West Bengal दो हाथ मिल गए हैं क्या चाणक्य के दिमाग की देन – दीदी को  बड़ी चुनौती 

AIMIM  के मुखिया असुउदुद्दीन ओवैसी के ऐलान से बंगाल में बड़ा सियासी उल्टफेर शुरू हो गया है, AIMIM यानी ओवैसी ने TMC  विधायक और बाबरी मस्जिद बनाने वाले हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन का  ऐलान कर दिया। हुमायूं कबीर भारतपुर से विधायक और कभी  तृणमूल कांग्रेस के बड़े कद्दावर और ममता के करीबी माने जाते थे पर जब उन्होंने  मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज़ पर एक नई मस्जिद बनाने के की बात कही उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया फिर उन्होंने  2024 में आम जनता उन्नयन नाम की अपनी पार्टी का गठन कर लिया अब औवैसी इसी पार्टी से हाथ मिला चुके हैं और ममता की नींदे उडी हुई हैं। इसके पीछे कई वजह हैं सबसे पहले तो ये गठबंधन सीधा ममता के मुस्लिम वोट बैंक को तोडेगा और इससे कहीं ना कहीं बीजेपी को फायदा होगा ही।  पश्चिम बंगाल में टोटल 294 सीटों पर चुनाव है और माना जाता है कि 114 सीट ऐसी हैं जिन पर मुस्लिम पॉपुलेशन बहुत ज्यादा है और उनके वोट काफी हद तक डिसाइड करते है कि वहां से कौन जीतेगा कौन हारेगा। तो 294 सीट में से हुमायूं कबीर ने 182 सीटों पर लड़ने का फैसला किया है। और ओवैसी और हुमायूं कबीर ने मिलकर आठ सीटों पर गठबंधन करने की घोषणा की है।ये सीटें हैं बीरभूम में, मालदा में और मुर्शिदाबाद में। जहां मुस्लिम पॉपुलेशन मेजॉरिटी में है तो वहां की आठ सीटों पर अगर मुस्लिम पॉपुलेशन इधर झुकती है तो जाहिर सी बात है ममता के लिए बहुत बड़ी एक चुनौती भी होगी कि कैसे अपने वोटर्स को संभाल कर रखे क्योंकि उसे पहले ही बहुत ज्यादा चुनौती मिल रही है।

Bihar का दांव औवैसी West Bengal में खेल रहे हैं 

 अब जब से ओवैसी ने  गठबंधन का ऐलान किया है वो भी लगातार ममता पर हमला बोल रहे हैं , क्योंकि अब उनको  पश्चिम बंगाल में दिखाना है कि वो कितने बड़े हितेषी हैं मुसलमानों के और वो कह रहे हैं ममता बनर्जी को लेकर कि 30% आबादी है बंगाल की लेकिन अभी तक पश्चिम बंगाल में कोई भी डिप्टी सीएम या सीएम
मुस्लिम नहीं बनाया गया है। तो ये राजनीति है यहां पर सब चलता है और ओवैसी को पता है किस तरह से वहां पर मुस्लिम वोटर्स कोतोड़ने का काम वो करेंगे जैसा कि उन्होंने बिहार में किया था।  बिहार में भी ओवैसी ने यही नारा दिया था, उन्होंने यादव वर्सेस मुस्लिम पॉपुलेशन कर दिया था कि जब मुस्लिम इतने ज्यादा हैं तो मुस्लिम नेता कभी कोई सीएम या डिप्टी सीएम क्यों नहीं बनता और इससे काफी हद तक मुस्लिम वोट कटे थे और ओवैसी के खेमे में आए थे और यही वो पश्चिम बंगाल में नारा लेकर पहुंचे हैं कि  यहां पर 30% के लगभग  जनसंख्या है तो  अभी तक वहां का डिप्टी सीएम और सीएम मुस्लिम क्यों नहीं बना और साथ में उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी ने 5 लाख पिछड़े लोगों का प्रमाण पत्र है रद्द किया है और इसमें बहुत सारे मुस्लिम थे और मुस्लिमों के हिस्सों की बात ममता बनर्जी ऊपर ही तौर पर करती है लेकिन अंदर ही अंदर वो ऐसा कुछ नहीं करती हैं। तो यह जो गेम नया शुरू हुआ है इससे राजनीति जो है काफी गरमा  गई है और
खास पर खासतौर पर ममता बनर्जी के सामने बहुत बड़ी चुनौती तो क्योंकि एक तरफ पहले से ही बीजेपी बहुत ज्यादा एग्रेसिव है तो एक तरफ ममता बनर्जी वैसे ही अपनी कुर्सी छीनने के डर से घबराई हुई है इस बार बीजेपी बहुत ज्यादा अग्रेसिव है और दूसरा  ओवैसी और हुमायूं कबीर का गठबंधन उन्हें कड़ी चूनौती देगा ।

Mamta यह चुनाव बंगाल की अस्मिता से जोड़ कर Voters को एकजुट कर रही 

बीजेपी के जो कद्दावर नेता हैं बंगाल में वो लगातार ममता बनर्जी पर हमला कर रहे हैं,  और दिलीप घोष ने तो यहां तक कह दिया है कि ममता बनर्जी ने जो पश्चिम बंगाल है उसकी स्थिति बांग्लादेश जैसी कर दी है। यहां पर लगातार मंदिर तोड़े जा रहे हैं। हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं। लेकिन ममता बनर्जी कुछ नहीं कर रही हैं। वहीं बीजेपी यहां पर बेरोजगारी का, भ्रष्टाचार का और घुसपैठियों का मुद्दा लेकर सामने आई है। जोर शोर से ममता पर वो हमला कर रही है कि घुसपैठियों के चक्कर में जो वहां के अपने जो बंगाली हैं उनका हक छीना जा रहा है। बेरोजगारी बहुत ज्यादा है। भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है और लगातार वो ममता बनर्जी पर इसको लेकर हमले कर रही है।   ममता बनर्जी का एक नारा है  और वो बंगाली और गैर बंगाली और  बंगाल का वचन बंगाली का वचन इसपर बंगाल में प्रचार-प्रसार कर रही हैं, वह दिखा रही है कि बंगाल की जनता को वही संभाल सकती हैं। बंगाली लोगों को संभल कर रहना पड़ेगा गैर बंगालियों से जो बंगाल में आकर अपना राज करना चाहते हैं। कुछ इसी तरह का कैंपेन है और यहां एक और बात ममता बनर्जी भुनाने की कोशिश कर रही है कि पिछले कुछ समय पहले जब कुछ और राज्यों में बंगालियों पर हमला हुआ था तो ममता बनर्जी उसको बीजेपी से जोड़ रही है कि बीजेपी के शासन में जहां-जहां बीजेपी है और बंगालियों को पहचान कर उन पर हमला हुआ। इसलिए बंगालियों को अपनी अस्मिता बचानी है। बंगाल की अस्मिता बचानी है और बीजेपी से दूर रहना है।

BJP ने भ्रष्टाचार-बेरोजगारी का मुद्दा उठाया 

तो बीजेपी और ममता दोनों ने अलग-अलग यहां पर  अलग अलग  लाइनें पकड़ी हुई है। जहां बीजेपी की लाइन है, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, घुसपैठियों का मुद्दा। वहीं ममता अपने पुराने राग पर बंगाली वर्सेसगैर बंगाली के राग पर चुनाव लड़ना चाह रही है और लड़ भी रही है। कैंपेन भी शुरू हो गया है। और इन सबके बीच जब ओवैसी और
हुमायूं कबीर का गठबंधन वहां पहुंच गया है। तो जाहिर सी बात है ये ममता के लिए बेचैनी की बात है। बीजेपी को इससे ज्यादा खतरा नहीं है। क्योंकि बीजेपी को पता है उसको वैसे भी मुस्लिम वोट बहुत कम मिलते हैं ना के बराबर मिलते हैं। तो उसके वोट नहीं कटेंगे। सीधे यहां पर ममता बनर्जी के वोट कटने वाले हैं।
वैसे  औवेसी और हुमायू कबीर के मिलन की बात उस समय भी उड़ी थी जब  हुमायूं कबीर ने  दिसंबर 2024 में नई पार्टी बनाई थी तब भी इस बात की अटकलें लगाई जा रही थी कि ओवैसी अब जरूर पश्चिम बंगाल पहुंचेंगे और हुमायूं कबीर से हाथ मिलाएंगे और वो जो अटकलें थी जो खबरें थी वो बिल्कुल अब खुलकर सामने आ रही है। बातें बहुत पहले से चल रही थी लेकिन अब ऐलान कर दिया ओवैसी ने बताया कि आठ सीटों पर लड़ेंगे जहां पर मुस्लिम पॉपुलेशन मेजॉरिटी बहुत ज्यादा है, वैसे बंगाल में 294 सीटों में से 114 सीटें ऐसी हैं जहां पर
मुस्लिम वोटर्स बहुत बड़ी भूमिका अदा करते हैं उम्मीदवार को हराने या जिताने की|   अब चर्चा यही है कि क्या ये बीजेपी का खेला है या फिर मुस्लिम नेता और वोटर्स बंगाल में अपना  वर्चस्व बनाना चाहते हैं, कुछ सवालों के जवाब समय ही देगा

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