औवेसी की पंतग उड़ी खुल आसमान में -Congress BJP दोनों को झटका 

राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत से एक तरफ यहां के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ काम ना करने का जो कैंपेन  चल रहा था वो थम गया और दूसरी तरफ  माना जा रहा है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने यहां  दो सीटें जीतकर , कांग्रेस के पारंपरिक मुस्लिम-जाट वोट बैंक में  सेंध लगाकर राज्य में बीजेपी-कांग्रेस के अलावा   तीसरे विकल्प की नींव रख दी है। चर्चाएं जोरों पर हैं कि ओवैसी की पतंग ने राजस्थान में धाक जमा दी और कांग्रेस के साथ बीजेपी के सपनों को भी उडाने आ गई है।

औवैसी और  सांसद हनुमान बेनीवाल की जुगलबंदी काम आई 

वैसे राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजे कुछ चौकाने वाले ही लगते हैं ,  पिछले कुछ समय से  राजनीतिक पंडितों ने  जिस तरह से राज्य में कानून व्यवस्था और कईं और मामलों को लेकर राज्य के CM भजनलाल शर्मा  को कटघरे में खड़ा कर रखा था और इसके चलते भजनलाल शर्मा को बीजेपी आलाकमान की ओर से अलविदा कहने की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही थी पर जिस तरह से निकाय चुनाव में बीजेपी ने जबरदस्‍त जीत हासिल की है, उससे  राजस्‍थान के 10 नगर निगमों में बीजेपी का मेयर बनना तय माना जा रहा है, और अब cm  भजनलाल शर्मा की स्थिति एक बार फिर मजबूत हो गई है और उनके खिलाफ उठने वाली आवाजें भी  थम गई है  , लेकिन इसके साथ  हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM) की राजस्थान में धमाकेदार एंट्री भी  सबको चौंका रही है, आपको बता दें कि गुलाबी नगरी कही जाने वाली जयपुर के नगर निगम चुनाव में पहली बार AIMIM ने कोई जीत हासिल की है।यहां पर औवेसी का मास्टरस्ट्रोक रहा,  हनुमान बेनीवाल की पार्टी के साथ  जुगलबंदी करना, औवैसी ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी RLP के सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल के साथ गठबंधन किया और यह जीत हासिल की AIMIM ने RLP के साथ समझौते करके   कुल 5 वार्डों पर अपने प्रत्याशी उतारे और  5 में से 2 सीटों पर जीत दर्ज की—एक जयपुर में और दूसरी झुंझुनूं में

जुगलबंदी ने   मुस्लिम और जाट वोटर्स को अपनी ओर खींचा 

माना यही जा रहा है कि   AIMIM और RLP की यह जुगलबंदी काफी हद तक  मुस्लिम और जाट वोटर्स को अपनी ओर खींच पाई है। जयपुर के मुस्लिम बहुल क्षेत्र भट्टा बस्ती के वार्ड 146 में तो खुद ओवैसी ने  आक्रामक चुनाव प्रचार किया  और मुस्लिम समुदाय के युवाओं को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। यहां  AIMIM के खाता खुलने से एक बात यह भी कही जा रही है कि राजस्थान का मुस्लिम मतदाता चाहे बीजेपी को वोट ना देकर  कांग्रेस को दे रहा था पर अब वो कांग्रेस के  एकाधिकार से भी बाहर निकलकर ओवैसी के रूप में तीसरे विकल्प को अपनाने के लिए तैयार हो चुना है। चर्चाएं चल निकली हैं कि यदि  हनुमान बेनीवाल और ओवैसी की यह जुगलबंदी कायम  रहती है तो आने वाले  विधानसभा और  पंचायत चुनावों में यह जो़डी राजस्थान में  लगातार चल रही  द्विपक्षीय राजनीती यानी BJP v-s  कांग्रेस  को  बदल सकती है। इस जुगलबंदी ने कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया क्योंकि इसने   कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को तोड़ा है,   वैसे आने वाले समय में यह जुगलबंदी बीजेपी के लिए भी खतरा मानी जा रही है  और इनसे निपटने के लिए Congress के साथ साथ बीजेपी को भी अपनी चुनावी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा। इस चुनाव नतीजों से जहां बीजेपी खेमे में उत्साह है वहीं कांग्रेस थोड़ी मायूस भी है पर  बीएसपी सुप्रीमो मायावती जी ने तो यहां नतीजों में धांधली किए जाने का आरोप लगा कर नई बहस को जन्म दे दिया, मायावती का कहना है उनकी पार्टी के काफी उम्मीदवार सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी की वजह से दोबारा गिनती में जबरदस्ती थोड़े-थोड़े वोटों के अंतर से हरा दिए गए हैं  अगर ऐसा नहीं होता तो  पार्टी का यहां और भी अच्छा रिजल्ट आ सकता था।

Rahul Gandhi ने क्या लिया ममता से बदला 

एक कहावत बहुत ही मशहूर है-जैसी करनी वैसी भरनी  और अकसर बातों में लोग इसका उपयोग भी कर लेते हैं, लगता है ये कहावत ममता बनर्जी पर आजकल बिल्कुल फिट बैठ रही है, याद कीजिए ममता जब सीट पर थी तो अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझती थी, खासतौर पर कांग्रेस के साथ उनका छत्तीस का आंकड़ा शुरू हो गया था और वो ममता की ही शुरूआत थी कि उन्होंने राहुल गांधी का इंडी नेता के तौर पर विरोध शुरू किया, बाद में केजरीवाल ने इसमें अपने सुर मिलाए, खैर इसके बाद भी राहुल गांधी ने कईं मौकों पर दीदी से सुलह करने उनके साथ मिलकर चुनाव पशिचम बंगाल में चुनाव लड़ने की पेशकश की पर हर बार दीदी ने ठुकरा दी, पर अब दीदी को इसका फल मिलने की शुरूआत हो चुकी पता चला है कि  बंगाल में होने वाले उपचुनावों के लिए  ममता बनर्जी के TMC   गुट ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की कोशिश की और मिलकर चुनाव लड़ने की पेशकश रखी पर   कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को लेकर यह प्रस्ताव सिरे से ठुकरा दिया, दीदी कुछ अच्छी खबर सुनने का इंतजार करती रही और कांग्रेस ने नंदीग्राम और रेजीनगर में अपने उम्मीदवारों का नाम घोषित कर दिया, बेचारी दीदी को भी उसके बाद अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करना पड़ा।  ममता चाह रही थी कि कांग्रेस नंदीग्राम से चुनाव लड़े और TMC  रेजीनगर से पर कांग्रेस इसके लिए सहमत नहीं हई ,इसके पीछे दो वजहें मानी जा रही हैं पहली कांग्रेस राज्य में अपने दम पर ही अपना आधार फिर से मजबूत करना चाहती है और उसे लगता है कि  गठबंधन करने से यह संभव नहीं हो पाएगा, और दूसरी बड़ी वजह यही है कि दीदी से काग्रेस ने बदला ले लिया पहले दीदी ने साथ चुनाव लड़ने का प्रस्ताव ठुकराया था, अब राहुल ने ठुकरा दिया। वैसे इन दो सीटों पर होने वाले इस चुनाव  में बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।