यूपी में होने वाले लोकसभा चुनाव बहुत ही मायने रखते हैं क्योंकि 80 से ज्यादा लोकसभा की सीटे जीतने में जो पार्टी बाजी मार लेती है केंद्र में उसकी सरकार बननी पक्की ही मानी जाती है और यही वजह है कि बीजेपी ने अभी से यहां आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी चाणक्य यहां बिल्कुल अलग रणनीति के तहत काम करने की तैयारी कर रहे हैं जी हां पता चला है कि अखिलेश के ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ यानी pda के फार्मूले के जवाब में बीजेपी ने ‘पिछड़ा, दलित, अगड़ा यानी उच्च जाति’ के वोट बैंक को एकजुट करने की कवायद शुरू कर दी है , पार्टी को इस बात का पूरा आभास हो चुका है कि जितनी भी कोशिश कर ले यूपी का मुस्लिम समुदाय उसे अपना वोट नहीं देगा इसलिए अब उन्हें लुभाने की बजाय बीजेपी हिंदू समुदाय के बीच जातिगत एकता को मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है और ओबीसी, एससी और उनके साथ उच्च जाति पर पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया है। माना यही जा रहा है कि उच्च जाति को साथ में लाने से न केवल दलितों का हौसला बढ़ेगा, बल्कि अलग अलग जातियों में बंटे हिंदू वोटर्स भी एकजुट होंगे। दलित नेता बीआर अंबेडकर की जयंती के अवसर पर इसकी शुरुआत भी कर दी गई जब भाजपा ने अपने उच्च जाति के तमाम नेताओं को दलित बहुल इलाकों में दलितों के साथ मिलकर अंबेडकर मूर्तियों की सफाई करने को कहा था।

मुख्यमंत्री पद को लेकर RJD में जबरदस्त दरार BJP उठाएगी फायदा


बिहार राजनीति में ‘उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान से rjd नेताओं में खलबली मच गई है और जो बात rjd के नेता कई बार दबे स्वर में कह चुके हैं वो सम्राट चौधरी ने खुलकर बयान कर दी, उन्होनें कहा कि एनडीए में तो सिर्फ एक नीतीश कुमार का ही चेहरा और वही चुनाव में एनडीए का नेतृत्व करेंगे। लेकिन rjd में साढ़े पांच मुख्यमंत्री हैं। यह कहकर सम्राट चौधरी ने नाम भी गिनवा दिेए, सबसे पहले लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती और रोहिणी आचार्य। उन्होंने कहा कि पहले rjd आपस में ही तय कर लें कि उनका कौन नेतृत्व करेगा उसके बाद जनता के सामने आएं। वैसे आपको बता दें कि rjd में लगातार नेतृत्व को लेकर अंदर ही अंदर काफी समय से लडाईयां चल रही हैं खैर बच्चों के सामने लालू और राबड़ी अपने आप ही किसी दावेदारी के लिए हट गए पर सबसे ज्यादा भिडंत तेजस्वी और तेजप्रताप में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर चल रही है और तेजप्रताप इस बार में खुलकर कई मंचों पर बोल भी चुके हैं, सुनने में यह भी आ रहा है कि लालू की लाडली मीसा भारती भी अपने आप को बड़े पद के लिए प्रोजेक्ट करने की पूरी कोशिश कर रही है और इन सब के बीच रोहिणी के बारे में कोई सोच ही नहीं रहा कि उनके अपने सपने क्या हैं। पर साफ है कि लालू परिवार की गद्दी को लेकर हो रही लड़ाई को आने वाले समय में बीजेपी पूरी तरह से भुनाएगी, जिससे अपना घर नहीं संभल रहा राज्य कैसे संभालेगा।

यूसुफ पठान अभी तक नहीं आई है नेतागिरी

क्रिकेटर से नेता बने यूसुफ पठान के बयानों पर आजकल उनकी काफी भद्द पिट रही है, पहले भी बंगाल में हिंदूओं पर हुए हिंसक हमले में जब पठान कुछ नहीं बोले तो उनकी निंदा काफी वायरल हुई थी और अब यही पठान साहिब जो बंगाल के नेता होकर बंगाली हिंदूओं पर होने वाले अत्चाचार पर कुछ नहीं बोले लेकिन ओडिशा में मुस्लिम संप्रदाय के श्रमिकों पर हमलाे का आरोप लगाकर आडिशा की बीजेपी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं और इसी बात पर देश तो क्या बंगाल की ही जनता ने उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया है। दरअसल हाल ही में टीएमसी सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस पर हस्तक्षेप करने ओडिशा सरकार को सख्त कार्रवाई करने की मांग की ,इसपर बीजेपी के तमाम नेताओं ने खुलकर यूसुफ पठान को निशाना बनाया, बीजेपी प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने इंटरनेट मीडिया के जरिए यूसुफ पठान पर निशाना साधते हुए कहा कि मुर्शिदाबाद में हिंदुओं पर हमले के दौरान आपने कुछ क्यों नहीं कहा? अब आप जिनके बारे में चिंतित हैं वे वास्तव में बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं जो अवैध रूप से ओडिशा में रहकर उसका कल्चर खत्म कर रहे हैं । यही नहीं यूसुफ पठान की इस टिप्पणी पर राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने यह तक कह दिया कि ऐसे व्यक्ति ने इस तरह का बयान दिया है, जिसे सामान्य ज्ञान की भी थोड़ी जानकारी नहीं है।ओडिशा कभी भी राज्य के बाहर के लोगों के लिए असुरक्षित जगह नहीं रहा ।

अखिलेश हैरान-परेशान एक एक कर नेता जेल में

लगता है यूपी में योगी सरकार गिन गिनकर समाजवादी पार्टी के नेताओं को जो नेतागिरी में कम और गुंडागर्दी में ज्यादा invole रहे हैं, पकड़ रही है और जेल की हवा खिला रही है और यही इससे अखिलेश यादव बहुत हैरान और परेशान भी चल रहे हैं, क्योंकि अगर यह सिलसिला चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं होगा कि जब समाजवादी पार्टी के ज्यादातर नेता जेल की अंदर ही पहुंचे होंगे, क्योंकि लोगों का मानना है कि पार्टी में नेता कम अपराधी ज्यादा है, आजम खां, मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद जैसे बड़े बड़े नेताओं से लेकर बहुत से छोटे नेता है जो हत्या, रेप, मारपिटाई में लिप्त रह चुके हैं, और पुलिस उनकी लगातार धरपकड़ रही है, और अब पुलिस ने शराब के बड़े कारोबारी समाजवादी पार्टी के नेता गुलशन यादव के मकान पर रेड डालकर शराब की दुकाने जो वहीं चल रही थी वो खाली करवाई, साथ ही उसे खाली कराकर प्रशासन ने कुर्क कर दिया। यह कारवई गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई। अब इसके बाद अखिलेश भड़के हुए हैं पर चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते क्योंकि शराब तो पकड़ी गई है किस मुंह से आगे बढ़े

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गद्दार कमेंट पर रवनीत बिट्टू ने सच ही बोला कि राहुल देश के दुश्मन बुधवार को राहुल गांधी का बीजेपी नेता रवनीत बिट्टू को संसद परिसर में गद्दार कहने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, सिख समुदाय इसे पूरे सिख समाज का अपमान बता कर गुस्सा है, यही नहीं राहुल के कमेंट पर उऩके साथ बैठे सिख समुदाय के नेताओं का हंसना भी चर्चा का विषय बन गया है और उनके खिलाफ भी कारवाई की मांग जोर पकड़ रही है, शिरोमणि अकाली दल की बैठक से शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों ही सच्चे हैं, आपको बता दें कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को अपना गद्दार मित्र बता दिया था तो जवाब में बिट्टू ने उन्हें देश का दुश्मन बताया। ममता बनर्जी क्यों बन गई वकील ममता बनर्जी में कुछ हो ना हो एक तो कला जरूर है कि उन्हें पता है कि कैसे ,किस तरह हमेशा ही मीडिया की सुर्खियों में बने रह सकते हैं, कभी अपने बयानों से कभी केंद्र सरकार पर लगाए गए अजीबोगरीब आरोपों के कारण दीदी हमेशा सुर्खियों में रहती हैं और जब से ममता दीदी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर खुद जिरह करने की अपील की है वह बंगाल तो क्या देशभर में चर्चा का विषय बन चुकी हैं, हां यह बात अलग है कि ममता के इस फैसले से ना केवल बीजेपी बल्कि कांग्रेस और कम्यूनिस्ट पार्टी ने ममता को घेरा है और कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रोपोगेंडा है , राजनीतिक पैंतरेबाजी है। केंद्रीय मंत्री सुकंत मजूमदार ने इस पर तंज किया और कहा कि ममता बनर्जी ने अदालत की गरिमा को ताक पर रखकर वहां केवल राजनीतिक भाषण दिया। यही नहीं मजूमदार ने दावा किया कि Chief Justice of India ने मुख्यमंत्री को बीच में रोककर उनके वकीलों को बोलने की अनुमति इसलिए दी क्योंकि ममता कानून के बजाय राजनीति की बात कर रही थीं। कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आईच राय ने ममता पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राहुल गांधी इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे, तब ममता चुप थीं और अब केवल ध्यान भटकाने और अपनी वाहवाही के लिए खुद कोर्ट पहुंच गई हैं।दूसरी तरफ माक्सर्वादी कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता सुजन चक्रवर्ती ने सवाल उठाया कि अगरजनता की परेशानी को लेकर ममता बनर्जी इतनी सीरियस थी तो उन्होंने बहुत पहले प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? वहीं इस बात को तृणमूल कांग्रेस ऐतिहासिक बता कर पेश कर रहा है। pm को घेरा-आरोप -मारने की कोशिश थी संसद में बजट सत्र के दौरान वो सब हो रहा है जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, अभी तक देखने -सुनने में आता था कि विपक्ष ने नारेबाजी की , संसद से वाकआउट कर दिया, संसद के बाहर धरना -प्रदर्शन किया, लेकिन बुधवार को जो हुआ वो हैरान करने वाला नजारा था विपक्ष ने ना केवल हंगामा करके संसद को ठप किया बल्कि कईं महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के बोलने से कुछ पहले ही ना केवल प्रदर्शन शुरू कर दिया। बल्कि कईं सीटों, जिसमें पीएम मोदी की सीट भी शामिल थी, की कुर्सियों को ब्लॉक कर दिया। इन सांसदों ने हाथों में एक बैनर थाम रखा था जिसपर लिखा था , जो सही है, वही करो। ये महिला सांसद मंगलवार को आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर अपना विरोध कर रही थी। कई मंत्रियों के हस्तक्षेप के ही ये महिला सांसद अपनी जगह लौटी , इन महिला सांसदों में वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि समेत कईं और दलों की महिलाएं शामिल थीं। इस हंगामे की कईं बीजेपी के नेताओं ने निंदा की, बीजेपी नेता मनोज तिवारी का कहना था कि जो भी कुछ हुआ वो डरावना था और महिला सांसदों का मकसद पीएम मोदी पर हमला करना था, मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को पहले से प्लान बनाकर प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर तैनात किया गया था, वो तो मंत्री किरण रिजिजू ने सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया।