Bihar — बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते

बांकीपुर विधायक बनने के बाद लगता है प्रशांत किशोर ने लोगों के दिलों में पूरी तरह राज करने और बिहार की गद्दी पाने के लिए जबरदस्त कवायद शुरू कर दी है और इसकी शुरूआत जनता के बीच जाकर उनकी शिकायते सुनने से लेकर दूर करने से की है, जी हां पता चला है कि प्रशांत किशोर ने उनके विधायक आवास को जन सेवा केंद्र में तब्दील कर दिया, जहां जनता आकर अपनी शिकायत और समस्या के बारे में बता सके। अब हाल ये है कि यहां पर उम्मीदे लेकर सैकड़ों की संख्या में लोग दूर दूर से पहुंच रहे हैं और लगतार इस केंद्र पर भीड़ बढ़ती जा रही है ,इस भीड़ में वो युवा भी है जिनके पास रोजगार नहीं और वो रोजगार की गुहार लगा रहे हैं और वो युवा भी शामिल हैं जिनका सरकारी रोजगार बिना किसी कारण के छीन लिया गया, यहीं नहीं रोजगार की गुहार लगाने में महिलाएं भी पीछे नहीं है बड़ी बात है कि उन्हें उम्मीद है कि यहां आकर उनकी फरियाद पूरी होगी। अपने इलाके में अवैध कामों से परेशान भी बहुत से लोग प्रशांत किशोर के आवास पर बड़ी उम्मीद से पहुंच रहे हैं। इन लोगों का यही कहना है कि हम इतने सालों में पहली बार देख रहे हैं कि हमारे चुने हुए प्रतिनिधि इतना अच्छा काम कर सकते हैं, ऐसी व्यवस्था पहली बार देखी है, वैसे प्रशांत किशोर की ये पहल जनता के लिए बल्ले बल्ले है पर बीजेपी के लिए खतरे की घंटी हो सकती है क्योंकि ये जनता ही है जो किसी को गद्दी पर बिठाती है और बड़ी आसानी से उतार भी देती है।

कानून सबके लिए बराबर चाहे कांग्रेस के शहजादे या एक छात्र

 

कानून सबको समान नजरों से देखता है , जो गुनाहगार है उसके लिए कानून सख्त है लेकिन जिसपर पर अत्याचार किया जा रहा है उसकी रक्षा के लिए कानून सबसे पहले खड़ा है, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के दो अलग अलग फैसलों से ये बात सामने आई है कि कानून की आंखे सबको बराबर नजरों से देखती हैं चाहे वो कांग्रेस नेता Rahul Gandhi हों या यूनिवर्सटी में पढ़ने वाला एक छात्र, चलिए पहले राहुल गांधी की बात करते हैं , राहुल गांधी की सेना पर की गई टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और CJI chief justice of India सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कह दिया कि यहां किसी को भी विशेष प्राथमिकता नहीं मिलती अदालत के लिए सब बराबर हैं। दरअसल 2022 में राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना और चीन के सैनिकों से संबंधित एक टिप्पणी की थी और उसको लेकर उदय शंकर श्रीवास्तव जो Border Roads Organization (BRO) के पूर्व निदेशक हैं उन्होंने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी भारतीय सेना के प्रति अपमानजनक और मानहानिकारक, उनकी शिकायत पर राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था ,लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को मानहानि के इस मामले में पेश होने के लिए समन जारी किया , राहुल गांधी इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट गए पर हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अब इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता की ओर से बीजेपी नेता और वकील गौरव भाटिया ने कोर्ट में कहा उनकी याचिका करीब पांच महीने से सूचीबद्ध नहीं हुई है और राहुल गांधी कोई VVIP नहीं हैं , जो ऐसा हो रहा है। इस पर चीफ जस्टिस ने साफ कहा कि सभी के लिए समान प्रक्रिया लागू होगी और जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दिया जाए। आपको बता दें कि अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने इस मामले की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। पर अब अदालत ने केवल जल्द सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाने को कहा है। माना जा रहा है यह राहुल गांधी के लिए मुशिकलें पैदा कर सकता है।

और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने ही एक छात्र का बचाव करते हुए एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से छात्र को 5 लाख रुपये के निजी मुचलके का नोटिस भेजने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त भी कर दी। दरअसल जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से प्रदर्शन में कथित भागीदारी को लेकर इस छात्र को नोटिस जारी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जब छात्र प्रदर्शन से जुड़ी तमाम एफआईआर रद्द कर दी गई हैं और भविष्य में भी किसी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया है, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया?
सूर्यकांत जस्टिस ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश और नोएडा के अधिकारी छात्रों के बीच भय का माहौल नहीं बना सकते।