जो बातें सामने आ रही है उससे लग रहा है कि इतने पुराने दोस्त अमेरिका और इजराइल, और अब ऐसा क्या हो गया है कि दोनों में कहीं ना कहीं बहु ज्यादा कड़वाहट लग रही है। जिस तरह के बयान आ रहे हैं चाहे वो ट्रंप के बयान हो चाहे वो नित्नयाहू के उससे लग रहा है कि रिश्तों में बहुत ज्यादा खटास आ गई है लेकिन इन सबके बीच चर्चा यह भी है कि क्य यह सिर्फ दिखावा है। वास्तव में यह दोनो एक ही हैं और जानबूझकर कुछ ऐसी स्ट्रेटज अपना रहे हैं कि लोगों को लगे या विश्व के नेताओं को लगे कि दो देशों में खटास आ गई है और दोनों अपनी तरह से काम करते रहें, साथ ही इस कड़वाहट का भारत पर क्या असर पड़ेगा तमाम बातों की चर्चा की Former Major General P K Sehigal से
Ques —तो सर क्या यह दिखावा है, अंदर से इजारायल और अमेरिका एक ही हैं और अपनी मनमर्जी कर रहे हैं
Ans—ये इशू बहुत इंपॉर्टेंट है। सारी दुनिया इसको बड़ी आसानी से समझने की कोशिश कर रही है। लड़ाई से पहले मिडिल ईस्ट में सबसे महत्वपूर्ण अमेरिका का पाटनर इजराइल ही है और बना रहेगा हां, इस समय बहुत बड़े पैमाने पर दोनों देशों के अंदर दरार आ गई है, ईरान की जबरदस्त कोशिश है कि अमेरिक और इजराइल के बीच में खटास पैदा कर दे और कुछ हद तक वो सफल हो गया है। इस समय ट्रंप इनके ऊपर जबरदस्त इकोनमिकल पोलिटिकल प्रेशर है जिसकी वजह से वो चाहते हैं कि मिडिल ईस्ट में किसी ना किसी जंग को रोक जाए स्टेट ऑफ हार्मूज को खुलवाया जाए जिससे सारी दुनिया जो है परेशान है और वो नहीं खुल सकती जब तक लेबनान में लड़ाई बंद नहीं होती पर इजराइल साफ तौर पर कह रहा है की जो तीन महत्वपूर्ण मुद्दे थे सबसे पहले न्यूक्लियर इशू दूसरा उनकी मिसाइलकैपेबिलिटी और तीसरा प्रोक्सिस उनमें से एक भी अचीव नहीं हुआ और 60 दिन के नेगोशिएशन के अंदर मिसाइल कैपेबिलिटी और प्रोक्सिस के ऊपर बातचीत नहीं हो रही और केवल बातचीत तो nuclear deal होगी के ऊपर होगी। इजरालय को साफ लग रहा है कि उसे साइड लाइन किया गया और अहम मुद्दों पर बात नहीं हुई , किसी प्रकार से इजराइल को कॉन्फिडेंस भी नहीं रखा गया ,इजराइल प्रिंसिपल स्टेक होल्डर लेकिन उसको नजर अंदाज किया गया तो वो कहता है कि जब हमारे ऊपर अगर थ्रेट है तो हम अगर अकेले लड़ाई करनी पड़ी तो हम करने के लिए तैयार हैं , दूसरा ट्रंप पर अलग तरह का प्रेशर है और यही वजह है दोनों देशों में दरियां बढ़ी। पर बावजूद इसके अमेरिका साफ तौर पर जानता है मिडिल ईस्ट में अमेरिका को अपने कोस्टब्लिश करना है और उसी माफिक करना जैसे पहले थे तो उसको इजराइल की आवश्यकता है इसलिए इस दरार के बावजूद इनके रिश्तेदार अच्छे रहेंगे अंदर ही अंदर, क्योंकि इजराइल भी यही जानता है कि उसको अगर अमेरिका का सपोर्ट नहीं मिले तो वास्तव में वो कुछ नहीं कर सकता क्योंकि अमेरिका से ही इसको स्पेयर पार्ट्स मिलते हैं। अमेरिका से ही वो बंकर बस्टर अच्छा मिल रहे हैं।
Ques—जिस तरह से ट्रंप उपदेश दे रहे हैं , इजराइल को लेकर वो नित्नियाहू के लिए लागू करना बहुत मुशिकल है क्योंकि अगर वोलेबना न से अपनी सेना वापस बुलाते हैं तो कहा जा रहा है कि विद इन कंट्री उनकी साख बहुत ज्यादा गिर जाएगी। तो अगर वो सेना वापस बुलाते हैं तो विद इन कंट्री वो कहते हैं कि लोगों का जो ट्रस्ट है उन पर वो खत्म हो जाएगा। अगर वो सेना नहीं बुलाते तो अमेरिका उनका दोस्त नाराज हो रहा है। तो आपको लगता है कि कहीं ना कहीं बहुत ही ऑकवर्ड पोजीशन में इस समय इजराइल घिरा हुआ है।
Ans—— इसमें किसी प्रकार की दो राय नहीं है, नित्नियाहू को इलेक्शन लड़नी है अक्टूबर में। उसको साफ तौर पे नजर आ रहा है कि इलेक्शन बुरी तरह से हार सकता है। सत्ता से भी जाएगा और जेल में भी जाएगा कोप्शन की वजह से। इसलिए वो चाहता है किसी ना किसी तरीके से ये एमओयू जो है ये कामयाब ना हो। उसके जो हार्ड लाइनर्स है वो कहते हैं किसी प्रकार से कॉम्प्रोमाइज नहीं करो। मतलब ईरान और अमेरिका का युद्द चलता रहे। लेकिन ईरान ने साफ तौर पर कहा कि आपको लेबनान की लड़ाई रोकनी पड़ेगी और और लेबनाम की जो टेरिटोरियल इंटेग्रिटी है जिसको इजराइल ने वायलेट किया हुआ है वो वहां से इजराइल को हटना पड़ेगा और इजराइल वहां से हटने के लिए तैयार नहीं उसको साफ तौर पर ट्रंप ने बोला है कि हम तो ये कारवाई करते रहेंगे क्योंकि हिजबुल्लाह की तरफ से हमारे ऊपर हमले हो रहे हैं और अब उसने कहना शुरू कर दिया कि अगर हजबुल्लाह की तरफ से हमले बंद हो जाए तो हमारी तरफ से भी हमले बंद हो जाएंगे लेकिन अपनी फार्सेस को वहां से नहीं हटाएंगे।
Ques— अमेरिका की हम बात कर रहे हैं उसके इजराइल के साथ रिश्ते खराब हो रहे हैं। इजराइल से भारत की दोस्ती बहुत ज्यादा अच्छी है पर अमेरिका का एक स्ट्रेटजी है कि जो भी भारतका दोस्त है वो चाहता है कि भारत से दूर हो जाए। रशिया इसका जीता जागता एग्जांपल है। तो क्या दो दोस्तों के बीच दरार से भारत पर असर पड़ेगा
Ans—जहां तक अमेरिका का ताल्लुक है, अमेरिका कभी भी कोशिश नहीं करेगा कि हिंदुस्तान और इजराइल के रिश्ते खराब हो। जी वो तो चाहेगा कि हमारे हिंदुस्तान की दोस्ती उतनी ही कायम रहे जितनी जितनी पहले थी। वास्तव में हिंदुस्तान ही केवल एक एक ऐसा देश है जिसके रिश्ते नाते रशिया के साथ भी अच्छे हैं। अमेरिका के साथ भी अच्छे हैं। इजराइल के साथ भी अच्छे हैं। ईरान के साथ भी अच्छे हैं। अमेरिका जैसे कि मैंने शुरू में कहा कि लड़ाई से पहले अमेरिका सबका सबसे क्लोजेस्ट लाइफ मिड लिस्ट में इजराइल था और अमेरिका को अपनी एमिस अगर बनानी है तो इस दरार के बावजूद उनके रिश्ते नाते में कोई भी दरार नहीं आएगी आफ्टर पॉइंट ऑफ़ टाइम ऐसे में अमेरिका किसी प्रकार से नहीं चाहेगा कि हिंदुस्तान के रिश्ते नाते इजराइल से बिगड़े क्योंकि हिंदुस्तान साफ तौर से जानता है की जब जब हिंदुस्तान को आवश्यकता पड़ी इजराइल ने साथ दिया, जब हिंदुस्तान ने पोखरन का ब्लास्ट किया तो सारी दुनिया ने वेस्टर्न वर्ल्ड ने हमारे ऊपर सेक्शन लगाई केवल दो देशों ने हिंदुस्तान को कांग्रेचुलेट किया इजराइल और फ्रांस लेकिन फ्रांस बाद में अंडर प्रेशर फ्रांस ने कांग्रेचुलेशन नोट विड्र कर लिया लेकिन हां सेक्शन नहीं लगाई लेकिन इजराइल ने हिंदुस्तान को कहा शाबाश बहुत अच्छा काम किया है
