Up में मायावती बना रही जीत का combination
किसी जमाने में ब्राह्मण और दलित कॉम्बिनेशन के नाम पर पूर्ण बहुमत पाने वाली मायावती ने एक बार फिर मौके का फायदा उठाते हुए ब्राह्मणों के इंटरेस्ट की बात करना शुरू किया है और यह कहा कि ब्राह्मण दाल बाटी और चोखा बनाने के लिए नहीं है। और उन्होंने बताया कि किस तरह से भारतीय जनता पार्टी में ब्राह्मण नेता हैं उन्होंने जब ब्राह्मणों के हित की बात की तो किस तरह का बखेड़ा खड़ा हो गया। मायावती को यह मालूम है कि अगर दलित और ब्राह्मण मिलकर के उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ते हैं तो लगभग 32- 33% का समीकरण बनता है। इसलिए उनको लगता है कि ब्राह्मणों को साधना चाहिए। हालांकि ऐसा कभी नहीं होता है कि पूरा का पूरा ब्राह्मण समुदाय किसी एक पक्ष में जाए। ये केवल मुस्लिम वोटों के साथ होता है। लेकिन फिर भी पिछले दो-तीन चुनाव से ब्राह्मण भी बहुत प्रैक्टिकल वोटिंग करता है। और ऐसी जगह वोट करता है जहां कम से कम जो एंटी हिंदू सेंटीमेंट के लोग हैं उनको दूर रखा जाए सत्ता से। अब यह जो बात मायावती जी कर रही हैं उनका सीधे तौर पर यह कहना है कि कि चाहे वह कांग्रेस हो चाहे वो समाजवादी पार्टी हो चाहे भाजपा सभी में ब्राह्मणों का निरादर हो रहा है। मायावती यह इसलिए भी कह रही है कि हाल ही में bjp के नविवाचित अध्यक्ष हैं उन्होंने जो ब्राह्मण एमएलए ने बैठक की थी करीब 42 के आसपास एमएलए हैं तो उन्होंने बोला था कि इस तरह की किसी गतिविधि पर किसी समाज की अगर कोई बैठक की जाती है तो उस पर डिसिप्लिनरी एक्शन ले लिया जाएगा।अब क्योंकि मायावती जी पूरी तरह से अभी राजनीति में निष्क्रिय नजर आ रही थी और उनका एक बड़ा वोटर जो है वो बीजेपी में शिफ्ट हो गया है। 2024 के चुनाव में उसमें से एक सेक्शन जो है उसने समाजवादी पार्टी को वोट किया जिसके कारण उनको बीजेपी से ज्यादा सीटें मिली। तो मायावती को यह लगता है कि समीकरण को दुरुस्त किया जाए। ब्राह्मणों का मेजर वोट लिया जाए तो कुछ फायदा हो सकता है। इसलिए वो ब्राह्मणों को साधने का हर संभव प्रयास कर रही हैं। अभी चुनाव में लगभग साल भर का साल भर से ज्यादा का टाइम है। तो क्या यह उसके लिए मायावती ने शुरुआत कर दी है, और यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या मायावती जी की तैयार हो रही है, ये सिर्फ वोटर को कंफ्यूज करने के लिए है या उनके पास कोई बाकायदा योजना है या कुछ इस तरह की उनकी प्लानिंग है जिसमें जिसमें वो यह चाहती हैं कि ब्राह्मण और दलित का एक कॉम्बिनेशन बने और उस कॉम्बिनेशन से 2027 में उनके पास सत्ता की बागडोर आए। क्या मायावती उसी दिशा में काम करना शुरू कर दिए हैं? लेकिन क्या ये संभव हो पाएगा यह तो समय ही बता पाएगा।
अपने ही जाल में फंस गई ममता बनर्जी

ममता बनर्जी के लिए बड़ी मुश्किल वाली स्थिति पैदा कर दी है ईडी ने। अब उसमें क्या मुश्किलें हैं? मुश्किलें यह है कि ईडी के मामले में जब सुप्रीम कोर्ट गई थी तो सुप्रीम कोर्ट ने तीनचार चीजें या पांच चीजें ऐसी कही हैं जो ममता बनर्जी के लिए मुश्किल वाली है। अब उसमें सबसे प्रमुख बात यह है कि ममता बनर्जी की सरकार को 15 दिन के अंदर जो उन्होंने ईडी मामले में जिस तरह से वो जाकर के सीडी और पेन ड्राइव पेन ड्राइव और हार्ड डिस्क और फाइल छीन करके आई थी। उसको उस पर जवाब देना है। एक मामला दूसरा मामला जो है वो ये कि जो एफआईआर उन्होंने किया था वो एफआईआर को स्टे कर दिया गया है। तीसरा जो मामला है वह यह है कि यह जोपुलिस है डीजीपी और राजीव कुमार और जो कोलकाता पुलिस कमिश्नर है मनोज वर्माइनको भी सफाई देना है इनको भी अपने क्यों वो वहां पर थे और क्यों वो इस तरह के मामले में इनवॉल्व थे उसका जवाब देना है। तो ये एक सीरियस सा मामला है। इस मामले पर इसको कोर्ट ने कहा है कि ये सीरियस मामला है जो पश्चिम बंगाल में हुआ है वो नहीं होना चाहिए। किसी भी स्टेट को केंद्र की एजेंसी को अगर वो बोना आईडी कोई इस तरह के इन्वेस्टिगेशन में इन्वॉल्व है तो उसको डिस्टर्ब नहीं किया जाना चाहिए। यह डिस्टर्ब नहीं कर सकती है। इसके इसके अलावा जो है जो सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील रखने की कोशिश की कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने । उन्होंने कहा कि ये पूरा का पूरा जो मामला है ये चुनाव के इर्दगिर्द घूम रहा है। उसको उसको भी अदालत ने मानने से मना कर दिया है। तो कुल मिलाकर के यह जो ममता बनर्जी इस मामले में ईडी को घेरने की कोशिश कर रही थी उस मामले में वो खुद घिर गई हैं।
