसला है। सामान्यत ये इस तरह की चीजों पर चर्चा नहीं होती है। लेकिन इकरा हसन ऐसा नहीं है कि इकरा हसन कुछ चीजों को लेकर के विवादों में या इस तरह की बात नहीं करती हैं। बिल्कुल वो विवादों वाली बात करती हैं।

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