राहुल की दोस्ती नहीं चलती  लंबे समय —अब स्टालिन से दोस्ती टूटने के कगार पर 

राजनीतिक गलियारों में यह बात हमेशा चर्चा में रहती है कि राहुल गांधी ज्यादा देर तक किसी के साथ ना तो दोस्ती निभा सकते हैं ना ही अच्छे संबंध बनाकर रख सकते हैं, वैसे इसके पीछे कारण यही माना जाता है कि एक समय के बाद  दोस्त की लोकप्रियता, बढ़ता कद राहुल को खलने लगता है और राहुल अपने आप को  असुरक्षित महसूस करना शुरू कर देते हैं और  अपने दोस्तों को ही साइड लाइन करना शुरू कर देते हैं, अब  तमिलनाडु के सीएम एम के स्टालिन और राहुल गांधी की दोस्ती एक समय में काफी चर्चा में रही थी, स्टालिन ने एक बार यह तक कह दिया था कि राहुल गांधी के अलावा उन्होंने किसी और  भाई नहीं कहा है, खुद राहुल गांधी भी स्टालिन को बिग ब्रदर ही कहते थे।  पर आज हाल ये है कि राहुल गांधी ना उनसे बात करना पसंद करते हैं और ना ही उनके साथ एक मंच पर जाना पसंद करते हैं

तमिलनाडु में चुनाव पर  राहुल गायब ——पांडुचेरी में भी नहीं किया स्टालिन के साथ मंच साझा 

 

जी हां हाल ये है कि तमिलनाडु में चुनाव है और राहुल ने अभी तक वहां  एक बार भी प्रचार नहीं किया है और स्टालिन और राहुल अभी तक तमिलनाडु में  एक मंच पर नहीं आए हैं। जबकि दूसरी तरफ  पीएम मोदी तमिलनाडु के तीन दौरे कर चुके हैं। ब जाहिर सी बात है कि चुनावी माहौल में राहुल की इस   दूरी से चर्चा यही चल निकली है कि क्या DMK और Congress के बीच कुछ ठीक नहीं है । वहीं दूसरी तरफ पांडुचेरी में Congress और Dmk मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं पर राहुल गांधी ने   पुडुचेरी का दौरा तो किया और साथ ही कांग्रेस उम्मीदवारों और गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए समर्थन भी मांगा पर  गठबंधन सहयोगी डीएमके और उसके पदाधिकारी M K स्टालिन का जिक्र तक नहीं किया,  यही नहीं स्टालिन भी उसी दिन पुडुचेरी में थे, जब राहुल वहां चुनाव प्रचार कर रहे थे पर साफ लगा कि दोनों के चुनाव  प्रचार कार्यक्रम इस तरह से तय किए गए थे कि वे एक-दूसरे के रास्ते में न आएं। जहां राहुल गांधी ने सुबह प्रचार किया, वहीं स्टालिन शाम को दौरे पर आए। दोनों ने यहां एक मंच भी साझा नहीं किया। डीएमके के कुछ नेता दबे स्वर में कह भी रहे हैं कि राहुल ने अपने भाषण में स्टालिन का नाम तक नहीं लिया और न ही स्टालिन ने उनका जिक्र किया है और हाल ही में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच यह दूरियां आई लगती हैं।

राहुल ने पहले भी दिया है अपने दोस्तों को दगा

 वैसे जैसा का ही हमने पहले कहा था कि राहुल का तो रिकार्ड भी रहा है  कि कोई  भी नेता की चाहे वो राहुल का दोस्त हो या राजनितिक पाटनर , उसका कद यदि बढ़ने लगता है, ज्यादा लोकप्रिय होने लगता है तो वो राहुल को बर्दाश नहीं होता और वो उससे किनारा करना शुरू कर देते हैं, अब जाहिर सी बात है कि साउथ में स्टालिन का कद लगातार बढ़ रहा है और शायद यही बात राहुल को नागवार गुजर रही है और वो उससे दूरियां बनाने लगे हैं, वैसे जनता को याद भी होगा कि राहुल ने इसी तरह अपने कईं दोस्तों की खुलेआम उपेक्षा की है जिससे दुखी उनके दोस्तों को Congress ही छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। जैसे कि राहुल के चार वो दोस्त , जिनके साथ राहुल की दोस्ती के किस्से मशहूर रहे हैं ,  इनमें से एक को छोड़कर बाकी सब बीजेपी और दूसरे दल में चले गए हैं, कारण इनकी बढ़ती लोकप्रियता भी राहुल को पसंद नहीं आई औप पार्टी में अपनी उपेक्षा से दुखी सभी ने राहुल का दामन छोड़ दिया।  सबसे पहला नाम तो राहुल के बचपन से दोस्त रहे  ज्योतिरादित्य सिंधिया का ही है, अकसर वो खुले तौर पर राहुल को सलाह देते नजर आ जाते थे, पर जिस तरह से कांग्रेस में उनकी उपेक्षा हुई वो सबने देखा, राहुल की यंग ब्रिगेड टीम में  जितिन प्रसाद  का नाम भी शामिल था पर वो भी राहुल की उपेक्षा का शिकार BJP का दामन थामने को मजबूर हो गए थे, महाराष्ट्र के यंग नेता और राहुल के अच्छे दोस्त रहे मिलिंद   देवणा ने भी राहुल गांधी से निराश होकर Congress छोडी है।अब राजस्थान में  सचिन पायलट  ही इकलौते ऐसे नेता बचे हैं जो राहुल के दोस्त माने जाते हैं पर वो भी पार्टी में अपनी उपेक्षा को लेकर कईं बार बोल चुके हैं और कब वो भी Congress से किनारा कर लें किसी को पता नहीं है।