BJP ने उपेक्षित कर रखा था पर बुरे समय में आए मोदी के काम – मुख्तार अब्बास नकवी

मुख्तार अब्बास नकवी अब लोगों की याददाश्त में भी नहीं है, मंत्रालय उनके पास से चला गया, पार्टी की भी कोई जिम्मेदारी नहीं है। लेकिन कई कई बार इस तरह के वरिष्ठ नेता की बड़ी भूमिका होती है। और कम से कम अभी जब ईरान और अमेरिका का वॉर चल रहा था उस दौरान जिस तरह से उनकी भूमिका की चर्चा हो रही है वो महत्वपूर्ण है। क्योंकि वो शिया नेता हैं। ईरान एक शिया कंट्री है और उनके जो अभी ईरान के राजदूत हैं भारत में उनसे नकवी की अच्छी मित्रता है और अच्छे संबंध हैं। उसका उपयोग भारत सरकार ने किया और इस तरह की खबरें आ रही है कि जो भारत को थोड़ी सहूलियत मिल पाई है ईरान से विशेष रूप से स्टेट ऑफ हार्मूज से पास होने भारतीय जहाजों के पास होने की उसमें नकवी की बड़ी भूमिका है। दोनों नेताओं की एक गुपचुप लेकिन लंबी चर्चा हुई और उस चर्चा के बाद बहुत सारी चीज निकल कर के आए और उसी के बाद जो ईरान के जो राजदूत है उन्होंने ना केवल भारत के भारत की सराहना की थी मिडिल ईस्ट में उनकी भूमिका लेकर के बल्कि कोविड के समय में भी जिस तरह से ईरान को और बाकी अन्य देशों को भारत ने मदद की थी उसकी बात भी की थी और भारत और ईरान केजो सैकड़ों साल पुराने संबंध हैं उनके बारे में भी चर्चा की थी। मुख्तार अब्बास नकवी हमेशा से प्रधानमंत्री के बहुत खास माने जाते हैं। वह तब भी बहुत उनके खास थे जब वह मुख्यमंत्री थे। गुजरात के तो उस दृष्टि से अगर देखा जाए तो एक बार फिर उनकी उपयोगिता साबित हुई और प्रधानमंत्री ने उनकी उपयोगिता को इस्तेमाल किया। इसके बाद इन सब चीजों के मतलब यह सब जो डेवलपमेंट हुआ उसके उन डेवलपमेंट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो ईरान के राष्ट्रपति उनसे बातचीत हुई और भी बहुत सारी चीजें निकल कर के आई और बहुत सारे और डेवलपमेंट उसके बाद हुए जो भारत को फायदा किए।
मल्लिकार्जुन खड़गे की बिगड़ी भाषा फिर Congress पर उल्टी पड़ सकती है

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बार फिर विवाद पैदा कर दिया है। जो उनका बयान है भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर के वो लगातार इस तरह की बयानबाजी करते रहते हैं और वो इसको लेकर के उनकी आलोचना भी होती रही है। लेकिन अभी एक बार फिर उन्होंने इस तरह की बात कही जो उनका बयान है उस हिसाब से कि कुरान में भी कुरान में भी ये लिखा हुआ है कि अगर आप ऑफर कर रहे हैं नमाज ऑफर कर रहे हैं और सांप आ जाए तो उसको मार देना चाहिए। इस तरह के बयानों की खबर छपी हुई है। तो दो चीजें हैं। एक तो यह कि एक बार फिर उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना सांप से की है। और दूसरा यह कि उन्होंने इंस्टिगेट करने की कोशिश की है। जो आरएसएस और बीजेपी के खिलाफ उन्होंने मुसलमानों को इंस्टिगेट करने की कोशिश की है। कम्युनल वायलेंस फैलाने की कोशिश की है। और इस कम्युनल वायलेंस के कारण जो मामला आया है इसको लेकर केजो भाजपा के नेता हैं उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की है और प्रेस कॉन्फ्रेंस में आलोचना की है। लेकिन ये आरोप प्रत्यारोप तो चलेंगे लेकिन क्या कांग्रेस को ऐसा लगता है कि संघ के बारे में या भारतीय जनता पार्टी के बारे में इस तरह के डेरोगेटरी बात करके उनको वोट मिलने वाला है। यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी को बहुत थोड़ी मात्रा में मतलब 1% भी कहना ठीक नहीं होगा। 1% या मान लीजिए एक दो% से ज्यादा मुसलमान भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं करता है। यह सारा वोट जाता है उन राजनीतिक दलों को जो मुस्लिम अपीज़मेंट करते हैं या भारतीय जनता पार्टी को हराने में सक्षम है। तो अगर आसाम में अगर पश्चिम बंगाल में कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी को हराने के में सक्षम है तो यह वोट उनको जाएगा। नहीं तो यह वोट उस पार्टी को जाएगा जो भारतीय जनता पार्टी को हरा पाएगी। तो क्या इस बात को समझते हुए वो बीजेपी और आरएसएस के बारे में इस तरह की बयानबाजी करते हैं कि हम इस तरह की बयानबाजी करेंगे तो एक मुस्लिम वोट आएगा। लेकिन यह बहुत बड़ा कंफ्यूजन है। राजनीतिक असमझ है कि सिर्फ इस बयानबाजी में से कोई फर्क पड़ने वाला है। महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी को उन जगहों पर हरा पाने में सक्षम है? विशेष रूप से हिंदू डोमिनेटेड एरियाज में आसाम और पश्चिम बंगाल दोनों की बात है, केरल की भी बात है, तमिलनाडु की बात भी है, और इसीलिए ये सारी बयानबाजी के बाद भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम नहीं है।
Punjab में Congress – BJP को एक नई पार्टी चुनौती देने के लिए खड़ी सिंह सिद्धू

नवजोत कौर सिद्धू, क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी ने पंजाब में एक नई पार्टी की का गठन किया है। उनको कांग्रेस से निष्कासित कर दिया था। जब उन्होंने यह बयान दिया था कि मुख्यमंत्री बनने के लिए आपके पास 500 करोड़ रूपए होने चाहिए,उसके बाद उनको पार्टी से निकाल दिया गया था और यह लंबे समय से जो विवाद कांग्रेस में चला आ रहा था विशेष रूप से जब कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे तब नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह का था विवाद। फिर जब कैप्टन अमरिंदर सिंह को उनको मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र उन्होंने दे दिया और चरणजीत च्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया। तो चरणजीत सिंह के साथ विवाद चलना चलना शुरू हो गया। इसलिए कि नवजोत सिंह सिद्धू को यह अनुमान था कि शायद उनको मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा कैप्टन अमरिंदर सिंह के हटने के बाद। लेकिन वैसा नहीं हुआ। भारतीय जनता पार्टी अब उनको एक्सेप्ट करने के लिए नहीं तैयार है। भारतीय जनता पार्टी उनको लंबे समय तक टोलरेट करती रही है। बावजूद इसके कि उनके अच्छे संबंध नहीं थे अकालियों के साथ, अकाली दल के साथ और अब वह जो है अकालियों के साथ भारतीय जनता पार्टी का अलायंस भी टूट गया है। उसके बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी जो है उनको अपने साथ लेने के लिए तैयार नहीं है। उसके पीछे यह है कि वो जिस तरह की बयानबाजी करते हैं वह कई कहीं भी कभी भी किसी भी राजनीतिक दल को के बड़े नेता को एंबरेस कर सकते हैं। और जिस तरह से उनका पिछले दो-ती साल का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। जिस तरह से उन्होंने कांग्रेस के बड़े नेताओं के खिलाफ बयानबाजी की है। वह किसी के खिलाफ भी शुरू हो सकते हैं। यह इस इस तरह के एंबरेसमेंट से बचने के लिए भाजपा उनको एक बार फिर स्वीकार करने के लिए नहीं तैयार है। लेकिन यह जो नई पार्टी का भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी का गठन हुआ है। इससे 2027 के चुनाव में कितना फर्क पड़ेगा? क्या फर्क पड़ेगा? का यह महत्वपूर्ण है इसलिए कि कुछ इलाकों में नवजोत सिंह सिद्धू का प्रभाव है और अगर वह 2000 -4000 भी वोट डालेंगे तो यह बड़ा इंटरेस्टिंग होगा जो इसलिए कि अब बहुत सारे प्लेयर हो गए हैं। शिरोमणि अकाली दल के भी कई धड़े हैं। आम आदमी पार्टी है ये कांग्रेस है भाजपा है। ये तो ये बड़ा एक इंटरेस्टिंग होने वाला है।
