Bihar —दो नेताओं की दोस्ती बीजेपी ने कर ली तीन सीट पक्की

बिहार चुनाव से पहले भोजपुरी सुपर पावर स्टार पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाह की मुलाकात ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया, बताया जाता है इस मुलाकात को करवाने के लिए बीजेपी नेताओं ने मेहनत की और बीजेपी नेता ऋतुराज सिन्हा भी बाकायदा इस मुलाकात में दोनों के साथ थे। आपको बता दें कि पवन सिंह ने NDA में री एंट्री करने के लिए रिएलिटी शो राइज एंड फॉल भी छोड़ दिया। बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने इस मुलाकात के बाद बाकायदा बयान दिया कि पवन सिंह अब NDA में ही हैं और बिहार में NDA को जीत दिलाने के लिए काम करेंगे। वैसे इसके पीछे की कहानी समझना जरूरी है कि पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाह को मिलाने के पीछे बीजेपी क्यों उत्सुक थी दरअसल जब पवन सिंह ने बिहार के काराकाट से लोकसभा चुनाव लड़ा तो बड़ी संख्या में राजपूत वोटरों ने उन्हें वोट दिया जिसके कारण पवन सिंह जीते तो नहीं लेकिन वोट कटने से उपेंद्र कुशवाहा जरूर हार गए। और इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा के चाहने वाले बहुत नाराज हुए और उन्होंने ऐसा अभियान चलाया कि आरा और औरंगाबाद लोकसभा सीटों पर NDA के खिलाफ वोट कर दिया। जिसके कारण आरा में BJP नेता आरके सिंह तो औरंगाबाद में सुशील कुमार सिंह चुनाव हार गए। लेकिन इस बार बीजेपी आलाकमान बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और दोनों ही नेताओं की दोस्ती करवा कर विधानसभा चुनाव में राजपूत वोटों और कुशवाहा वोटर को अपने पाले में कर लिया है कम से कम तीन सीटों पर जीत के लिए आश्वस्त हो गई है।

Bihar – ये 6 नए दल BJP Congress JDU के लिए बड़ा खतरा

बिहार में विधानसभा चुनाव में इस बार जबरदस्त खेला होने वाला है इसके पीछे बड़ी वजह है कि इस बार छोटे -बडे लगभग 200 दल चुनाव में उतरने जा रहे हैं पर चर्चा हो रही है उन 6 दलों की जो bjp , congress, jdu, rjd जैसी बड़ी पार्टियों का वोटों का समीकरण बिगाड़ सकते हैं। ये दल पहली बार बिहार का चुनाव लड़ने जा रहे हैं पर इनकी वोट काटने की क्षमता से बड़े दल काफी परेशान हैं, इनमें सबसे पहला नंबर पूर्व चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नई पार्टी ‘ जन सुराज पार्टी का है जो कईं जगहों पर बड़े दलों के उम्मीदवारों का हार-जीत का समीकरण बिगाड़ सकती है इसके बाद अखिल भारतीय पान महासंघ के अध्यक्ष इंजीनियर आईपी गुप्ता की पार्टी इंडियन इंकलाब पार्टी की भी चर्चा है। कहा जा रहा है इंजीनियर साहिब तांती-ततवा समाज के वोटों के सहारे जीत की आस लगाए बैठे हैं। इसके बाद लालू परिवार से अलग होकर तेज प्रताप यादव की ‘जनशक्ति जनता दल चाहे किसी और के वोट काटे ना काटे rjd के वोट तो जरूर काटेगी। वैसे bjp और jdu से नाराज चल रहे उनके बड़े खास और कद्दावर नेता आरसीपी सिंह ने भी अपनी पार्टी आप सबकी आवाज, बनाकर इन दोनों दलों की नींदे खराब कर दी हैं। फिर उतर प्रदेश के दो दल चंद्रशेखर आजाद और ओम प्रकाश राजभर ने बिहार में अपनी किस्तम अजमाने के लिए यहां चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। इससे दलित वोटों के कटने की पूरी संभावना बन गई है, अब देखना यही है कि यदि वोट काटने के साथ अगर ये दल एक -दो सीट ले भी आते हैं तो कौन सी बड़ी पार्टी इनसे समझौता करने में सफल होती है और इनहें बिहार में कौन सा खास ओहदा देकर मनाया जाता है।

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