UGC एक बार फिर बीजेपी ने शुरूआत की
यूसीसी को लेकर के एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है। गृह मंत्री ने कहा है कि वो 2029 तक जो बीजेपी और एनडीए रूल्ड स्टेट्स हैं वहां पर यूसीसी लागू कर देंगे। अब यूसीसी लागू करने के लिए जो जरूरी मैंडेट है बहुत सारे प्रदेशों में है। कुछ ऐसे प्रदेश हैं जहां पर शायद मुश्किल हो एनडीए के जैसे बिहार के नेताओं ने इस बात पर विरोध शुरू कर दिया है कि वहां यूसीसी लागू होगा। लेकिन अगर गृह मंत्री ने ऐसी बात कही है तो वो सहमति बना लेंगे। अब यूसीसी ऑलरेडीउत्तराखंड में लागू हो गया है। गुजरात में समिति बन गई है। उसके अलावा गोवा में पहले से ही लागू है। मध्य प्रदेश में प्रक्रिया में है। तो इस तरह से गुजरात में प्रक्रिया में है। तो उत्तर प्रदेश में भी पोल प्रॉमिससेस में है। तो ये ये सारी चीजें एक के बाद एक हो रही हैं। गुजरात उसके बाद पश्चिम बंगाल भी आएगा। अब इसको लेकर के बहुत सारा विरोध शुरू हो गया कि जब केंद्र सरकार में बहुमत में थी तब क्यों नहीं किया। लेकिन जो हमेशा से आर्गुमेंट पॉलिटिकल एनालिस्ट करते रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी इसको स्टेट स्तर से शुरू करना चाह रही है और उसके बाद इसको केंद्र में ले आना चाह रही है। इसको केंद्र के माध्यम से नहीं ले जाना चाह रही है। और वो धीरे-धीरे करने में कामयाब भी हो रही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकारें। तो अब जबकि ये गृह मंत्री की तरफ से बयान आया है तो इसके दोनों मायने हैं। एक तो ये कि ये इसको लागू करा लेगी। जहां जहां इनकी अपनी सरकार होगी। जैसे अगला कदम महाराष्ट्र है वहां भी इस पर बात आगे बढ़ गई है। जिसको लेकर के विवाद भी शुरू हुआ था। तो जो बड़े-बड़े स्टेट्स हैं वहां पर यह ऑलरेडी प्रक्रिया में है। तो एक तो यह बात हो गई। दूसरा ये कि 29 से पहले अगर ये 21 राज्यों में करा ले जाते हैं तो इसका एक पॉलिटिकल मैसेज भी 2029 के लोकसभा चुनाव में जाएगा और जो ये मैसेजिंग है इसको इसके लिए जाने जाते हैं अमित शाह और लगता है कि वो यही करते हुए दिख रहे हैं।
मायावती अब भतीजे से ज्यादा भतीजी पर विश्वास

जब से मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित किया है और उनके ससुर जो अशोक सिद्धार्थ थे उनको निष्कासित किया है। उसके बाद से दोनों जो पक्ष है वो खुलकर सामने आ गए हैं। अशोक को हालांकि अशोक सिद्धार्थ ने तो थोड़ी चुप्पी सी साध रखी है लेकिन आकाश आनंद जो है वो बोल रहे हैं और यहां तक कि उन्होंने मायावती के घर फोन करके यह भी जानने की कोशिश की कि उनका स्वास्थ्य कैसा है। स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की और जो मायावती को अच्छा नहीं लगा। अब मायावती को अच्छा नहीं लगा तो उन्होंने इस पर एक बयान भी लिखा। बयान अच्छे से Twitter पर आया जहां उन्होंने बताया कि यह आकाश आनंद ने अच्छा नहीं किया है और आकाश आनंद ने मेरे जो पीए है उसको फोन करके मेरे स्वास्थ्य के बारे में जानने की कोशिश की और स्वास्थ्य जानने के बाद पीए को यह कहा कि इस बारे में बहन जी को बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन इसी बीच जो ट्वीट है उसमें मायावती ने अपने भतीजी की चर्चा कर दी जो लॉ की छात्र हैं दीपिका आनंद दीपिका आनंद के बारे में उन्होंने चर्चा की और ऐसा लगता है कि दीपिका आनंद को वो चुनाव रणनीति के लिए राजनीति के लिए तैयार कर रही है। उसके बहुत सारे फैक्टर हैं। महिला है लॉ ग्रेजुएट लॉ कर रही हैं। पढ़ी लिखी है और आर्टिकुलेट है जैसा कहा जा रहा है। दूसरा ये कि जिस तरह की का अविश्वास आकाश आनंद को लेकर के है या अशोक सिद्धार्थ को लेकर के है वैसे सिद्धार्थ को वैसे अविश्वास की गुंजाइश यहां नहीं है और बहुत तरीके से मायावती दीपिका आनंद को ग्रूम करती हुई नजर आ रही है। हालांकि अभी उनकी उम्र जो है वह 22 साल ही है। इसमें अभी समय है 2- 3 साल का समय है। चुनावी उसमें लेकिन पार्टी की राजनीति में तो आ ही सकती है। चुनाव 25 में लड़ेंगी जब लड़े हो सकता है लोकसभा का चुनाव जब आए तब 29 में लेकिन संगठन में तो वो काम कर ही सकती हैं और संगठन में कभी भी उनको मैदान मैदान में ल्च कर सकती है मायावती और जिस तरह की बातें या जिस तरह के डिफरेंसेस भतीजे के साथ निकल कर के आ रहे हैं उसमें भतीजी के साथ जिनकी सगी बहन है, सगे भाई है, भतीजी के साथ जो इक्वेशन है वो ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं।
उतराखंड क्या BJP की तीसरी विजय
जिन पांच प्रदेशों में चुनाव होने हैं विधानसभा के उनमें उत्तराखंड भी एक महत्वपूर्ण प्रदेश है। और उत्तराखंड में जिस तरह के अह रिपोर्ट्स आ रही हैं वहां पर भी अह जिस तरह की रिपोर्ट आ रही हैं जो खबरें हैं उससे यह लग रहा है कि क्या धामी पुष्कर सिंह धामी वहां पर तीसरी बार सरकार बना पाएंगे और वो लगातार तीसरे बार मुख्यमंत्री बनेंगे। संभावनाएं इसकी ज्यादा आ रही है। कम से कम एक सर्वे जो है वो ये बता रहा है। हालांकि इसके पहले कई और सर्वे आ रहे हैं। वो सर्वे ये बता रहा है कि 70 में से 54 सीटें जो है भाजपा विधानसभा में जीत सकती है। और अगर ऐसी स्थिति आएगी तो यह तीसरी बार लैंडस्लाइड जैसी विक्ट विक्ट्री होगी और कांग्रेस के खाते में 14 सीटें आएंगी। अब हमने अभी कुछ दिन पहले एक वीडियो था जहां चर्चा ये हुई थी जिसमें उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री जो है हरीश रावत उनके सेक्रेटरी के घर पे छापा पड़ा था। जहां पर लगभग 50 लाख घड़ियां और बहुत सारी चीजें बरामद हुई। उसके बाद हरीश रावत ने इस्तीफा दे दिया और वो शिक्षा जॉब घोटाले को लेकर के ही मामला था। इन सब के बीच निश्चित तौर पर जो इमेज है कांग्रेस की वो खराब हुई हुई है।, ऐसा होता है जो लग रहा है कि देवभूमि में एक बार पुष्कर सिंह धामी जो है वो तीसरी बार चुन करके आ सकते हैं और जो सर्वे हैं उस सर्वे में बहुतमतलब समर्थन का जो बेस है वो बहुत स्ट्रांग है और चुनाव भी अब ज्यादा दिन नहीं है। छ महीने से कम का समय है। इन परिस्थिति में ये निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। इसलिए कि वहां पर और कोई दूसरा दल नहीं है।
चुनावों के परिणाम और बच गई मुख्यमंत्री की सीट
अब भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को लेकर के राजस्थान में बहुत सारा ना केवल शंका जताई जा रही थी बल्कि उनकी क्षमताओं को लेकर के भी प्रश्न चिन्ह लगाए जा रहे थे और ये कहा जा रहा था कि ये केंद्र सरकार का या केंद्रीय नेतृत्व का गलत निर्णय था और इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा बाद में अभी तो टाइम है विधानसभा के चुनाव में लेकिन निकाह के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का जो परफॉर्मेंस है वो कम कम से कम कांग्रेस से बेहतर है यहां यहां निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की बड़ी भूमिका होती है और निर्दलीय बड़ी संख्या में जीत करके आए हैं। लेकिन जो एडवांटेज या एज है वो भारतीय जनता पार्टी को है। मतलब अगर जब जब तक चुनाव परिणाम जहां तक आए थे वहां उन परिस्थिति में ये जो 1700 के आसपास सीटें डिक्लेअर हुई थी उसमें बीजेपी 708 और कांग्रेस लगभग 600 के आसपास सीटें मतलब 100 का अंतर है और ये अंतर अगर प्रपोशननेट उसमें देखिए तो सिंपल मेजॉरिटी के दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। तो कुल मिलाकर के अगर उस उस दृष्टि से देखिए तो भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में अभी भी एज बनाए हुए हैं। मजबूत स्थिति में है। अब उसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री की भूमिका है। हालांकि उन्होंने सीधे बोला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह है। लेकिन उसमें भजन लाल शर्मा से ज्यादा अशोक गहलोत और सचिन पायलट की भूमिका मुझे ज्यादा नजर आती है। जिस तरह से इनकी आपस की अदावत है, आपस की लड़ाई है और वहां पर जिस तरह से कांग्रेस काम कर रही है, उससे कहीं इस बात की संभावना नहीं नजर आ रही है कि आज नहीं तो कल कांग्रेस वहां मजबूती के साथ चुनाव लड़ पाएगी और भारतीय जनता पार्टी को हरा पाएगी। जिस तरह के माहौल हैं बावजूद इसके कि भारतीय जनता पार्टी खुद वहां बहुत खराब स्थिति में है। लेकिन कांग्रेस वहां ज्यादा खराब स्थिति में है
