West Bengal ——दीदी की खिसक रही है गद्दी

इनफोर्समेंट डायरेक्ट की कोलकाता में आईपैक प्रमुख के घर पर छापे ने यहां की पूरी राजनीती गर्मा दी है। कोलकाता में आईपैक के प्रमुख हैं प्रतीक जैन और प्रतीक जैन के घर पर छापे के तुरंत बाद ममता बनर्जी जो है वो उनके घर पहुंच गई। मीडिया को उन्होंने अवॉइड करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को आड़े हाथों लिया और उन्होंने कहा कि ये सारा का सारा जो है वो अमित शाह का किया धरा है। अब इसमें कई फैक्टर्स हैं जिसको समझना चाहिए। सबसे पहली बात यह है कि आईपक एक प्राइवेट कंपनी है और वो इलेक्शन मैनेजमेंट का काम देखती है। अब उसके किसी अधिकारी के उसके किसी उससे संबंधित किसी व्यक्ति के दफ्तर में छापा पड़ता है। तो उसको डिफेंड करने के लिए ममता बनर्जी आ जाती हैं तो एक शक होता है। हालांकि ममता बनर्जी ऐसा पहले भी करती रही है जब 2019 में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार थे अभी वो डीजीपी हैं उनसे सीबीआई एक भ्रष्टाचार के मामले में कुछ पूछताछ करना चाह रही थी तो ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई थी और इसको लेकर के बहुत बवाल हुआ था तो यह इस तरह के काम ममता बनर्जी करती रहती हैं।
आईपैक पर छापा पीछे छुपी बड़ी कहानी

अब यहां आईपैक के मामले में आईपैक में वो खुलकर ऐसा कर रही हैं, अब आईपैक से प्रशांत किशोर जुड़े हुए हैं। उन्हीं की कंपनी है। अब वो चुनाव में सक्रिय रूप से हैं काम कर रहे हैं, अब जिनके घर में छापा मारा गया है जैन साहब प्रतीक जैन इनके जो मतलब ये अभी वो पॉलिटिकल जो कंसलटेंसी है आईपक कंसलटेंसी ग्रुप जो है उसके प्रमुख हैं। अब चूंकि इस बार के चुनाव में प्रशांत किशोर का जो आईपैक है वो ममता बनर्जी के लिए काम कर रहा है। अब ये जो छापा ईडी का है। इसको लेकर के ममता बनर्जी का कहना है कि यह कोशिश है ईडी के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी की कि वो तृणमूल कांग्रेस के डॉक्यूमेंट्स, हार्ड डिस्क और बाकी जो सूचनाएं हैं वो वहां से लेकर के जाए। यह एक आरोप ममता बनर्जी ने लगाया है कि यह जो सर्च ऑपरेशन कराया गया है यह वास्तव में जो तृणमूल कांग्रेस के लिए जो काम कर रहे हैं उनके बारे में जो जो सूचनाएं हैंकि असेंबली के इलेक्शंस नजदीक हैं तो यहां तक कि बहुत सारे नाम फाइनल कर लिए हैं। तो उन सब चीजों की जानकारी हासिल करने के लिए उन सब जानकारी को निकालने के लिए यह किया जा रहा है।ममता बनर्जी का कहना यह है कि प्रदीप जैन, टीएमसी के तृणमूल कांग्रेस के मीडिया सेल और आईटी जो सेल है उसका काम भी देखते हैं। तो उनके पास बहुत सारी जानकारियां ऐसी हैं जो एक्सक्लूसिवली उन्हीं के पास है और ईडी के का जो प्रयास है वो इसी तरह का है कि सारा का सारा जो इंफॉर्मेशन है उनके पास एक जगह हार्ड डिस्क मिल जाएगा और उस हार्ड डिस्क को ही ले जाने की ईडी ने कोशिश की जिसका विरोध करने के लिए ममता बनर्जी वहां पर पहुंच गई। ममता बनर्जी मैंने जैसा पहले कहा कि इस तरह के काम करती रहती है। इस तरह का काम उन्होंने किया है। अब जल्दी ही किसी भी समय वहां पर चुनाव की घोषणा हो सकती है। उन सब परिस्थितियो में इस तरह की चीजें बहुत महत्व रखती हैं।
Corruption के साथ कईं और परेशानियों से गुजर रही ममता

कुल मिलाकर के ये जो साल गुजरा है ये ममता बनर्जी को लगातार एक के बाद एक झटके दे रहा है। चाहे एसआईआर के नाम पर हो, चाहे व प्रॉपर्टी के नाम पर हो, चाहे हुमायूं कबीर का पार्टी छोड़ के जाना हो, चाहे पार्टी में अंदर की आपस की लड़ाई हो, कल्याण बनर्जी और महुआ मोहित्रा और कीर्ति आजाद की ये सारी चीजें जो हैं वो ममता बनर्जी के लिए लगातार मुश्किल पैदा कर रही हैं। मतलब पार्टी के अंदर से की लड़ाई से लेकर के और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की महात्वाकांक्षा जो मुख्यमंत्री अब बनना चाहते हैं इस तरह कीत्वाकांक्षा इन सब से ममता बनर्जी लगातार लड़ती हुई दिख रही है और कुछ लोगों ने तो अब पार्टी भी छोड़ना शुरू कर दिया है। जैसे एक पूर्व सांसद मौसम नूर हैं हां मौसम नूर वो पार्टी छोड़ के चली गई वापस कांग्रेस में कांग्रेस से ही वो आई थी। तो हुमायूं कबीर छोड़ के चले गए तृणमूल कांग्रेस। उन्होंने अपनी नई पार्टी बना ली। तो अगर अगर इस तरह से देखें तो एक के बाद एक मुश्किलें ममता बनर्जी को आ रही हैं और ऊपर से ईडी का है भ्रष्टाचार के बहुत सारे और मामले हैं। जैसे रिक्रूटमेंट में जो टीचर् रिक्रूटमेंट था वो भ्रष्टाचार का मामलाहै। उससे निपटने का मामला है। हिंदुओं की नाराजगी बहुत ज्यादा है ममता बनर्जी से जिस तरह से वो मुस्लिम अपीज़मेंट करती रही हैं। मुसलमान उम्मीद मुसलमानों की उम्मीदें बढ़ी हैं और बढ़ी हैं। जितना मिला है उतने से संतुष्ट नहीं है। वो कह रहे हैं कि हमको अब और बड़ा शेयर चाहिए। तो ये इस तरह की चीजें हैं जो ममता बनर्जी के लिए मुश्किल पैदा कर रही है और ऊपर से ये जो ईडी का रेड हुई है ये इसमें से निश्चित तौर पर कुछ सफाई दें चाहे जो करें लेकिन यह मैसेज भी जरूर जाएगा कि क्या ऐसा भ्रष्टाचार का मामला हैया क्या इस तरह का मामला है जो ममता बनर्जी छिपाने की बचाने की कोशिश कर रही हैं और क्यों ममता बनर्जी को खुद इस तरह के मामलों में कूदना पड़ता है जैसे वो वो राजीव कुमार के मामले में कूदी थी। अब प्रतीक जैन के मामले में कूदी है और शेखशाहजहां के मामले में खुद कूदी थी। ये बड़ा बड़ी बात है जिसका मैसेज जो है वो खराब जाता है। तो ये बहुत सारे चैलेंजेस हैं जो ममता बनर्जी के सामने हैं। ममताबनर्जी को उनसे डील करना है। वह कैसे डील कर पाती हैं। यह तो आने वाले समय मेंबताएगा। लेकिन यह मुश्किलें लगातार ममता बनर्जी के बढ़ती जा रही है।
